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मोदी और कथित योगी हृदयविहीन मानवेतर जीव हैं

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_-निर्मल कुमार शर्मा

प्रसिद्ध वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन ने अपने सुप्रसिद्ध सिद्धांत जीवजाति का उद्भव या ओरिजिन ऑफ स्पीसीज में यह बात विस्तार से बताया है कि कैसे करोड़ों-अरबों सालों के जैविक विकास के क्रम में जीवधारियों का विकास हुआ, सबसे अन्त में अफ्रीका के वर्तमान केन्या के किसी एक जगह में चिंपैंजी और गोरिल्लाओं से एक ऐसे जीव का विकास हुआ,जो पेड़ों से उतरकर जमीन पर आकर अपने दोनों पैरों पर खड़े होकर चलने का प्रयास करने लगा और यही दोनों पैरों पर जमीन पर चलने वाला जीव ही हम आधुनिक मानवों मतलब होमोसेपियंस का सबसे पहला पूर्वज था,धीरे-धीरे वह पत्थरों को घिस-घिसकर उसे नुकीला बनाकर उसे शिकार के लिए औजार के तौर पर प्रयोग करने लगा,दो पत्थरों को रगड़कर उससे निकली चिनगारी से सूखे पत्तों में आग लगाकर उसने आग का प्रयोग अपने किए हुए शिकार के माँस को भूनने में करने लगा,उसने शुरूआत में लकड़ी के बड़े-बड़े कुँदों को नदी के पानी पर तैराकर उसी पर बैठकर एक जगह से दूसरी जगह जाने का तरीका सीखा,फिर उन मोटे लकड़ी के कुँदों को बीच में खोखलाकर,उसे नाव का आकार दे दिया,अब तक अलग-अलग रहनेवाले कुछ आदिमानव मिल-जुलकर एक जगह अपनी घास-फूस से बनाई हुई झोपड़ियों के एक समूह बनाकर रहने लगे,अब तक आदिमानव आग जलाना सीख चुका था,इसलिए रात्रि में अब वह हिंसक जंगली जानवरों से अपने छोटे शिशुओं की तथा स्वयं की सुरक्षा के लिए आग भी जला लेता था,यहीं से मानव गाँव बसाने की कला को जान गया और उसके लाभ को समझकर प्राचीनकाल से ही मानव दुनियाभर में प्रायः नदियों के किनारे अपनी बस्तियों को बसा लिया,प्राचीन मानव को नदियों के किनारे रहने से बहुत से लाभ थे यथा नदियाँ उसकी प्यास बुझाने के अलावे उसके खेतों की सिंचाई भी करतीं थीं, जिससे उसको खाने के लिए प्रचुर मात्रा में अन्न पैदा होने लगा और उसके द्वारा अपने उत्पादित फसलों को किसी अन्य जगह ले जाने के लिए नाव की मदद से यातायात का सबसे सुगम और सस्ता परिवहन का माध्यम नदी के जल के रूप में मिल गई,यही कारण है कि आज के वर्तमान समय में दुनियाभर के नक्शे पर एक विहंगम दृष्टि डालिए,पूरी दुनिया भर में प्रायः लगभग सभी नगर या तो नदियों के किनारे बसे हैं या समुद्रों के तटों पर बसे हैं। उक्तवर्णित आख्या मनुष्य के कपि से एक सभ्य मानव बनने की एक संक्षिप्त वैज्ञानिक इतिहास है।_*             

  *_अब हम मानव सभ्यता के विकास के क्रम में अच्छे मानवों और बुरे मानवों मतलब मानव रहकर भी जंगली और हिंसक पशुओं जैसे व्यवहार करनेवाले मानवों के स्वभाव व व्यवहार पर ध्यान केन्द्रित करेंगे,मानव सभ्यता के शुरूआती अवस्था से ही जमीन,जायदाद व स्त्रियों के लिए अक्सर भयंकर लड़ाइयाँ होतीं रहीं हैं,पूरा मानव इतिहास भयंकर लड़ाइयों, बर्बरता और मानवों द्वारा ही मानवों और मानव सभ्यताओं की विनाश और सर्वनाश की कथाओं से भरा पड़ा है। जब से इस दुनिया में कुछ धूर्त, शातिर व अत्यंत लोभी कुछ मानव समूहों द्वारा अपने स्वार्थ के लिए विभिन्न धर्मों की स्थापना हुई है,तब से मनुष्य धर्म के नाम पर अपने विरोधी धर्मानुयायियों के लिए और भी ज्यादे हिंसक और क्रूर तथि वहशियाना व्यवहार करना शुरू कर दिया,यह ऐतिहासिक कटुयथार्थ और कटुसत्य तथ्य है कि विभिन्न धर्मों ने दुनिया भर में अब तक हुए युद्धों से भी ज्यादे कत्लेआम और मनुष्यता की हत्या धर्म के नाम पर किया है और करवाया है !

इसके मामले में सभी धर्म एक से बढ़कर एक हैं,चाहे ईसाई धर्म हो, इस्लाम धर्म हो,यहूदी धर्म हो या हिन्दू धर्म हो ! बात मानव,मानवीयता और इंसान की हो रही थी। सभी मानव देखने में लगभग एक जैसे ही होते हैं,सभी मानवों के वाह्याकृति लगभग एक जैसी ही होती है,परन्तु रंग,रूप,कद-काठी को छोड़ दिया जाय तो मानव का व्यवहार उसके व्यक्तित्व निर्माण का सबसे बड़ा कारक है उदारणार्थ सम्राट अशोक के समकालीन भारत के तथा दुनियाभर के सभी राजा-महाराजाओं की मुखाकृति,हाथ-पैर आदि भी हूबहू सम्राट अशोक से मिलते-जलते रहे होंगे,परन्तु क्या कारण है कि आज से 2325वर्ष पूर्व जन्में सम्राट अशोक भारत और दुनिया भर के ऐतिहासिक क्षितिज पर अभी भी ध्रुव तारे की तरह दमक रहे हैं और आज के वर्तमान समय में भी अपना सुगंधित व इंद्रधनुषी छटा बिखेर रहे हैं ?,परन्तु उनके समय के तथा उनके बाद के हजारों राजाओं-महाराजाओं और सम्राटों का कोई नामलेवा तक भी नहीं है,वे आज इतिहास के अंधेरे,गुमनाम कोने में चुपचाप दफन हैं ! इसका सीधा सा उत्तर है कि देवानांमप्रिय प्रियदर्शी सम्राट अशोक अपनी प्रजा के प्रति समर्पित थे,अपनी प्रजा के हर मुसीबत,कष्ट,दुःख,गरीबी,अभाव को हर क्षण दूर करने को कृतसंकल्पित थे,उनके दिल में अपनी प्रजा के लिए सदा दया,करूणा,सहृदयता, भातृत्व,प्रेम,सहानुभूति,संकटमोचन,आँसू,कराह, आह,सिहरन,शर्म,हया,दयालुता,अहिंसा, मानवीयता,सहिष्णुता,परोपकार आदि गुणों को अपने अंदर समाहित करके उसके कष्ट को हर क्षण दूर करने में अपनी सत्ता की सारी शक्ति झोंंक दिए थे। वास्तव में मानव कहलाने का सही हकदार वही है,जिसमें उक्तवर्णित ये सारे गुण समाहित हों। इस दृष्टि से इस दुनिया में बहुत कम लोग हैं जो सम्राट अशोक की बराबरी कर सकते हैं फिर भी भगवान बुद्ध,सुकरात, कन्फूशियस,फ्रेडरिक हिगेल,विलियम शेक्सपियर,रूसो,गैलिलियो,ब्रूनो, कोपरनिकस,लियानार्डो डा विंची,स्वामी विवेकानंद,शहीद-ए-आजम स्वर्गीय भगतसिंह,बाबा भीमराव आंबेडकर आदि-आदि प्रमुख लोग हैं,जो सही मायने में मनुष्य या इंसान कहलाने के ह़कदार हैं,क्योंकि ये सभी लोग इस दुनिया को अपने कर्मों से मनुष्यता और इंसानियत को साकार करके दिखाया।_*       

 *_लेकिन मनुष्य जैसे दिखनेवाले सभी मनुष्य भी नहीं होते हैं,राजा,सम्राट, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति या राज्याध्यक्ष का पद वे भले ही कुछ दिनों के लिए अपने तिकड़मों, धोखाधड़ी और धूर्ततापूर्ण कुकृत्यों से भले ही प्राप्त कर लें,लेकिन ऐसे अमानवीय,असहिष्णु, बर्बर,क्रूर,जालिम और हत्यारे शासकों को सत्ता से हटते ही बदबूदार सड़ते हुए,बजबजाते हुए इतिहास के कोने में दफन कर दिया जाता है,इस श्रेणी के क्रूर,हिंसक,हत्यारे राजाओं,सम्राटों, शासनाध्यक्षों में प्रमुख रूप से प्राचीनकाल में भारत में हुआ एक हूँण वंश के राजा मिहिरकुल, चंगेज खान,हलाकू खान,रूस का जार ईवान-द-टेरिबल,हिटलर व मुसोलिनी आदि इसी निम्न श्रेणी के मनुष्यों में आते हैं,जिनको आज सारी दुनिया बहुत ही हिकारत भरी और घृणा की दृष्टि से देखती है। वर्तमान भारत में मोदी के कुशासनकाल में जिस प्रकार भारत की जनता भूख से,बेरोजगारी से,गरीबी से,दवाओं, ऑक्सीजन,अस्पतालों आदि की कमी से भयंकरतम् रूप से जूझकर लाखों की संख्या मर रही है,मरने के बाद भी शवों को जलाने,दफनाने आदि तक की सुविधा नहीं है,शवों को जलाने के लिए लकड़ी तक की व्यवस्था नहीं है,मजबूरन लोग अपने परिजनों के शवों को रात के अंधेरे में हजारों की संख्या में चुपचाप या तो नदी के जल में प्रवाहित कर दे रहे हैं या नदी किनारे स्थित रेत में गड्ढा खोदकर उसे दफन कर दे रहे हैं,अपने परिजनों के शवों की पहचान और सुरक्षा के लिए लोग उसे रामनामी चद्दर से ढककर,उसकी कुत्तों आदि से सुरक्षा के लिए बाँस की खपाचियों को गाड़कर उसे घेर दे रहे हैं,परन्तु तेज हवाओं से रेत उड़ जाने से उन अभागे शवों को कुत्ते,चील,कौवे आदि नोच रहे हैं !

इतनी कारुणिक और बीभत्सतम् मंजर के बावजूद वर्तमान समय के सत्ता के कर्णधार मोदी और उसका छोटा संस्करण उत्तर प्रदेश का कथित योगी अगले साल होनेवाले उत्तर प्रदेश के चुनाव में जीतने की रणनीति बनाने में व्यस्त हैं,उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री अपने राज्य में दवाओं,ऑक्सीजन और अन्य सुविधाओं की भारी कमी से मरते लाखों लोगों के लिए कोई सुविधा उपलब्ध कराने के बजाय एक पशु के लिए मेडिकल सुविधा उपलब्ध करवाने की हैवानियत करने से भी बाज नहीं आ रहा है।

इसलिए वर्तमान समय के भारत के सत्ता के मोदी और कथित योगी आदि जैसे क्रूर, अत्याचारी और अमानवीय कर्णधार किसी भी मायने में इतिहास में कुख्यात नीरो,चंगेज खान,हिटलर और मुसोलिनी आदि से किसी भी तरह कमतर नहीं हैं,ये हृदयविहीन, करूणा और दयाविहीन क्रूरतम नरभक्षी हैं। इनके कुकृत्यों को इतिहास कभी भी माफ नहीं करेगा, इन्हें भी इनके सत्ता से हटते ही दुनिया के उनके जैसे पूर्ववर्ती क्रूर शासकों और तानाशाहों की तरह इतिहास के मनहूस व गंदे कोने में सदा के लिए दफन कर देगा । भविष्य में जन्म लेनेवाली पीढ़ियों के लोग इनके नाम पर थूकेंगे !_*

*_-निर्मल कुमार शर्मा,

‘गौरैया एवम पर्यावरण संरक्षण तथा पत्र-पत्रिकाओं में सशक्त व निष्पृह लेखन ‘,

प्रताप विहार,गाजियाबाद, उप्र

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