-सुसंस्कृति परिहार
इस बार राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस पर अहंकारी रावण की तरह मोदीजी का स्वाभिमान और गुमान धराशाई हो गया।वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सामने इतना गिर गए कि उन्होंने ना केवल प्रतिपक्ष पर कोई हमला किया ना ही चीन, अमेरिका और रुस जैसे शक्तिशाली राष्ट्रों का कोई ज़िक्र किया।ना ही देश विकास की कोई रीतिनीति का बखान किया ।उनका सारा भाषण संघ की उद्देशिका के अनुरूप उसे खुश कर सत्ता पर बने रहने का एक अंतिम प्रयास जैसा था।

हम सब भली-भांति इस बात से वाकिफ हैं कि गुजरात लाबी और नागपुरी संतरों के बीच पिछले कई वर्षों से तलवारें खिंची हुई है जिसके कारण आज तक भाजपा का अध्यक्ष नहीं बन पा रहा है।अभी एक परेशानी तो बनी ही थी कि उपराष्ट्रपति धनखड़ के त्यागपत्र के बाद अब संघ इस पर भी अपना दावा ठोकना चाह रहा है। ये परिस्थितियां इसलिए और भी जटिल इसलिए हो गई थीं कि वर्तमान कार्यवाहक भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने यह साफ़ कह दिया था कि भाजपा अब पैरों पर खड़ी हो गई है उसे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की अब ज़रुरत नहीं रही।
यह बात संघ को बुरी तरह चुभी है। इसलिए नितिन गडकरी के तमाम वक्तव्य भाजपा के विपरीत आते रहे हैं। विदित हो,नितिन गडकरी मोहन भागवत के नज़दीकी नातेदार हैं।
इन परिस्थितियों में मोदीजी ने कुछ दिनों से स्वदेशी अभियान चलाया हुआ है जबकि वे स्वयं विदेशी चीज़ों का इस्तेमाल धड़ल्ले से कर रहे हैं यह स्वदेशी जागरण अभियान जिसे वे वोकल बार लोकल जैसे अंग्रेजी शब्द से चला रहे हैं। लालकिले के संबोधन में भी उन्होंने सभी दलों से इसे अपनाने की बात की है। स्वदेशी जागरण का मूलमंत्र तो संघ चला रहा है जबकि स्वदेशी की अलख गांधी नेहरू ने विदेशी कपड़ों की होली जलाकर प्रारंभ की थी। स्वदेशी जागरण की बात संघ को खुश करने की ही एक सच्चाई है।
अब तक देशवासी इस बात को भली-भांति समझ गए हैं कि देश और विदेश में भारत की जो विकृत छवि बनी है उसके लिए जिम्मेदार गुजरात लाबी के हम दो हमारे दो ही जिम्मेदार है।इसी सच को दबाने उन्होंने आज यह तर्क दिया कि देश की तमाम समस्याओं के लिए जिम्मेदार घुसपैठिए हैं। लगता है वे डोनाल्ड ट्रम्प की तरह क्रूर कार्रवाई करने वाले हैं इन घुसपैठियों के खिलाफ। इसका अंदाजा भाषण के इस अंश में देखा जा सकता है -वे कह रहे थे कि “षड्यंत्र के तहत देश की डेमोग्राफी को बदला जा रहा है,यह घुसपैठिए मेरे देश के नौजवानों की रोजी-रोटी छीन रहे हैं घुसपैठिए देश में बहिन बेटियों को निशाना बना रहे हैं ये बर्दाश्त नहीं होगा। यह घुसपैठिए आदिवासियों को भ्रमित करके उनकी ज़मीनों पर कब्जा कर रहे हैं।”
वास्तविकता यह है कि संघ शुरू से पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए घुसपैठियों के खिलाफ है वह सबको बाहर करना चाहता है जिसमें मुसलमानों की तादाद ज्यादा है।जबकि हमारी सनातन संस्कृति को वे यदि मानते हैं तो उन्हें शरणागतों से परहेज़ नहीं होनी चाहिए। आदिवासियों को छोड़कर जो भी यहां है वह बाहर से आई विभिन्न प्रजातियों से उत्पन्न संतानें हैं कोई शुद्ध रक्त नहीं है। लेकिन गांधी जी की हत्या के पीछे सभी मुसलमानों को देश से ना भगाने की पीड़ा ही इसमें छिपी हुई है।
ये कौन घुसपैठिए हैं।मोदीजी इसे अच्छी तरह जानते हैं इसलिए उन्हें आज तक यानि बारह साल में भी नहीं पकड़ा गया।साफतौर पर जाहिर है देश और विदेश की धरती पर आपके बगलगीर गौतम अडानी और मुकेश अंबानी जिस तरह आदिवासियों, किसानों की ज़मीन,जल और जंगल हथिया रहे हैं। संस्थानों का निजीकरण कर रोज़गार छीन रहे हैं।वह किसी से छुपा नहीं है।बहिन बेटियों को जहां तक निशाना बनाने की बात है उसकी यदि ईमानदारी से रपट देखें तो पाएंगे। सर्वाधिक दुष्कर्म मामलों में भाजपा और संघ से जुड़े कार्यकर्ता मिलते हैं। सिरमौर तो आशाराम और राम-रहीम बने हुए है जिन पर आपकी सरकार रहम बरत रही है। एक नया अखाड़ा बागेश्वर धाम में भी शुरू होने की ख़बर मिल रही है। जहां के दरबार में आप भी हाजिरी लगा के आए हैं।
ये सभी बातें तो घुमा फिरा कर कहीं गई है लेकिन सीधे सीधे लालकिले जैसी पावन जगह से जहां हम स्वाधीनता संग्राम के सेनानियों का स्मरण करते हुए उन्हें याद करते आए हैं उस जगह पर देश के ग़द्दारों की संस्था संघ का यशगान करना देशवासियों को नागवार गुज़रा है।संघ भी हैरानी में है कि मोदी ने ये क्या किया सोए लोगों को जगा दिया।संघ का असली चरित फिर सामने ला दिया।क्या ज़रूरत थी संघ की तारीफ करने की।ये तो शैतानी चाल है मोदीजी की।हम तो डूबेंगे सनम तुम्हें भी ले डूबेंगे।
सारी दुनिया जानती है कि संघ के अनुषंगी संगठन आतंकी सूची में शामिल हैं।उनको रोकने की जगह उन्हें इस तरह प्रशंसित करना उन्हें फंसाने का उपक्रम है। वहीं यह कतिपय लोगों का यह कहना कि संघ को परेशान करने का उनका इरादा बिल्कुल नहीं था वे तो इस वक्त अपनों से घिरे हैं उन्हें संघ का सहारा चाहिए था इसलिए उन्होंने रिस्क लेकर संघ की उद्देशिका को मद्देनजर रखते हुए भाषण दिया।अब ये बात और है कि वे जल्द बाजी में यह भूल गए कि यह तारीफ़ उन्हें भारी पड़ जाएगी।
अब हालात ये हैं कि भाजपा तो मुसीबतों से गुजर रही है इस भाषण से संघ भी आहत हुआ है।वह सांस्कृतिक संगठन के तौर पर पीएम हाउस से सर्टिफिकेट लेना चाह रहा है ताकि उसके अनुषंगी संगठन आतंकी सूची से बाहर हो जाएं।
लेकिन देश संघ के इन ग़द्दारों, संविधान और तिरंगे का अपमान करने वाले गांधी के हत्यारों को भूल नहीं सकता है।ये वही लोग हैं जो तिरंगे के तीन रंगों को अशुभ मानते रहे और 53 वर्षों बाद अपने मुख्यालय पर इसे बेमन से फहराए।उनका हिंदू मुस्लिम एजेंडा, मनुवादी विचार, स्त्रियों की उपेक्षा,सनातन संस्कृति को बर्बाद कर हिंदू राष्ट्र की स्थापना ऐसे कारक है।जिनके कारण दुनिया में आज भारत की धर्मनिरपेक्ष और समन्वादी संस्कृति को आघात पहुंचा है। हालांकि मोदी अमित शाह उनके विचारों पर दृढ़ता से चले। लेकिन मोदी के बढ़ते गुमान ने दोनों का सफाया करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
देश में जिस तरज्ञ फासिस्ट वादी ताकतों को बढ़ावा गया। संविधान विरोधी काम हुए। स्वतंत्र इकाईयों को गुलाम बनाया गया। वोटों की चोरी और झूठ की दम पर सत्ता कायम रखी।लगता है अब वह दिन करीब आ पहुंचा है जब देश के दोनों शत्रुओं के बीच तकरार बढ़ेगी जो इन्हें ख़ामोशी के आगोश में ले जाएगी। भारत पुनः एक स्वस्थ गणराज्य में लोकतंत्र और संविधान को तवज्जो देगा।
देश में यह पहली दफा हुआ है जब लालकिले में 103 मिनिट की लंबी तहरीर में प्रधानमंत्री ने देश के आतंकी संगठन को खुश करने की चेष्टा में देश की गरिमा और सम्मान की मर्यादा का उल्लंघन कर देशद्रोह का काम किया है।जनता की अदालत ने उसे मन से बुरी तरह नकार दिया है।आगे आगे देखिए होता है क्या?