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स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा में नए आयाम स्थापित करती मोहन सरकार…

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आयुष्मान भारत से एयर एम्बुलेंस तक उड़ान भरता मध्यप्रदेश..

मोहन सरकार में लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के बढ़ते कदम, निरंतर सुधार- नवाचार से स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा में नए आयाम स्थापित करती मोहन सरकार

मप्र में आयुष्मान भारत निरामयम योजना के अंतर्गत 4.02 करोड़ कार्ड जारी किए गए हैं। लगभग 5599 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र भी खोले गए हैं, जिससे न्यूनतम दर पर मरीजों को दवा उपलब्ध हो सकेगी।

नरेन्द्र शिवाजी पटेल, राज्य चिकित्सा शिक्षा विचार, मप्र शासन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत का सपना साकार हो रहा है। इस सपने को साकार करने में स्वास्थ्य क्षेत्र की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक स्वस्थ राष्ट्र ही समृद्ध और शक्तिशाली राष्ट्र बन सकता है। स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार, तकनीकी विकास, और गुणवत्ता सुधार के प्रति प्रतिबद्धता के साथ भारत वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। इसी दिशा में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य ने लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है।

जहां एक और प्रदेश में वर्ष 2003 तक सिर्फ 5 शासकीय मेडिकल कॉलेज थे। भाजपा के शासनकाल में 12 नए मेडिकल कॉलेज प्रारंभ हुए और अब एक साथ 12 अन्य मेडिकल कॉलेज पीपीपी मोड पर प्रारंभ करने की और हम बढ़ चुके हैं। हाल ही में 3 नये मेडिकल कॉलेज नीमच, मंदसौर, सिवनी का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कर कमलों से संफा हुआ है। शीघ्र ही प्रदेश में 50 मेडिकल कॉलेज होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्र में अधोसंरचना को सशक्त करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उनका लक्ष्य है कि प्रदेश के प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र में एक मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जाए, जिससे हर नागरिक को उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ मिल सकें। इसके साथ ही राज्य सरकार प्रत्येक जिले के लिए एक मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में हम निरंतर प्रयास कर रहे हैं।

पिछले एक वर्ष में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरदर्शिता और दृढ़ संकल्प ने प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में कई ऐतिहासिक पहल की हैं। चिकित्सा महाविद्यालयों में एमबीबीएस और पीजी मेडिकल सीटों की संख्या में वृद्धि से लेकर तकनीकी रूप से उक्त स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार तक राज्य ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उज्जैन में प्रदेश की पहली मेडिसिटी और एक नए चिकित्सा महाविद्यालय के लिए 592.30 करोड़ का प्रावधान कर राज्य ने

चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है। 13 शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की स्थापना के लिए स्वीकृति दी है। स्वास्थ्य संस्थानों के लिए 46,491 नए पद सूजित किए गए हैं। यह कदम न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी प्रदान करेगा। प्रदेश में दो वर्षों से लंबित लगभग एक लाख नर्सिंग छात्र-छात्राओं की परीक्षा इस वर्ष आयोजित की गई, जिससे उनके भविष्य को लेकर उपजे संदेह का निराकरण हुआ है।

प्रदेश के हर नागरिक को उत्तम स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्राथमिकता रही है। जहां एक ओर प्रधानमंत्री जी ने आयुष्मान योजना का विस्तार करते हुए 70 वर्ष से अधिक के नागरिकों को योजना में लाभ की पात्रता प्रदान की है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री जी ने ‘पीएम श्री एयर एंबुलेंस सेवा’ के माध्यम से राज्य के गंभीर रोगियों और दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित और उच्च चिकित्सा सहायता प्रदान की है। हेली एंबुलेंस और फिक्स्ड विंग फ्लाइंग एंबुलेंस की सेवाएं राज्य के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत कर रही हैं।

मात्र में आयुष्मान भारत निरामयम योजना के अंतर्गत 4.02 क्नोड़ कार्ड जारी किए गए हैं। लगभग 5599 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र भी खोले गए हैं, जिससे न्यूनतम दर पर मरीजों को दवा उपलब्ध हो सकेगी। सरकार ने गांधी मेडिकल कॉलेज, भोजल के बाल चिकित्सा विभाग में अपना पहला राज्य नवजात और बाल चिकित्सा संसाधन केंद्र स्थापित किया। डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रौद्योगिकी का उपयोग बढ़ाया गया है। पीएम-जनमन अभियान के तहत 74 मोबाइल मेडिकल यूनिट्स संचालित की गई, जो दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रही हैं।

मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों ने राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है। भारत सरकार द्वारा मुस्कान सर्टिफाइड अस्पताल, लक्ष्य सर्टिफाइड अस्पताल और कायाकल्प अभियान में अपना विशेष स्थान बनाया है। इसके साथ ही वर्तमान में सर्वाधिक एन. क्यू.ए.एस प्रमाणीकरण में मध्यप्रदेश राज्य ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए भारत में 22वें स्थान से प्रवां स्थान प्राप्त किया है जो अभूतपूर्व है। तो वहीं प्रदेश की 20 स्वास्थ्य संस्थाओं ने राष्ट्रीय मुस्कान प्रमाण-पत्र प्राप्त कर मध्यप्रदेश को देश में सर्वाधिक मुस्कान प्रमाणित संस्थाओं वाले प्रदेश का रिकॉर्ड स्थापित किया। वहीं उज्जैन में शुरू हुआ ‘प्रसादम’ देश का पहला स्वच्छ स्ट्रीट फूड हब बनकर एक नई मिसाल प्रस्तुत करता है। इसी क्रम में देश में

पहली बार किसी शासकीय चिकित्सालय में ब्लड कैंसर के मरीजों के लिए कर-ट-सेल थेरेपी की सुविधा इंदौर के महाराजा यशवंतराव होल्कर चिकित्सा महाविद्यालय में उपलब्ध करवाई है। तो वहीं हृदय रोग की आधुनिक उपचार सेवा हेतु भोपाल के जय प्रकाश जिला चिकित्सालय में 30 बिस्तरीय कार्डियक कैथ लैब की स्थापना की जा रही है।

यह भी महत्वपूर्ण पहल है कि एम.आर.आई. सेवाओं को व्यवस्थित करते हुए प्रदेश के 5 संभागीय मुख्यालयों के जिला चिकित्सालयों (भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर एवं उज्जैन) में एम. आर. आई. मशीनों की स्थापना की रही है, जिसकी सेवाएँ आउटसोर्स प्रणाली के अन्तर्गत प्रदान की जाएंगी। राज्य में अंग दान एवं प्रत्यारोपण को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से माननीय मुख्यमंत्री जी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए बेन डेड अंगदाता को राजकीय सम्मान एवं गॉर्ड ऑफ ऑनर दिये जाने हेतु प्रक्रिया शुरू की है।

सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन के लिए भोपाल में इस वर्ष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं के लिए सिकल सेल एनीमिया की स्क्रिनिंग और प्रबंधन दिशा-निर्देश जारी किए गए। सिकल सेल एनीमिया के उपचार में नवाचार करते हुए मध्यप्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य होगा, जहाँ हाइड्रोक्सीरिया दवा को शीघ्र ही सिरप के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही मध्यप्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर सिकल सेल एनीमिया की स्क्रीनिंग में दूसरे स्थान पर है और इसी रोग से ग्रसित वयस्क मरीजों को गंभीर संक्रमणों से बचाने के लिए टीकाकरण की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।

गर्भवती महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता रखते हुए राज्य सरकार ने जननी शिशु सुरक्षा योजना के अंतर्गत उन जिलों में जहाँ गर्भवती महिलाओं के लिए सोनोग्राफी सुविधा उपलब्ध नहीं थी, अब निजी सोनोग्राफी सेंटरों के माध्यम से निःशुल्क सोनोवाफी प्रदान की है।

डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग ने तकनीक और नवाचार को अपनाते हुए प्रदेश को नई दिशा दी है। उनको दूरदर्शिता और प्रयासों का परिणाम है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं न केवल तकनीकी रूप से उअत हुई हैं, बल्कि हर नागरिक तक पहुंचने में भी सक्षम हो रही हैं। प्रधानमंत्री जी के विकसित भारत के लक्ष्य के साथ कदम से कदम मिलाते हुए, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी ने स्वास्थ्य क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए जो कार्य किए हैं, वे आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश को एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करेंगे।

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