Site icon अग्नि आलोक

कोरोना संकट में 37 फीसदी से अधिक लोगों को इस वजह से हुई पैसे की तंगी

Share

ई दिल्ली
भारत में कोरोना संकट की वजह से बहुत से लोगों की आमदनी घटी है। खास तौर पर कम वेतन पर काम करने वाले लोगों की कोरोना संक्रमित दौर में आय कम हुई है। आईएएनएस की एक रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है कि कोविड-19 की वजह से 37.6 फ़ीसदी लोगों की आमदनी घटी है। जॉब कर रहे लोगों के इस समूह ने कहा है कि वे कोरोनावायरस से बचाव के नियमों और सुरक्षा उपाय के साथ ही काम कर रहे हैं। पिछले हफ्ते किए गए इस सर्वे के दौरान देश भर के 6872 लोगों से संपर्क करने के बाद यह रिपोर्ट तैयार की गई है।

वेतन कटौती का असर
सर्वे में शामिल लोगों में से 21.1 फीसदी लोगों ने कहा कि उनका वेतन सामान्य दिनों की तरह ही है, लेकिन वे कामकाज में कोरोना बचाव के नियम और सुरक्षा उपाय का पालन कर रहे हैं। सर्वे में शामिल लोगों में से करीब 11 फ़ीसदी लोगों का काम पूरी तरह बंद है या फिर वह काम नहीं कर पा रहे हैं।

वर्क फ्रॉम होम में सैलरी कट
सर्वे में शामिल 5.6 फ़ीसदी लोगों ने कहा कि वे अब भी वेतन कटौती के साथ work-from-home कर रहे हैं और इस वजह से उनकी आमदनी घटी है। सर्वे में शामिल 4 फ़ीसदी लोगों ने कहा है कि वे अभी समान वेतन और समान आमदनी के साथ work-from-home मोड में काम कर रहे हैं।

दफ्तर जाने पर भी वेतन कटौती
कोरोना संकट के इस दौर में सर्वे में शामिल 3.7 फ़ीसदी लोगों ने स्वीकार किया कि वे कोरोना बचाव के नियमों और सुरक्षा उपाय का पालन कर रहे हैं, लेकिन उनके पास कोई आमदनी या वेतन नहीं है। सर्वे में शामिल सिर्फ करीब 3 फ़ीसदी लोगों ने कहा है कि वह work-from-home नहीं कर रहे हैं और पूरा वेतन पा रहे हैं। सर्वे में शामिल 1.6 फ़ीसदी लोगों ने कहा है कि वह घर से काम नहीं कर रहे हैं, लेकिन फिर भी उनका वेतन काटा जा रहा है।

इसमें कोई शक नहीं कि हर कामकाजी व्यक्ति गरीब हुआ है । और जो गरीब था वो भिखारी के स्तर के आसपास है और जो भिखारी थे उनको भोजन आदि की कोई समस्या नहीं हुई केवल भीख के पैसे की आमदनी लगभग शून्य हो गयी । और इन सबकी गरीबी जितनी हुई उतनी आमदनी दवा व्यापार, अस्पताल, डॉक्टर्स, जमाखोर, नकली दवा विक्रेता और अन्य किस्म के लोग जिन्होंने आपदा में अवसर ढूंढे वो सब उतने ही अमीर हो गए । अब देखना ये है कि इस देश की सरकार ऐसे कितने लोगों और संस्थाओं से ये पैसा निकलवा सकती है जिन्होंने आपदा में गलत अवसर से पैसा बनाया । यदि ऐसे लोग या संस्थाएं न पकड़ी जाएं तो जनता ये मान ले कि इसे सरकारों की सहमति थी और 2024 में इसे याद रखे ।

Exit mobile version