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देश के अधिकांश बच्चों का दहशत में होना !

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आज कुछ समाचार पत्रों में एक बहुत ही भयावह समाचार प्रकाशित हुआ है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान,नई दिल्ली के डॉक्टरों की एक टीम ने भयावहतम् कोरोना वायरस के संक्रमण से फैली कोविड महामारी से उत्पन्न भय,मानसिक अवसाद,बीमारी का डर,अपनों से बिछुड़ने का डर,अकेलापन का घर,अपने मम्मी-पापा के बेरोजगार हो जाने का खतरा आदि गंभीर समस्याओं पर भारत सहित दुनिया के अन्य 10 देशों के 22996 बच्चों पर पड़नेवाले मानसिक तनाव पर एक शोध किया है । इस शोध के अनुसार कोरोना संबन्धित समस्या से 22.5 प्रतिशत बच्चे कोरोना रोग की भयावहता से डरे हुए मिले, 30.8 प्रतिशत बच्चों में एकाग्रचित्तता की समस्या से गंभीर रूप से पीड़ित पाया गया,34.5 प्रतिशत बच्चे तनावग्रस्त मिले,35.2 प्रतिशत बच्चों को अनिद्रा जैसे रोग से ग्रसित पाया गया,42.3 प्रतिशत बच्चे अपने चिड़चिड़ापन से परेशान थे,सबसे अधिक 79.4 प्रतिशत बच्चे अपने मम्मी-पापा या परिजनों से दूर रहने की समस्या, जिसे अकेलापन या एकांतवास कहते हैं,से बहुत भयभीत थे। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान,नई दिल्ली के बालरोग विशेषज्ञ के अनुसार उक्त लक्षण से ग्रसित बच्चों को उनके हाल पर ज्यादे दिन तक नहीं छोड़ा जा सकता,ऐसे लक्षण दिखने पर इन बच्चों को जितनी जल्दी संभव हो,उतनी जल्दी किसी अच्छे मनोचिकित्सक को दिखाया जाना उनके वर्तमान और भविष्य के लिए तथा इस इस देश के भावी नागरिकों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही जरूरी है। इसके साथ ही इस देश की स्वास्थ्य समितियों और अधिकारियों को इस देश के इतनी बड़ी संख्या में भयग्रस्त या मानसिक तनाव से त्रस्त बच्चों के अच्छे मानसिक स्वास्थ्य के लिए तुरंत आवश्यक कदम उठाने की जरूरत है।

-निर्मल कुमार शर्मा,

‘गौरैया एवंम् पर्यावरण संरक्षण तथा पत्र-पत्रिकाओं में वैज्ञानिक, राजनैतिक, सामाजिक,आर्थिक,अंधविश्वास व पाखंड के खिलाफ सशक्त,निष्पृह, बेखौफ व स्वतंत्र लेखन ‘,प्रताप विहार,गाजियाबाद, उप्र,पिनकोड नंबर-201009,संपर्क -9910629632

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