भोपाल। बीते विधानसभा चुनाव में मिली हार से सबक लेते हुए मप्र भाजपा अभी से अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी में लग गई है। इसके लिए भाजपा ऐसी रणनीति बना रही है, जिससे कि 2023 तक प्रदेश से कांग्रेस का पूरी तरह से सफाया किया जा सके। यही वजह है कि ऐसी रणनीति को अमली जामा पहनाने के लिए विधायकों का दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर पचमढ़ी में 13 व 14 फरवरी को आयोजित किया जा रहा है। यही नहीं पार्टी में इसके लिए कई तरह के नए प्रयोग भी किए जा रहे हैं। इसके तहत ही सोशल मीडिया के महत्व को देखते हुए उसके लिए रणनीति और गाइड लाइन के साथ पार्टी ने दो से तीन अनुभवी नेताओं का संपादन मंडल बनाने का निर्णय लिया गया है।
साथ ही अब जिला अध्यक्षों की अनुमति और उन्हें भरोसे में लिए बिना अब नेता हो या कार्यकर्ता होर्डिंग पोस्टर और दूसरे फोन पर विज्ञापन जारी नहीं करवा पाएंगे। इसके अलावा अब संगठन पूरी तरह से सत्ता से जुड़े निर्वाचित जनप्रतिनिधियों जिसमें विधायक और मंत्रियों को संगठन को मजबूत और बेहतर तालमेल बनाने पर जोर दे रही है। गौरतलब है कि पचमढ़ी में शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री रहते पूर्व में अपने मंत्रियों का आईक्यू टेस्ट लेने का भी प्रयोग किया जा चुका है। उसमें तत्कालीन उपराष्ट्रपति और मध्यप्रदेश से जुड़े वेंकैया नायडू जैसे दिग्गज नेता शामिल हुए थे। इसके साथ ही अब भाजपा बीते आम चुनाव में मिली हार के कारणों में सामने आए अनुसूचित जाति जनजाति वोट बैंक पर अपनी कमजोर होती पकड़ को और मजबूती देने पर भी काम करने का फैसला कर चुकी है। भाजपा को बीते चुनाव में जयस की वजह से हुए नुकसान की भरपाई के लिए भी योजना तैयार की जा रही है। नगरीय निकाय चुनाव फिलहाल भाजपा के लिए एक पड़ाव रहेगा लेकिन उसका बड़ा लक्ष्य आगामी विधानसभा चुनाव ही माना जा रहा है। इसके साथ ही हाल ही में इंदौर पदाधिकारियों की बैठक में शीर्ष नेतृत्व ने यह बता दिया कि यहां बैठे लोग ही भविष्य की भाजपा का चेहरा होंगे यानी जवाबदेही और जिम्मेदारी का अहसास गाइडलाइन से अवगत कराते हुए करा दिया गया इसलिए सभी को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने के लिए मानस बना लेना होगा। इस प्रदेश पर पार्टी अलाकमान की भी खास नजर है, जिसकी वजह से ही केन्द्र द्वारा अपने आधा दर्जन पदाधिकारियों को भी अब तक तैनात किया जा चुका है। दरअसल इस पूरी कवायद के पीछे एक बड़ी वजह विपक्ष की भूमिका निभाने वाले भाजपा के टिकट पर श्रीमंत समर्थकों के निर्वाचित विधायक भले ही अब भाजपाई हो चुके हैं, लेकिन उनके मूल भाजपाई नेताओं के साथ समन्वय की मजबूती जरूरी है। भाजपा संगठन इस बार किसी भी तरह की कोई कमी नहीं रखना चाहती है। इसके लिए अभी से कार्यकर्ताओं से लेकर नेताओं तक को पार्टी द्वारा तैयार की गई पीढ़ी परिवर्तन की नीति के लिए भी मानसिक रुप से तैयार करने के रुप में देखा जा रहा है। पार्टी यह प्रयोग निकाय चुनाव में करने जा रही है, जिसके परिणामों के आधार पर ही विधानसभा चुनाव में लागू किया जाएगा। मध्यप्रदेश में पीढ़ी परिवर्तन के दौर में बदलती भाजपा का बड़ा लक्ष्य मिशन 2023 की और पार्टी आगे बढ़ रही है विधानसभा चुनाव फिलहाल दूर लेकिन 15 महीने के सियासी वनवास के बाद सत्ता में वापसी करने वाली भाजपा ने संगठन को मजबूत और परिणाम मूलक बनाने के लिए कवायद की जा रही है। इससे यह तो तय है कि इस बार भाजपा मध्यप्रदेश में बहुत पहले से ही विधानसभा के आगामी चुनाव को लेकर जाना चाहती है
राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष के दिशा निर्देश के बाद शिव विष्णु और सुहाष की भाजपा ने भविष्य की भाजपा के लिए स्क्रिप्ट लिखी है। प्रस्तावित प्रशिक्षण शिविर हो या फिर एससी, एसटी के लिए होने वाले चिंतन मंथन शिविर इसी रणनीति का हिस्सा हैं। तो अब सरकार में लौटने के साथ सबका साथ सबका विकास के तहत कार्यकर्ताओं को काम पर लगाया जाना जरूरी है भाजपा में पीढ़ी परिवर्तन कोई डेढ़ दशक के बाद हो क्या रहा है ऐसे में महत्वकांक्षी नेता हो या कार्यकर्ता उनकी पार्टी से अपेक्षाएं या फिर सीमित क्षेत्र में सिंधिया फैक्टर पार्टी से कमजोरी नहीं बल्कि अपनी ताकत में तब्दील करना चाहती है सिंधिया और उनके समर्थक सभी को भरोसे में लेकर भाजपा अगले चुनाव का ब्लूप्रिंट तैयार कर रही है। मध्य प्रदेश भाजपा का नेतृत्व पहले ही इस रणनीति पर एक्सरसाइज कर चुका है और प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव की मौजूदगी में इस लाइन को आगे बढ़ाने पर मुहर लगाई जा चुकी है। इसके साथ ही सत्ता और संगठन के शीर्ष नेतृत्व को इस बार कमजोर कड़ियों को चिन्हित कर विष्णु दत्त और सुहाष भगत की भाजपा आगे बढ़ रही है मध्य प्रदेश के जिन अंचलों में पिछले विधानसभा चुनाव में उसकी हार हुई उसके कारणों की तह तक जाते हुए पार्टी ने अब अनुसूचित जाति जनजाति का भरोसा जीतना अपनी पहली प्राथमिकता बना लिया है इसके लिए पार्टी के पदाधिकारी मंत्री विधायक सांसद और दूसरे जिम्मेदार नेता वर्ग विशेष पर केंद्रित चिंतन मंथन करने जा रहे हैं भाजपा ने इस वर्ग की छोटी जाति और अलग-थलग पड़े समुदाय को एकजुट कर पार्टी से जोड़ने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। एक ओर शिवराज सरकार गलती सुधार के साथ सवर्ण आयोग के गठन के साथ आरक्षण से प्रभावित मतदाताओं का भरोसा नए सिरे से जीतना चाहती है तो दूसरी ओर धर्मांतरण के बढ़ते मामलों को ध्यान में रखते हुए उसने आदिवासी जाति और आरक्षित विधानसभा सीटों पर भरोसा जीतने की अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान नगरीय निकाय चुनाव को ध्यान में रखते हुए इन दिनों प्रदेश के दौरे के दौरान यदि एससी, एसटी और गरीब के घर खाना खाने जा रहे हैं तो अब संगठन से जुड़े दूसरे नेता और पदाधिकारी भी लाइन को आगे बढ़ाने बढ़ते नजर आएंगे। भाजपा का जो वोट बैंक पिछले चुनाव में नाराज हो गया था ऐसे रूठे को मनाने के लिए सत्ता और संगठन में समन्वय बनाकर पार्टी एक साथ कई मोर्चों पर काम करती हुई नजर आने वाली है। पार्टी ने संघ की उस लाइन को आगे बढ़ाने का मानस बना लिया है।
मप्र भाजपा अभी से अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी में….2023 तक कांग्रेस के सफाये की तैयारी

