प्रो.ऋषभदेव शर्मा: अनामिका अनु को जितना मैं उनकी पिछली किताबों और इस पुस्तक ‘मैं दीवारों पर खिड़कियाँ लिख रही हूँ’ के माध्यम से जान सका हूँ, उससे यह बात स्पष्ट होती है कि वे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की घोर पैरोकार हैं।...
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*‘चुनाव के छल -प्रपंच-यह किताब बहुत सारी दुविधाओं को सुलझाने का माध्यम*
(नवारुण प्रकाशन से हाल ही में प्रकाशित वरिष्ठ पत्रकार हरजिंदर की किताब ‘चुनाव के छल -प्रपंच- मतदाताओं की सोच बदलने का कारोबार’ से लिया गया यह हिस्सा किताब के पांचवें अध्याय ‘फ़ेक न्यूज़ की राजनीति’ से लिया गया है।...










