ज्ञान का ढलता सूरज और कंगना का ज्ञान लोग बड़े आशावादी हैं, कहते हैं कि दिन बदलने में दिन ही कितने लगते हैं! कल तक लगता था कि उनके कहने भर से ही सूरज निकल रहा है, लेकिन अब जब युवाओं ने अंगड़ाई ली है, तो लगने...
Category - साहित्य
नदियाँ गुनगुना रही हैं*
4 कविताएं – किशोरियों की कलम से नीमा गड़िया कक्षा – 12वीं गाँव – पोथिंग, उत्तराखंड नदियों का बहता पानी गुनगुना रहा अपनी कहानी, हिमालय की गोद से निकली, सागर तक पहुँची रवानी, रास्तों की कठिनाइयों को पार करती हुई...














