अग्नि आलोक
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Category - साहित्य

*निश्चल संवेदना*

बदलते वक्त के साथ  बहुत कुछ बदलता देखा मित्र को शत्रु बनते  शत्रु को मित्र बनते देखा। जानता भी नहीं था जिनको  उनको अपना बनते देखा और जानता था जिनको  उनको पराया होते देखा। भागता रहा हमेशा ही ...

*रिद्धिमा*

बरसात की पहली तेज़ बारिश थी। सड़क पर पानी भर चुका था। उसी पानी में भीगती हुई एक नवविवाहित लड़की अपने पति के साथ एक छोटे-से मकान के सामने खड़ी थी। “यही है?” लड़की ने भीगे हुए दुपट्टे को संभालते हुए पूछा।...

*लघुकथा: कर्म, घमंड और इशारा*

   विवेक मेहता वे मंदिर में भगवान राम की मूर्ति के सामने नतमस्तक हुए और बोले, “तेरी माया तो अपरंपार है प्रभु! दिखा दिया न तूने, जो जैसा करता है, वैसा भरता है। पहले उन्होंने तुम्हें छोटा बच्चा बताकर और खुद को महान व बड़ा...

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