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*कल्पना के बहुरूप

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शशिकांत गुप्ते

मुझे पुरानी फिल्मों को देखने का शौक रहा है। बचपन में जो फिल्में देखने से वंचित रह गया वे फिल्में अब इंटरनेट के सहयोग से और गूगल बाबा की मदद से देख पाता हूँ।
कल ही सन 1963 में प्रदर्शित एक फ़िल्म देखी ब्लफ मास्टर (Bluff master)
इस फ़िल्म की शुरुआत में एक पर्दे पर एक संदेश पढ़ने को मिला।
कभी कभी आप सारी दुनिया को थोड़ी देर के लिए बेवकूफ़ बना सकते हो। कभी कभी आप कुछ लोगों को हमेशा के लिए बेवकूफ़ बना सकते हो,लेकिन आप सभी को हमेशा बेवकूफ नहीं बना सकते हो
ब्लफ मास्टर का मतलब होता है। चालक,चालबाज, झांसा देने वाला,और धोखेबाज आदि।
ब्लफ मास्टर नाम और भी फ़िल्म बनी।
मै तो सन 1963 में प्रदर्शित फ़िल्म ब्लफ मास्टर की चर्चा कर रहा हूँ।
इस फ़िल्म में अभिनेता शम्मीकपूर ने स्वयं ही स्वयं के पिता का अभिनय करने के लिए,बाकायदा लंबी दाढ़ी,विशिष्ठ प्रकार की टोपी और वृद्ध दिखने के लिए वैसे ही परिधान धारण कर रखें हैं। सम्भवतः अभिनेत्री सायराबानु बहुरूपिये अभिनेता को पहचान लेती है। अभिनेत्रि तानपुरा बजाने के अभिनय करते हुए यह गीत गाती है।
इस गीत को लिखा है, गीतकार राजेद्रकृष्णजी ने।
इस गीत कुछ पंक्तियां प्रस्तुत है।
बेदर्दी दगा बाज जा
निस दिन तेरह रूप निराले
तन के उजले मन के काले
भेस बदलकर डोरे डाले जा रे जा
बेदर्दी दगाबाज़ जा
तू नाहीं बलामा मोरा
जा जा जारे रे जा बना ना बतिया आ आ आ आ
बेदर्दी दगाबाज़ जा जा रे जा

शम्मीकपूर ब्लफ मास्टर जैसे ही विचित्र नाम की फिल्मों में अभिनय किया है। जंगली,जानवर,प्रिंस
राजकुमार,शम्मीकपूर ने स्वयं शादी शुदा होकर ब्रह्मचारी नामक फ़िल्म में भी अभिनय किया है। शम्मीकपूर अभिनीत एक फ़िल्म है पगला कहीं का इस फ़िल्म में एक ऊटपटांग गीत है। इस गीत को लिखा है,गीतकार हसरत जयपुरीजी इस गीत को गाया है, गायक प्रबोध चंद्र डेजी (मन्ना डे) ने।
गीत के बोल है।
मेरी भैंस को डंडा क्यों मारा।
शम्मीकपूर अभिनीत फिल्मों के नाम जानने के बाद यह कहा जा सकता है। तुमसा नहीं देखा
फिल्में लोगों के मनोरंजन की निर्मित की जाती है।
फिल्मों में अभिनय करने वाले कलाकार चाहे वह अभिनेता हो,अभिनेत्री हो हास्य अभिनेता हो या खलनायक हो सभी को फ़िल्म में दिए गए किरदार के अनुरूप वेशभूषा बनानी पड़ती है। इसे मेकअप करना कहतें है।
आश्चर्य तब होता है,जब व्यवहारिक जीवन में कुछ लोग अनावश्यक अभिनय करने की कोशिश करतें हैं। ऐसे लोगों का अभिनय बनावटी लगता है।
वैसे हमारे देश में बहुरूपिया बनने की प्रथा विद्यामान है। बहुरूपिये विविध रुप धारण कर भीक्षा मांगते है। सामान्य भाषा में ये लोग भिखारी ही कहलाते हैं।
इनदिनों यह स्पष्टीकरण देना अनिवार्य हो गया है। यह लेख पूर्णतया काल्पनिक है।जिस तरह फिल्मों की कहानी काल्पनिक होती है उसी तरह है।

मुझे पुरानी फिल्मों को देखने का शौक रहा है। बचपन में जो फिल्में देखने से वंचित रह गया वे फिल्में अब इंटरनेट के सहयोग से और गूगल बाबा की मदद से देख पाता हूँ।
कल ही सन 1963 में प्रदर्शित एक फ़िल्म देखी ब्लफ मास्टर (Bluff master)
इस फ़िल्म की शुरुआत में एक पर्दे पर एक संदेश पढ़ने को मिला।
कभी कभी आप सारी दुनिया को थोड़ी देर के लिए बेवकूफ़ बना सकते हो। कभी कभी आप कुछ लोगों को हमेशा के लिए बेवकूफ़ बना सकते हो,लेकिन आप सभी को हमेशा बेवकूफ नहीं बना सकते हो
ब्लफ मास्टर का मतलब होता है। चालक,चालबाज, झांसा देने वाला,और धोखेबाज आदि।
ब्लफ मास्टर नाम और भी फ़िल्म बनी।
मै तो सन 1963 में प्रदर्शित फ़िल्म ब्लफ मास्टर की चर्चा कर रहा हूँ।
इस फ़िल्म में अभिनेता शम्मीकपूर ने स्वयं ही स्वयं के पिता का अभिनय करने के लिए,बाकायदा लंबी दाढ़ी,विशिष्ठ प्रकार की टोपी और वृद्ध दिखने के लिए वैसे ही परिधान धारण कर रखें हैं। सम्भवतः अभिनेत्री सायराबानु बहुरूपिये अभिनेता को पहचान लेती है। अभिनेत्रि तानपुरा बजाने के अभिनय करते हुए यह गीत गाती है।
इस गीत को लिखा है, गीतकार राजेद्रकृष्णजी ने।
इस गीत कुछ पंक्तियां प्रस्तुत है।
बेदर्दी दगा बाज जा
निस दिन तेरह रूप निराले
तन के उजले मन के काले
भेस बदलकर डोरे डाले जा रे जा
बेदर्दी दगाबाज़ जा
तू नाहीं बलामा मोरा
जा जा जारे रे जा बना ना बतिया आ आ आ आ
बेदर्दी दगाबाज़ जा जा रे जा

शम्मीकपूर ब्लफ मास्टर जैसे ही विचित्र नाम की फिल्मों में अभिनय किया है। जंगली,जानवर,प्रिंस
राजकुमार,शम्मीकपूर ने स्वयं शादी शुदा होकर ब्रह्मचारी नामक फ़िल्म में भी अभिनय किया है। शम्मीकपूर अभिनीत एक फ़िल्म है पगला कहीं का इस फ़िल्म में एक ऊटपटांग गीत है। इस गीत को लिखा है,गीतकार हसरत जयपुरीजी इस गीत को गाया है, गायक प्रबोध चंद्र डेजी (मन्ना डे) ने।
गीत के बोल है।
मेरी भैंस को डंडा क्यों मारा।
शम्मीकपूर अभिनीत फिल्मों के नाम जानने के बाद यह कहा जा सकता है। तुमसा नहीं देखा
फिल्में लोगों के मनोरंजन की निर्मित की जाती है।
फिल्मों में अभिनय करने वाले कलाकार चाहे वह अभिनेता हो,अभिनेत्री हो हास्य अभिनेता हो या खलनायक हो सभी को फ़िल्म में दिए गए किरदार के अनुरूप वेशभूषा बनानी पड़ती है। इसे मेकअप करना कहतें है।
आश्चर्य तब होता है,जब व्यवहारिक जीवन में कुछ लोग अनावश्यक अभिनय करने की कोशिश करतें हैं। ऐसे लोगों का अभिनय बनावटी लगता है।
वैसे हमारे देश में बहुरूपिया बनने की प्रथा विद्यामान है। बहुरूपिये विविध रुप धारण कर भीक्षा मांगते है। सामान्य भाषा में ये लोग भिखारी ही कहलाते हैं।
इनदिनों यह स्पष्टीकरण देना अनिवार्य हो गया है। यह लेख पूर्णतया काल्पनिक है।जिस तरह फिल्मों की कहानी काल्पनिक होती है उसी तरह है।

शशिकांत गुप्ते इंदौर

इंदौर

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