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मेरा गौरव तिरंगा है राम मंदिर नही

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मैं
मेरे हिसाब का राष्ट्र्वादी हूँ
मेरे हिसाब का धार्मिक

मैं तुम्हारे हिसाब का हिन्दू नही हूं
मुझे अपने हिसाब में मत गिनिए
न समझाईये अपने हिसाब से गौरव

मैं अभिवादन के वक्त राम-राम बोलता हूं
राह जाते गुरुद्वारा में लंगर खाता हूं
सत श्री अकाल कहता हूं
टोपी दाढ़ी वाले से नफरत नही करता
वह दीवाली की बधाई देता है
मैं ईद मुबारक कहता हूं

विविधता में अनेकता के तत्व
जो संविधान में लिखे हैं
वे मेरे श्लोक हैं
वे मेरी आरती हैं
उनका ही स्मरण है मुझे

मैं तिरंगा उठाता हूँ
तो याद रखता हूँ
यह मुल्क का झंडा है
जिसमे एक रंग नही
रंगों की विविधता है
मुझे सनातन से चिढ़ नही
मेरे पूर्वज और मैं
स्नातन का हिस्सा हैं

तुम जब कहते हो
अपने हिसाब लगाकर
कि सिर्फ सनातन,
तब मुझे तिरंगे की तौहीन करते लगते हो तुम
तब मुझे
सनातन के सबसे बड़े शत्रु तुम्हीं लगते हो
तब तुम
सनातन को चिढ़ बना देते हो

सुनो
सनातन गौरव है अगर तुम्हारा
तो चिढ़ मत बनाओ उसे
धर्म धर्म है
नेताओं के हाथ मत सौंपो

तुम्हारा गौरव राम हैं
मेरा भी हैं
मेरा पहला गौरव लेकिन तिरंगा है

मैं तुम्हारे हिसाब में शामिल नही
मैं मेरे हिसाब का राष्ट्रवादी हूं
मुझे ख़ारिज करने के तर्क लाओ पहले

वीरेंदर भाटिया

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