आरती शर्मा
दिल्ली में रह रहे हमारे चेतना विकास मिशन के डायरेक्टर डॉ. विकास मानवश्री मेरठ में रह चुके हैं. दोनों शहरों के बीच 70 किमी का फासला है. लेकिन हैरानी हुई यह जानकर की पैरासाइकालोजी के ये सम्राट अपने घर से बेखबर थे.
_मानवश्री से मेरा अभौतिक- अपार्थिक-अलौकिक संगम होता रहता है. मेरठ के भूत बंगले से संबंधित मेरी जिज्ञासा पर वे चौंके. उसके बाद जो हक़ीक़त सर्वें में सामनें आई वह आप भी जानें :_
मेरठ का कैंट एरिया. यहां माल रोड से तकरीबन आधा किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस जगह शाम के सन्नाटे की तो बात छोड़िए, दिन में भी कोई जाने की यहां हिम्मत नहीं जुटा पाता।
यदि हिम्मत करके कोई यहां जाता भी है तो इस बंगले के पास पहुंचकर उसके पसीने छूट जाते हैं।
सुनने और पढ़ने में भले ही आश्चर्य लगे, लेकिन यह हकीकत है कि यह सैकड़ों वर्ष पुराना बंगला है, जो अब एक खंडहर में तब्दील हो चुका है। यहां कई बार कुछ पैरानाॅर्मल गतिविधियों के होने की बात भी सामने आई है।
शाम का सन्नाटा तो दूर, दिन में भी इस भूत बंगले को देखकर डर लगता है। यह बंगला देश के दस भूत बंगलों में शुमार है। मेरठ प्रशासन ने इस बंगले के अंदर जाने पर रोक लगाई हुई है। लेकिन प्रशासन से अनुमति लेकर इस स्थान को देखा जा सकता है।
मेरठ छावनी से माल रोड पर करीब कुछ दूरी पर मौजूद एक खंडहर, जिसे अब लोग भूत बंगले के नाम से ज्यादा जानते हैं।
आजादी से पहले तक इस बंगले में सब एरिया का मुख्यालय था। लेकिन उसके बाद सब एरिया मुख्यालय सरधना रोड पर चला गया और धीरे-धीरे ये बंगला खंडहर में तब्दील होता गया।
70 साल बाद आज यह बंगला ‘भूत बंगला’ के नाम से ही पहचाना जाने लगा है।
इस जगह के आसपास सन्नाटा पसरा रहता है। साथ ही बंगले के अंदर भी मकड़ी के जाले, चमगादड़ और कबूतर ही दिखाई पड़ते हैं। बंगले के चारों तरफ लंबे-लंबे वृक्ष हैं तो झाड़ियां भी कम नहीं है। दीवारें टूटी हालत में है, लेकिन फर्श पक्का है।
बताया जाता है कि कई साल पहले यहां कुछ युवा घूमने के लिए आए थे, जिन्हें यहां कुछ असाधारण गतिविधियों का अहसास हुआ, जिसके बाद से प्रशासन ने इस जगह लोगों के जाने पर रोक लगा दी। साथ ही बंगले के एक तरफ के गेट को भी बंद कर दिया गया।
बंगले की भीतर अलग-अलग कमरों में ईंटें बिखरी हुई पड़ी हैं, तो सीढ़ियों की हालत भी ऐसी है जिन्हें देखकर चीख निकल जाए। कई सीढ़ियों पर चढ़ते वक्त ईंटे खिसक जाती हैं।
बंगले के भीतर कबूतरों के उड़ने की आवाज भी डरावनी लगती है, वहीं चमगादड़ों के झुंड दिन में भी डराते नजर आते हैं। सांप के बिलों के बाहर मिटटी के ढेर से भी डर लगता है।
आजादी के समय 1947 तक इस बंगले में सब एरिया मुख्यालय था, लेकिन उसके बाद सब एरिया मुख्यालय सरधना रोड पर चला गया। जिसके बाद से यह बंगला एक खंडर में तब्दील हो गया।
_आज इसे भूत बंगले के नाम से जाना जाता है। देश के 10 हॉन्टेड इमारतों में मेरठ का यह भूत बंगला भी शामिल है।_
[चेतना विकास मिशन)

