अग्नि आलोक

नमन नीच की अति दुखदाई

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-सुसंस्कृति परिहार

यूं तो हमारे देश में नमन करना भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है झुककर प्रणाम निवेदित करना अमूमन सभी जगह होता है। सज़दा में भी यही भाव दृष्टि गोचर होता है।पता नहीं क्यों हमारे पूर्वजों ने यह क्यों कह दिया कि नीच नमन की अति दुखदाई।उनकी नज़र में नीच कौन था दलित बंधु या जिनके कर्म नीच हैं।

जब हम अपने इतिहास को टटोलते हैं तो कोर्निश बजाना,झुक झुक सलाम करना तो होता रहा है किंतु  झुककर नमन करने के बाद बापू पर गोलियां दागने वाला हत्यारा पहला व्यक्ति था।  साधारण तौर पर महात्मा की इस तरह हत्या करने वाला, कोई नीची सोच वाला नीच ही होगा।इसी भांति देश के युवा प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के पहले उन्हें भी नमन किया गया। इस तरह के कृत्यों से आज नमन करने को संदिग्ध माना जाने लगा है।वह दुखदाई भी हो सकती है।

देश की ताज़ा परिस्थितियों में देखा जाए तो हमारे साहिब जी ने संसद की सीढ़ियां चढ़ते हुए उसे जिस तरह नमन किया वह इसी कड़ी में आता है।यह नमन ही है जिसमें निरंतर गैर असंसदीय  आचरण संसद में देखने मिल रहा है।ये कैसी मृत संसद है जिसमें सांसदों की बात सुनी नहीं जाती और ना ही देशवासियों को सुनने दी जाती हैं।इस नीच नमन का ही परिणाम है कि सदन में सत्ता समर्थक सांसद हंगामा खड़ा कर विपक्ष को बोलने नहीं देते। लोकतंत्र की हत्या सरासर हो रही है।

साहिब के कदम जब संसद भवन में पड़ते हैं तो वहां रखे संविधान को वे इस तरह झुककर नमन करते हैं जो दिखावा ही होता है वे संविधान की धज्जियां ना केवल वे, बल्कि उनके मंत्री, स्पीकर, उपसभापति और सांसद खुले आम उड़ाते हैं।कहना ना होगा यह संविधान के उस नमन का ही परिणाम है।

कहते हैं जहां जहां पांव पड़ें संतन के तंह तंह बंटाधार।ऐसे महामना ने अपने गुरु रथयात्रा के हीरो लालकृष्ण अडवाणी के चरण छुए और वे भी राजनीति से मृत पाय हो गए। जिस संस्थान पर भृकुटी टेढ़ी की वह स्वाहा हो गया निजीकरण की भेंट चढ़ गया। रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने की बात ने उन्हें फर्श से अर्श पर पहुंचाया उस रेल मंत्रालय का कीमा बना दिया। दलितों के पैरों का पूजन किया गया वे दलित आज आरक्षण के रक्षण की चिंता में हैं।

लगता है ये कहावत गहरे अनुभवों से तैयार की गई है। आश्चर्यजनक तो यह कि एक कांग्रेस के नेता ने जब ऐसे लोगों को नीच शब्द से नवाजा था तब सबको बुरा लगा था उन्होंने भी इसे अपने ढंग से समझा दिया था लेकिन वह बात आज इस रुप में स्वयं सिद्ध हो रही है तब क्या कीजियेगा। वस्तुत:नीच की नमन नीची जाति से कतई नहीं है वरन् बुरी सोच के साथ सब मटियामेट करने वाले है।ऐसे लोगों की पहचान आसान है जब जहां ज्यादा दिखावे के साथ नमन या प्रेम दर्शाया जाए तो वह खतरनाक ही होता है।

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