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नर्मदा बचाओ आंदोलन

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किसान नेता राकेश टिकैत पर ‘स्याही’ को हथियार बनाकर हमला करने वालों का धिक्कार!

कर्नाटक जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश राज्य भी अब बन गये हैं हिंसा के रण क्षेत्र!

हमले से चाहते हैं विभाजन और सही समस्याओं का दफन! जरूरी है कड़ा जन आंदोलन!

नर्मदा बचाओ आंदोलन किसान नेता राकेश टिकैत पर कर्नाटक में हुए हमले का निषेध करता है। राकेश टिकैत, जिन्होंने संयुक्त किसान मोर्चा के सबसे व्यापक समन्वय को अपनाकर, किसान आंदोलन को एक महत्वपूर्ण योगदान दिया, उन्हें हमले का लक्ष्य बनाकर क्यों घटी यह हकीकत?

                   अब जिन्हें हमले के लिए गिरफ्तार किया गया है, वह पूर्ण जेल भुगता हुआ अपराधी है| यह अपराधी भाजपा के मुख्यमंत्री और नेताओं के साथ जुड़ा हुआ साबित हो चुका है| लेकिन कर्नाटक जैसे कुछ राज्यों में जहाँ धर्मांध हिंसा जारी है, वही किसान आंदोलन को भी बदनाम करने की कोशिश करने वाले कई लोग, समुदाय और दल भी है| उन्होंने ही अलग-अलग प्रकार की हिंसा को अपनाकर जिस प्रकार से सामाजिक कार्यकर्ता, जनआंदोलनों को लक्ष्य बनाया है, उसमें से एक प्रकार है, राकेश टिकैत जी पर हुआ हमला| एक अपराधी, भरत शेट्टी को गिरफ्तार किया है लेकिन धारा 307 के तहत सजा और अन्य अपराधियों की जाँच भी जरूरी है!

                  पत्रकार परिषद में तद्दन अहिंसक कार्य में लगे हुए टिकैत जी पर माइक और स्याही फेंककर हमला करना, निश्चित ही हिम्मत नहीं, कायरता का ही प्रमाण है| यह भी की किसानों के नेताओं को ही नहीं बल्कि हम किसान याने खेती से जुड़े हुए खेत मजदूर, पशुपालक, वनोपज पर जीने वाले आदिवासी तथा मछुआरे; प्रकृति पर जीने वाले सभी समुदायों के साथ इस प्रकार का दुर्व्यवहार, निश्चित ही अन्नदाता और मेहनतकशों की अवमानना है| देश को विभिन्न आधार पर विभाजित करने की साजिश में ही शामिल है, इस प्रकार की हिंसा भी| वे डर रहे हैं कि हम किसान-मजदूर, फिर से एक बड़ा आंदोलन खड़ा करके चुनौती देंगे, वह भी 2024 के चुनाव के पहले|

                         जैसे किसानों पर, वैसे ही आदिवासियों पर भी हमले हो ही रहे हैं| मध्यप्रदेश में एक और ₹30 करोड़ रु. तक खर्च करके बिरसा मुंडा की जयंती और आदिवासियों को जुटाकर कई प्रतीकात्मक कार्यक्रम होते हैं तो दूसरी और उनकी हत्या, उनका विस्थापन और पलायन जारी है|   

                     किसानों के साथ भी घोषणाओं के बावजूद धोखाधड़ी हुई है| MSP कानून आज तक लागू नहीं, तो फिर टिकैत जी जैसे प्रभावी रहे एक नहीं, कई नेताओं पर हमला, लखीमपुर खीरी जैसी बेरहम हत्या आदि के द्वारा केंद्र और उनसे जुड़ी राज्यों में ऐसे हमलों के द्वारा ही डराना, धमकाना तथा किसानों की अवमानना करना जारी है| अहम मुद्दों से, जैसे बेरोजगारी, गिरती अर्थव्यवस्था, जल संकट आदि से जनता की नजर हटाने की कोशिश भी जारी है| जाति, धर्म के नाम पर विभाजित करना ही कुछ शासकों की प्राथमिकता बनी है| विकास के नाम पर नदियों, जंगल, भूमि को हड़पना, बरबाद करना भी हो रहा है जो आम लोगों को संघर्ष करने के लिए मजबूर कर रहा है|

           टिकैत और संयुक्त किसान मोर्चा के सभी संगठन तथा नेताओं की एकजुटता से अब एक सशक्त आंदोलन, देशभर के सभी मेहनतकश खड़ा करें और हिंसा के सामने अहिंसा और सत्याग्रह की ताकत दिखाकर परिवर्तन लाये, यही हम चाहते हैं|

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