शेल कंपनियों, दो परोक्ष निवेशकों और भारतीय बाजार नियामक संस्था भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा कथित रूप से आंख मूंद लेने की बात सामने आने के बाद अडाणी समूह पिछले सप्ताह एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया. इस पर जैसे ही अडाणी समूह ने अपना बचाव करने की कोशिश की तो उसके द्वारा अधिग्रहण किए गए मीडिया समूह एनडीटीवी ने भी बचाव करने की कोशिश की.
ओसीसीआरपी की ओर से प्राप्त एवं द गार्डियन और फाइनेंशियल टाइम्स के साथ साझा की गई जानकारी में 2013 और 2017 के बीच चार अडाणी कंपनियों के द्वारा स्टॉक हेरफेर की ओर इशारा किया गया था, जो इस साल की शुरुआत में जारी विवादास्पद हिंडनबर्ग रिपोर्ट की ओर से लगाए गए आरोपों को दोहराता है.
इसके बाद राजनीतिक हलकों में इसे लेकर वाद-विवाद शुरू हो गया. भाजपा ने कहा कि भारत का विकास कई लोगों के लिए ‘आंखों का कांटा’ है, वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 31 अगस्त को विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की मुंबई बैठक से इतर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने कांग्रेस की मांग को दोहराते हुए संयुक्त संसदीय समिति (ज्वाइंट कमिटी) से जांच कराने की मांग की और दावा किया कि ‘देश की प्रतिष्ठा दांव पर है’.
‘एनडीटीवी इंडिया’ से खबर है कि यहां जाने-माने रिपोर्टर सोहित राकेश मिश्रा ने कंपनी को अलविदा कह दिया है। सूत्रों ने बताया कि उन्होंने एक सितंबर को अपना इस्तीफा समूह को सौंप दिया है। वह मुंबई में एक्टिंग ब्यूरो चीफ के तौर पर कार्यरत थे।
सोहित मिश्रा 2017 से एनडीटीवी के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने एनडीटीवी इंडिया के साथ ही अपने टेलीविजन करियर की शुरुआत की और पिछले छह सालों से उन्होंने सामाजिक, आर्थिक, राजनीति से संबंधित विभिन्न विषयों को कवर किया है।

सोहित मिश्रा को 2021 व 2022 के लिए ‘समाचार4मीडिया पत्रकारिता 40अंडर40’ के अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स के ग्रैंड हयात होटल में आयोजित किया गया था, जिसके लिए तकरीबन 300 मीडियाकर्मी आए थे. इनमें राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मीडिया शामिल थीं. उनमें से एक एनडीटीवी के मुंबई ब्यूरो चीफ सोहित मिश्रा भी थे.