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क्षमा बड़न को चाहिए….?

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शशिकांत गुप्ते


क्षमा वीरस्य भूषणम"अर्थात जो वीर होते है,क्षमा उनका आभूषण है।इसका मतलब यह कतई नहीं समझना चाहिए कि,जो क्षमा करता है वीर होता है।इस सूक्ति में वीर शब्द से तात्पर्य है,जो उदारमना हो या दरियादिल हो।यहाँ सीने के नाप का कोई महत्व नहीं है?
उक्त सूक्ति वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य में अव्यावहारिक लगती है।
वर्तमान राजनीति ने तो महान वैज्ञानिक न्यूटन के तीसरे नियम को भी बदल दिया है।न्यूटन का तीसरा नियम है *प्रत्येक क्रिया के समान और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।*,  राजनीति में प्रतिक्रिया की प्रतिक्रिया अनवरत चलती रहती है।
लोकतंत्र की बुनियाद असहमति को बहुमत के बलपर नजरअंदाज किया जा रहा है।असहमति को नजरअंदाज करना मतलब लोकतंत्र को कमजोर करना होता है?
चार दिन पूर्व लोकतंत्र के पवित्र मंदिर में जो कुछ घटित हुआ वह लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गम्भीर प्रश्न उपस्थित करता है?इस शर्मनाक घटना के कारण समूचे विश्व में अपने देश की छबि क्या बनेगी?
एक दूसरें पर आरोप प्रत्यारोप लगाने पूर्व अपने अंतर्मन में झांककर देखना चाहिए और पूछना चाहिए कि, आमजन से किसे माफी मांगना चाहिए?
संत कबीरसाहब का यह दोहा उक्त संदर्भ में प्रासंगिक है।
*बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय ।*
*जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय ।।*
देश से माफी मांगने की मांग जायज है? प्रश्न तो यह पैदा होता है कि,माफी किसे मांगना चाहिए?
बहुमत के दम्भ को, या लोकतंत्र में असहमति प्रकट करने वालों को?सच में जो हो रहा है वह पहली बार हो रहा है?
किसी शायर ने क्या खूब कहा है।
*वक्त सबको मिलता है जिंदगी बदलने के लिए*
*पर जिंदगी दुबारा नहीं मिलती वक्त बदलने के लिए*
जो शर्मनाक घटना घटित हुई।यह देशव्यापी बहस का मुद्दा है?सदन में जो कुछ घटित हुआ उसकी जवाबदेही किसकी है?
पक्ष के सदस्यों और समर्थकों को अपने जहन में झांक कर देखना चाहिए।गलत को गलत कहने का साहस जुटाना चाहिए।
यह स्मरण रखना चाहिए कि,इतिहास हरएक घटना का साक्षी बनता है।
इतिहास में तानाशाहों के नाम तिरस्कार से पढ़ें जातें हैं।
क्रांतिकारियों के नाम आदर सन्मान के साथ याद किए जातें हैं।
उक्त शर्मनाक घटना के लिए जो जिम्मेदार हैं, उन्हें जम्मेदारी लेतें हुए क्षमा मांगना चाहिए।यह ध्यान में रखना चाहिए कि,सिर्फ क्षमा मांगने से कर्तव्य की इतिश्री नहीं होगी,बल्कि देश को इस बात के लिए आश्वश्त करना चाहिए कि,भविष्य ऐसे घटना घटित नहीं होगी।

शशिकांत गुप्ते इंदौर
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