Site icon अग्नि आलोक

*लापरवाही नही Law के प्रति बेपरवाही है?

Share

शशिकांत गुप्ते

दर्दनाक हादसा हुआ। धार्मिक स्थल पर अपनी आस्था प्रकट करने गए थे। भगवान रामजी का जन्म दिन मना रहे थे।
बेचारे भगवान को ही प्यारे हो गए। जो स्वर्गवासी हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। हादसे में घायल लोगों के लिए राम प्रभु से प्रार्थना करते हैं, हे प्रभु इन्हे जल्दी स्वस्थ करें।
यह हादसा लापरवाही से हुआ? किसकी ला परवाही?
हादसे के बाद समाचार माध्यमों में व्यवस्था में विराजमान माननीयों के घिसे पीटे संवाद सुनने और पढ़ने को मिलेंगे जांच होगी?दोषियों को बक्शा नहीं जाएगा? आदि।
अहम सवाल तो यह है कि, यह लापरवाही है या Law (कानून) के प्रति बेपरवाही है?
इनदिनों धार्मिक आस्था को लेकर शक्ति प्रदर्शन की प्रतिस्पर्धा चल रही है। शक्ति मतलब Power का इस्तेमाल लापरवाही करने की मानसिकता के आगे Law (कानून) को दर किनार किया जाता है।
कानून को नजर अंदाज करने वाले पावर मतलब शक्ति को सिर्फ शारीरिक तंदुरुस्ती ही समझते हैं।
शारीरिक रूप से तंदुरुस्त होना ही चाहिए।
इंतजार तो इस दिन का है जिस दिन मानव में मानवीयता विद्यमान करने के लिए शिक्षा केंद्र खुलेंगे। जहां मानव को यह समझाया जाएगा की सीना के नाप कितना बड़ा है,यह महत्वपूर्ण नहीं है,सीने में दिल या हृदय नाम का अवयव होना चाहिए। इस हृदय नामक अवयव में स्पंदन भी होना चाहिए। यह स्पंदन मानवीय संवेदनाओं का धोतक है,कारण दिल होगा तो ही पसीजेगा?
संवेदनशीलता जागृत होगी तो मानव कभी भी अवेध कार्य करेगा ही नहीं।
शोले फिल्म में कुख्यात दस्यु का अभिनय करना वाला खलनायक का संवाद याद आता है।
कितने आदमी दे?
आज सियासत में यह संवाद अप्रत्यक्ष रूप से बगैर आवाज के बोला जाता है,अपना ही आदमी है?
आज इस तरह के अपने आदमी आरोप कर निर्भीक होकर स्वच्छंदता से बाहर ही हैं।
जो भी हादसा हुआ,इस हादसे को गुजरात में स्थित सूरत शहर की अदालत में ले जाना चाहिए।
ताबड़तोड़ फैसला ही जाएगा?
हाथ कंगन को आरसी की जरूरत नहीं होती है?

शशिकांत गुप्ते इंदौर

Exit mobile version