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‘बलात्कृता ! कभी आत्मदाह मत करना !

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बलात्कृता !
कभी आत्मदाह मत करना
किसी धृतराष्ट्र के
राजमहल के सामने
मत आह्वान करना
किसी कृष्ण का
कि वह अवतरित हो
और दिलाए तुमको न्याय।
बचा ले जाना स्वयं को
बाहें फैलाए बैठीं
चम्बल की घाटियों तक
जो आज भी
प्रतीक्षारत है
आगंतुक फूल्लन देवी के लिए।

          रामकिशोर मेहता ,संपर्क - 919408230881,ईमेल - ramkishoremehta9@gmail.com 
        संकलन -निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद,
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