शशिकांत गुप्ते
आज सीतारामजी आहत हैं। आहत होने के कारण क्रोधित हो रहें हैं।
मैने आहत होने का कारण पूछा? सीतारामजी गुस्सा होकर कहने लगे, जो लोग अपने देश भारत के बारे में कुछ जानते नहीं है,वे क्या ख़ाक सर सर्वेक्षण करेंगे? घर में बैठ कर मनमानी रिपोर्ट बना दी।
भारत में भुखमरी सम्भव ही नहीं है? जिस किसी संस्था ने भी यह रिपोर्ट बनाई है, वह संस्था भारत की संस्कृति को जानती ही नहीं है।
जिस देश बड़े वाहनों पर दसबीस विशाल स्पीकर लगा कर आए दिन विशाल भंडार की कर्कश ध्वनि सुनाई देती हो, उस देश में भुखमरी? जिस देश भगवान को भी छप्पन भोग का प्रसाद चढ़ता हो वहाँ भुखमरी? जिस देश में अन्नकूट नाम से विभन्न व्यंजनों का सामूहिक रूप से रसास्वादन होता हो उस देश में भुखमरी?
जिस देश में मंदिरों में मशीन से रोटी,सब्जी,दाल और मिष्ठान बनता हो वहाँ भुखमरी?
जिस देश में धार्मिक आस्थावान लोग, विभिन्न देवी देवताओं के मंदिरों में मुक्करर दिन दर्शन कर, मंदिर परिसर में या मंदिर के बाहर सड़क पर भीक्षा मांनगे वालों को मुक्तहस्त से अन्न दान करतें हैं। उस देश में भुखमरी?
देश में विभिन्न तीज त्यौहारों पर मौसम के अनुसार स्वादिष्ठ पकवान बनते हो, वहाँ भुखमरी?
जिस देश में जघन्य अपरधियों को संस्कारित होने का तमगा प्रदान कर जेल से छुड़ाकर लाने के बाद मिठाई खिलाई जाती हो उस देश में भुखमरी सम्भव है?
जिस किसी सर्वेक्षण संस्था ने सर्वेक्षण किया हो उस संस्था के सभी सदस्यों को आमंत्रित किया जाए और दाल बाफलो की मेजबानी परोसी जाए। दाल बाफलो के साथ चूरमे के लड्डू खाएंगे तो बार पानी पी पी क्षमा मांगेंगे? कान पकड़ कर कहेंगे भविष्य में कभी भी गलत रिपोर्ट नहीं बनाएंगे?
भारतीयों की धार्मिक भक्ति भावना को जानते नहीं है। यहाँ भुखमरी नहीं है, उल्टा जिनके घरों में धन की कमी नहीं होती है,और जिनका घर धान्य सामग्री से भरा होता है,वे लोग भी कई दिनों तक उपवास करते है। मतलब कईं दिनों तक भूखे रहतें हैं?
जिस देश बहुत से धार्मिक स्थानों पर बारह महीनों निरंतर भोजन प्रसादी वितरित की जाती हो,उस देश को भुखमरी के सूचकांक में नीचें दिखाया जा रहा है? लानत है ऐसी संस्थाओं पर?
यदि यह रिपोर्ट सन 2014 के पूर्व आती तो मान सकते थे।
अब तो देश की सत्ता मजबूत हाथों में है।
लगता है,सर्वेक्षण संस्था को पाप और पुण्य के बारे कोई जानकारी नहीं है?
यहॉ पाप कर्म से मुक्ति के लिए स्वयं के शरीर के तोल के बराबर अनाज तोल कर पुण्य कमांड के लिए दान किया जाता है।
ऐसे महान देश में भुखमरी सम्भव ही नहीं है?
सीतारामजी के बातें सुनकर मेरे मन में चेतना जागी और मुझे भी लगा कि अब भगत हो ही जाना चाहिए।
इनदिनों देश मे सर्वत्र भक्तों की जय जयकार है।
शशिकांत गुप्ते इंदौर

