सुसंस्कृति परिहार
साहिब,नया साल आने को है आपको और देश वासियों को मुबारकबाद देनी है या नहीं इसी सोच में बहुत से गुणा भाग लगा रहे हैं कि जब क्रिसमस-डे का विरोध किया गया है तो नया साल तो उनका ही है तो कैसे मनाया जाएगा ? हमें विरोध तो जताना ही होगा। दुख होता है बाजार में ये देखकर कि इस नये साल के कैलेंडर धड़ल्ले से खरीदे जा रहे हैं।भला ये कैसा विरोध होगा?इसकी बिक्री पर शीघ्र रोक लगानी उचित होगी ।ना रहेगा बांस और ना बजेगी बांसुरी।इस कैलेंडर को देख कर बराबर नए साल का इंतजार बना भी रहता है।जिसको नया साल मनाना हो मनाए।बाहर ख़ुशी मनाने की इज़ाजत ना दी जाए।उनका जिस तेजी से चैनल प्रसारण करते हैं उन्हें भी रोका जाना चाहिए क्योंकि ये सब देख बच्चे तो बच्चे बड़े बूढ़े भी ग्रीटिंग कार्ड की रट लगाने लगते हैं।मेरा विश्वास है इस दौरान दी जाने वाली छुट्टियां भी रद्द हो जाएं तो सोने में सुहागा होगा।बड़े बड़े लोग पर्यटन केंद्रों का रुख करते हैं और काम प्रभावित होता है।ओमेक्रान कोरोनावायरस आ ही गया है उसके चलते इन छुट्टियों को रद्द किया जा सकता जैसे मध्यप्रदेश सरकार पंचायत चुनाव के लिए प्रावधान करती है।जितने लोग नए साल की छुट्टियों को सेलीब्रेट करने जा रहे होंगे।वे रुक जायेंगे।तभी तो इस बीमारी से छुटकारा मिलेगा।सब होटलों को ख़बरदार कर दीजिए ज्यादा हो तो पुलिस की मदद लीजिए।इस नए साल का पुख्ता इंतजाम हो जाएगा।
हो सकता है इन प्रतिबंधों से हिंदू व्यवसायी दुखी हो जाएं उनकी बिक्री पर असर हो आपके पर्यटन केंद्रों का मुनाफा शून्य हो जाए। बच्चे पटाखें ना फोड़ पाएं। महिलाएं और युवजन फील करें किंतु यदि कुछ हासिल करना है तो कुछ खोना ही पड़ता है उन्हें बताया जाए कि हम पर दो सौ साल शासन करने वालों का है ये नया साल है हम तो चैत्र प्रतिपदा मनायेंगे।भले नये साल का विरोध करने वालों के आका अंग्रेजों के बफादार रहे हों और देश के प्रति गद्दारी की हो ।आज तो हिंदुत्ववादी हमारी सरकार है।गैर हिन्दू और उनके धरम को हम क्यों स्वीकार करें। संविधान और लोकतंत्र की अंधी दौड़ में पिछली सरकारों ने हमारी संस्कृति को जो चोट पहुंचाई है उसे कभी भूलना नहीं।इस बार जितना कुछ हासिल कर लें आगे पता नहीं क्या हो ? जो हिन्दू भाई इस पर्व को मनाते रहे हैं उन्हें तकलीफ तो निश्चित होगी उनके लिए चैत्र प्रतिपदा के लिए विशेष देश और विदेश के मंदिरों के लिए सस्ते पैकेज घोषित कर दीजिए फिर देखिए काशी विश्वनाथ और केदारनाथ में लोग टूट पड़ेंगे।एक दो साल में यह लुभावना अभियान अंबानी के जियो की तरह जोर पकड़ ले तब फिर वैसी ही कूटनीति से लूट का भारी भरकम मुनाफा भी मिलेगा और लोग ऐसे नववर्ष के सम्मोहन के जाल से मुक्त हो जाएंगे।रही क्रिश्चियन समाज की बात वे हैं ही कितने आंकड़े बता रहे हैं कि ईसाई समाज के लोग जो 1971की जनगणना के मुताबिक 2.53%था वह आज घटकर 1.6%ही रह गया है। ईसाई मिशनरियों चर्चों मूर्तियों,स्कूलों,ननोंऔर सांताक्लाज पर यूं ही हमलों पर सरकार और प्रशासन इसी तरह मौन रहा तो साहिब ये तो तय है उनमें से सम्पन्न लोग विदेश का रुख कर लेंगे और गरीब गुरुबा सरकार का हुक्म बजायेंगे। गुजरात में नरसंहार के बाद की शांति इसका उदाहरण है। अल्पसंख्यक बुरी तरह खामोश हैं।
निवेदन है,आप ज़रूर से रात्रि 9बजे नया साल ना मनाने का आव्हान तो कर दें तो देखिएगा देश कैसे टूट पड़ेगा मनाने वालों पर ?ताली थाली बजाने की याद कीजिएगा। दुनिया के लोगों की परवाह मत कीजिएगा। हम हिंदुत्ववादियों को हिंदू राष्ट्र बनाना है बस।एक एक कर हम विदेशी धर्मानुष्ठानों से मुक्त होते जायेंगे।तभी शायद सारे जहां से अच्छा हमारा हिंदोस्ता बन पायेगा।यकीन है आपको हमारे विचार बहुत उपयोगी लगे होंगें।शुभ शुभ हो।
नया साल आने को है साहिब !

