-सुसंस्कृति परिहार
आखिरकार पलटीमार नीतीश बाबू ने एक बार फिर बिहार की सत्ता हथिया ली है। उन्होंने दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रचा है।जो भाजपा के लिए करारा तमाचा है।जैसा कि पहले ही बताया जा रहा था कि नीतीश कुमार को यदि ज़रा भी अंदेशा हो जाता कि उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाएगा तो वे क्या गुज़रते उसका अहसास भाजपा को था। इसलिए उन्होंने मज़बूरी में नीतीश बाबू को हरी झंडी दी है।
लेकिन इस बार शपथग्रहण करते वक्त वे जिस तरह लड़खड़ाते हुए शब्दों का उच्चारण कर रहे थे यह उनके अंदर की हड़बड़ाहट थी।वरना नौ बार शपथग्रहण करने वाले मुख्यमंत्री इस तरह नहीं लड़खड़ाते नज़र आते ।इतनी सी शपथ तो अब तक याद भी हो जानी चाहिए थी।
संभवतः इस स्थिति के बारे में जो कयास लगाए जा रहे हैं कि शायद भाजपा ने उनकी बुरी तरह घेराबंदी कर दी इसका दबाव उन पर था। सोचिए दो उपमुख्यमंत्री उनके काबीना में भाजपा से होंगे तथा कुल 14 भाजपा कोटे से मंत्री पद पर होंगे।जबकि जेडीयू से सिर्फ 8 मंत्री शामिल किए गए हैं जिनमें एक महिला और एक मुसलमान शामिल है। भाजपा कोटे में दो महिलाएं हैं। कहा जा रहा है कि नीतीश बाबू ने दोनों दलों के बराबर मंत्री होने पर समझौता किया था। क्योंकि दोनों को मिली सीट लगभग बराबर है।
अब सोचिए नीतीश ने जिन विधायकों को मंत्री बनाने का वादा किया होगा।उन पर क्या गुजरेगी? संभवतः नीतीश को यही मलाल सताए जा रहा है।
सूत्र यह बता रहे हैं कि जब जब नीतीश ने दबाव महसूस किया है उन्होंने अपने तेवर बदल दिए हैं।कभी राजद के साथ यह घिनौना खेल खेला तो कभी भाजपा के साथ। सत्ता में बने रहने का यह खेल नीतेश ने खूब खेला है इसलिए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि वे साल भर बमुश्किल भाजपा के साथ टिकेंगे फिर पलटीमार लेंगे। लेकिन अब यह इतनी सहजता से होने वाला नहीं दिखाई देता है क्योंकि पहले भाजपा जेडीयू से पीछे चलती थी आज वह आगे है। केंद्र में उसकी सरकार है वह कुछ भी कर सकती है।इसका दूसरा पहलू यह है कि अब राजद की स्थिति खराब है जिसकी दम पर चाचा भतीजा या लालू राग जम जाता रहा है।
इसीलिए लगता है वे बुरी तरह भाजपा के जाल में फंसे चुके हैं।ना उनसे उगलते बन रहा है ना निगलते।उनके दल में भी उनकी सत्ता लिप्सा से लोग नाराज़ हैं वे नेतृत्व में बदलाव चाहते हैं।यह भी संभव है एनडीए के भारी बहुमत में से कोई जेडीयू की नई टीम को भाजपा मौका देकर नीतीश की पार्टी को मटियामेट करने की कोई कुचाल चल दे। क्योंकि उनका एजेंडा साफ़ है नीतीश अब उन्हें मुख्यमंत्री के रुप में कतई पसंद नहीं है।जबकि यह जाहिर हो चुका है कि दस हजारी महिलाओं ने नीतीश को बचाने ही भाजपा को वोट किया है।
अब देखना यह है कि भाजपा आगे क्या गुल खिलाती है। नीतीश की खिचड़ी अब भविष्य में पकती नज़र नहीं आती।वे अब कथित सुशासन बाबू से कुशासन बाबू में तब्दील हो जाएंगे क्योंकि जिस तरह वादों की बरसात हुई है।वह पूरी करना मुमकिन नहीं है।यही मौका होगा जब पलटी कुमार को भाजपा असली पलटीमार कर उनका वज़ूद ख़त्म कर देगी।यह उसकी नियत में है। महाराष्ट्र में ऐसा प्रयोग सफल भी रहा है।

