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किसी  उम्मीद  को  न  कभी   बेजार किया

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सरल कुमार वर्मा

किसी उम्मीद को न कभी बेजार किया
मेरी वफ़ाओ ने मुझे खूब शर्मशार किया

माना जो अपना तो तहकीकात क्यो करते
हमने तो मुखौटे पर भी ऐतबार किया

फलसफे तरक्की के देखे उलट पलट कर
नई तहज़ीब को तभी तो दरकिनार किया

दो गज ही जमीन चाहिए दुनिया में सब को
फिर किसने पैदा इतने जमीदार किया

किसी मजहब किसी रंग किसी मुल्क का हो
हमने इंसानो को भर निगाह प्यार किया

पेशानी पे सिकन है सूरत मासूम नहीं है
किसने मुल्क की तस्वीर से छेड़छाड़ किया

“सरल” मुमकिन न थी तरक्की जिनके बगैर
फिर किसने उन सर्माएदारो को फरार किया
सरल कुमार वर्मा
उन्नाव, यूपी
9695164945

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