मिशेल एलनर
जब मैंने शीर्षक “मारिया कोरिना मचादो ने शांति पुरस्कार जीता” देखा, तो मुझे विसंगति पर लगभग हंसी आ गई। लेकिन मैं हंसी नहीं। क्योंकि ऐसे किसी व्यक्ति को जिसकी राजनीति ने इतनी यंत्रणा पैदा की हो, उसे पुरस्कृत करने में कोई मजेदार बात नहीं है। कोई भी जो यह जानता है कि वह करती क्या हैं, जानता है कि उनकी राजनीति के बारे में कुछ भी दूर दूर तक शांतिप्रिय नहीं है।
यदि इसे ही 2025 में “शांति” कहा जाता है तो इसका मतलब है, पुरस्कार ने अपनी विश्वसनीयता पूरी तरह खो दी है। मैं वेनेजुलेआई- अमरीकी हूँ और अच्छी तरह जानती हूँ कि मचादो किसका प्रतिनिधित्व करती हैं।
वह वाशिंग्टन की “शासन-बदलो मशीन” का मुस्कुराता चेहरा हैं, लोकतंत्र के वेश में प्रतिबंधों, निजीकरण और विदेशी हस्तक्षेप की सौम्य प्रवक्ता हैं।
मचादो की राजनीति हिंसा में डूबी हुई है। उन्होंने विदेशी हस्तक्षेप की मांग की है, वह भी गज़ा में विनाश करने के आर्किटेक्ट बेंजामिन नेतन्याहू से सीधे अपील करते हुए कि “आजादी” के बैनर तले वेनेजुएला को बमों से “मुक्त” करने में मदद करें, उन्होंने प्रतिबंधों की मांग की है जो युद्ध का ढंका स्वरूप ही हैं – जैसा कि लैन्सिट और अन्य पत्रिकाओं के अध्ययन में दर्शाया गया है – समूची आबादियों को दवाइयों, भोजन, ऊर्जा रोककर प्रतिबंधों ने युद्ध से ज्यादा लोगों की जान ली है।
मचादो ने अपना पूरा राजनीतिक जीवन विभाजन को बढ़ावा देने, वेनेजुएला की संप्रभुता को मिटाने और इसके लोगों को गरिमा से जीने का अधिकार खारिज करने में लगाया है।
वास्तव में मारिया कोरिना मचादो यह हैं:
उन्होंने 2002 में तख्ता पलट का नेतृत्व किया जिसने अल्पावधि के लिए एक लोकतान्त्रिक रूप से चुने राष्ट्रपति को अपदस्थ किया, और कारमोना डिक्री पर हस्ताक्षर किए जिसने संविधान को मिटा दिया और हर सार्वजनिक संस्था को रातोंरात भंग कर दिया।
उन्होंने वाशिंग्टन के साथ मिलकर शासन परिवर्तन को सही ठहराने, अपने मंच का इस्तेमाल बलप्रयोग से वेनेजुएला को “मुक्त” कराने के लिए विदेशी हस्तक्षेप की मांग करने के लिए किया।
उन्होंने डोनाल्ड ट्रम्प की आक्रमण की धमकियों और कैरिबियन में नौसेना तैनाती का स्वागत किया जो “नार्को तस्करी पर अंकुश” की आड़ में क्षेत्रीय युद्ध भड़का सकने वाला शक्ति प्रदर्शन था। ट्रम्प ने युद्धपोत भेजे और संपत्तियाँ फ्रीज़ कीं तो मचादो ने उनकी स्थानीय प्रॉक्सी के रूप में तैयारी दिखाई और वेनेजुएयला की संप्रभुता थाली में सजा कर पेश करने का वादा किया।
उन्होंने अमरीकी प्रतिबंधों की पैरोकारी की जिससे अर्थव्यवस्था का गला घुटने लगा, यह जानते हुए कि इसकी कीमत कौन चुकाएगा: गरीब, बीमार और श्रमिक वर्ग। उन्होंने कथित “अंतरिम सरकार” बनाने में मदद की जो वाशिंगटन समर्थित कठपुतली कार्यक्रम था जो स्व-नियुक्त “राष्ट्रपति” द्वारा संचालित था जिसने वेनेजुएला के संसाधन विदेश में लुटाए जबकि घर में बच्चे भूखे रहे।
उन्होंने जेरूसलम में वेनेजुएला के दूतावास को फिर से खोलने का वादा किया है, खुद को खुलकर ऐसे नस्लभेदी राष्ट्र के साथ दर्शाया है जो अस्पतालों पर बमबारी करता है और उसे आत्मरक्षा कहता है।
अब वह देश का तेल, पानी और इंफ्रास्ट्रक्चर निजी कंपनियों को सौंपना चाहती हैं/ यह वही तरीका है जिसने लैटिन अमेरिका को 90 के दशक में नवउदारवादी दुर्गति की प्रयोगशाला बनाया।
मचादो ला सलीदा -वर्ष 2014 में विपक्षी अभियान – के साथ थीं, जिसने विरोध प्रदर्शनों को हवा दी और जिसमें गुरिल्ला रणनीतियाँ शामिल थीं। वह कोई “शांतिपूर्ण प्रदर्शन” नहीं थे जैसा कि विदेशी प्रेस ने दावा किया था, वह सुनियोजित बैरिकेड थे जो देश को पंगु बनाने के लिए और सरकार के पतन के लिए थे। रास्ते जलते कचरे और कंटीली तारों से से बंद किए गए, श्रमिकों की बसें जलायी गईं और चाविस्ता होने का जिन लोगों पर संदेह था, को पीटा और मारा गया। यहाँ तक कि एम्बुलेंस और डॉक्टरों पर भी हमले किए गए। कुछ क्यूबाई चिकित्सा ब्रिगेड को लगभग जिंदा जलाया गया। सार्वजनिक संपत्तियाँ, भोजन के ट्रक और स्कूलों को नष्ट किया गया। समूची बस्तियां डर फैलाकर बंधक बनाई गईं जबकि विपक्षी नेता जैसे मचादो किनारे खड़े होकर जयकारे लगाती रहीं और इसे “प्रतिरोध” कहा।
वह जिसे “आपराधिक उद्योग” कहती हैं और जिसके खिलाफ ट्रम्प की “निर्णायक कार्यवाही” की सराहना करती हैं, तो उसी व्यक्ति के साथ खड़ी होती हैं जो आईसीई की निगरानी में प्रवासी बच्चों को कैद करता है और परिवारों को तोड़ता है, जबकि वेनेजुएलाई मांएं अपने बच्चों को तलाशती रहती हैं जो अमरीका की प्रवासी नीतियों के कारण लापता हो जाते हैं।
मचादो शांति या प्रगति का प्रतीक नहीं हैं। वह फासीवाद, ज़ायनवाद और नवउदारवाद के वैश्विक गठजोड़ का हिस्सा हैं, एक ऐसी धुरी जो लोकतंत्र और शांति की भाषा में प्रभुत्व को सही ठहराती है। वेनेजुएला में, इस गठजोड़ का मतलब तख्ता पलट, प्रतिबंध और निजीकरण है। गज़ा में, इसका मतलब जनसंहार और लोगों की हस्ती मिटाना है। विचारधारा एक ही है; यह मानना कि कुछ ज़िंदगियाँ खर्च की जा सकती हैं, संप्रभुता बेचनीय है और हिंसा को व्यवस्था के रूप में ठेला जा सकता है।
यदि हेनरी किसिंजर शांति पुरस्कार जीत सकते हैं तो मारिया कोरिना मचादो क्यों नहीं? संभवत: अगले साल वह लोग इसे गज़ा ह्यूमेनटेरियन फाउंडेशन को देंगे “कब्जे के दौरान करुणा” के लिए।
हर बार यह पुरस्कार जब लोकतंत्र के वेश में हिंसा के आर्किटेक्ट को दिया जाता है तो यह उन लोगों के मुंह पर थूकने जैसा होता है जो वास्तव में शांति के लिए लड़ रहे हैं। फिलिस्तीनी मेडिक मलबे से शव निकालते हुए, पत्रकार गज़ा में सच को दर्ज करने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हुए और कार्यकर्ता फ्लोटिला घेरे को तोड़ने व गज़ा में भूख से तड़प रहे बच्चों को मदद पहुँचने के लिए सेलिंग करते हुए, केवल और केवल साहस और दृढ़ विश्वास के बूते।
लेकिन वास्तविक शांति पर बोर्डरूम में चर्चा नहीं होती या स्टेज पर इसे पुरस्कृत नहीं किया जाता। वास्तविक शांति है महिलाओं द्वारा ब्लॉकेड के दौरान फूड नेटवर्क बनाना, स्थानीय समुदायों द्वारा नदियों को निस्सारण से बचाना, उन श्रमिकों द्वारा जो आज्ञाकारिता में भूखे मरने से मना कर देते हैं, वेनेजुएलाई माओं द्वारा जो अमरीका, आईसीई और प्रवासी नीतियों द्वारा छीने गए बच्चों को लौटाने की मांग संगठित होकर करती हैं और उन राष्ट्रों द्वारा जो गुलामी के बजाय संप्रभुता चुनते हैं। वेनेजुएला, क्यूबा, फिलिस्तीन और ग्लोबल साउथ के हर राष्ट्र को ऐसी ही शांति की जरूरत है और उन्हें मिलनी चाहिए।
(मिशेल एलनर का लेख, कोडपिंक से साभार। मिशेल वेनेजुएलाई-अमरीकी हैं, वह कोडपिंक के लैटिन अमेरिकी अभियान की समन्वयक हैं।

