भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। प्रदेश के आदिवासियों के राजा और वर्षों तक वन विभाग और आदिवासी विभाग के मंत्री रहे खंडवा के जनप्रतिनिधि वर्तमान में शिवराज सरकार में वन मंत्री विजय शाह ने पिछले के द्वारा पिछले दिनों उनकी जुबान पर बैठी सरस्वती की वजह से शिवराज सरकार की कार्यशैली के कारण भाजपा की बिगड़ी छवि का जिस तरह से बखान करते हुए कहा कि मैं खंडवा लोकसभा चुनाव में मांधाता विधानसभा का प्रभारी बना हूँ भाजपा और स्वयं उनके लिये मुसीबत बन गया हूँ
शिवराज सरकार के वनमंत्री ओंकारेश्वर जाते समय ग्राम बीड में वन मंत्री विजय शाह ने उपचुनाव की तैयारियों के संंबंध में पत्रकारों ने पूछा तो उनकी जुबान पर सरस्वती बैठकर शिवराज सरकार की कार्यशैली के कारण प्रदेश में बिगड़ी भाजपा सरकार की हकीकत उनकी जुबान पर आ गई, हालांकि मीडिया और राजनेता इसे उनकी जुबान फिसलना कह रहे हैं, लेकिन हकीकत तो यही है कि यह वही विजय शाह हैं जो शिवराज के पूर्व कार्यकाल में झाबुआ जिले के प्रभारी थे तो उस समय एक स्वयंसेवी संस्था के संचालक के साथ यात्रा करते हुए उन्होंने रास्ते में जो चर्चायें चलीं उसका सही बखान उन्होंने झाबुआ की एक आमसभा में करते हुए मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह के बारे में जो कुछ का था उसकी वजह से उनको मंत्री पद भी गवाना पड़ा था, हालांकि इस घटना को लेकर उन दिनों समाचार पत्रों में जो खबरें सुर्खियों में रहीं थी उसके अनुसार झाबुआ की यात्रा के दौरान वह एनजीओ संचालक जिनसे मिलकर उन्होंने जो खेल शिवराज सिंह सरकार की कार्यशैली के चलते कागजों पर योजनाओं की सफलता का खेला, जिसको लेकर भी खूब खबरें सुर्खियों में रही यह सभी जानते हैं कि उस एनजीओ के संचालक को विजय शाह ने कितना लाभ पहुंचाया था, यह वही विजय शाह हैं जिनके बारे में जब वह शिवराज सरकार के पूर्व कार्यकाल में मंत्री हुआ करते थे तो समाचार पत्रों में यह खबर खूब सुर्खियों में रही थी कि एक बच्चा स्कूल में दस हजार के नोट की गड्डी लेकर स्कूल पहुंचा था, स्कूल में जब उस बच्चे से पूछा गया तो उसने स्कूल के संचालकों को यह जानकारी दी थी कि हमारे यहां इस तरह के नोटों की गड्डियां बोरों में भरे रखे हुए हैं? उन खबरों में कितनी सत्यता थी यह तो जांच का विषय है लेकिन यह सभी जानते हैं कि वर्षों तक विजय शाह के पास शिवराज के मुख्यमंत्री रहते वन विभाग की कमान रही तो वहीं आदिवासी विभाग की भी जिम्मेदारी वह निभा चुके हैं, शिवराज सरकार की कार्यशैली से ही नहीं बल्कि विजय शाह के शासन की उस कार्यशैली से भी प्रदेश के लोग भलीभांति परिचित हैं जिसमें वह महिला अधिकारी को देखकर यह कहने से नहीं चूकते कि आपका काम अच्छा है, आप कबसे यहां हैं, आपको ट्रांसफर तो नहीं कराना,
हालांकि उनकी इस तरह की कार्यशैली को लेकर प्रदेश के राजनेता और रानजीतिक पंडित तरह-तरह की चर्चायें चटकारे लेकर करते नजर आ रहे हैं भले ही ओंकारेश्वर जाते समय ग्राम बीड में मंत्री विजय शाह ने जो कुछ कहा उसे शिवराज की कार्यशैली से भलीभांति परिचित होने और प्रदेश में भाजपा की बिगड़ती छवि से भलीभंाति परिचित विजय शाह ही नहीं बल्कि प्रदेश के कई मंत्री और भाजपा नेता इस बात से भलीभांति परिचित हैं कि प्रदेश में शिवराज सिंह के हाथों सरकार की कमान के रहते उनकी कार्यशैली के चलते जिस प्रकार से भाजपा की छवि धूमिल हुई है उसके परिणाम स्वरूप ही दमोह उपचुनाव में भाजपा को करारी हार मिली है, जिस करारी हार से तिलमिलाई भाजपा के प्रदेश से लेकर दिल्ली तक के नेता चिंतित हैं और उनको अब प्रदेश में होने वाले उपचुनाव में भी परिणाम भाजपा के पक्ष में आते नजर नहीं आ रहे हैं हालांकि शिवराज सिंह अपनी चिर परिचित कार्यशैली के चलते चुनाव वाले क्षेत्रों में नहीं बल्कि प्रदेश के भाजपा नेताओं के अनुसार मदारी का सांप और नेवले लड़ाने का खेल की तरह प्रदेश की जनता को लोक लुभावने सपने दिखाकर ही नहीं बल्कि बिना बजट के और बिना प्रशासनिक स्वीकृति के तमाम योजनाओं की घोषणायें करने में लगे हुए हैं लेकिन उन्हें भी यह मालूम है कि उनकी ही नहीं बल्कि भाजपा की छवि उनकी उस कार्यशैली के चलते जिसमें सरकारी योजनाओं की फर्जी आंकड़ों की रंगोली सजाकर अधिकारी उन्हें प्रसन्न करने में लगे हुए हैं, लेकिन उसकी जमीनी हकीकत कुछ और है यदि अधिकारियों की फर्जी आंकड़ों की रंगोली की रिपोर्ट की मैदानी स्तर पर कोई निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराई जाये तो जमीनी स्तर पर नतीजे कुछ और होंगे। कुल मिलाकर वन मंत्री विजय शाह की जुबान पर सरस्वती बैठकर भाजपा की उपचुनाव में होने वाली स्थिति का बखान उनके श्रीमुख से निकला है हकीकत वही है? जिसे लेकर भाजपा के सभी नेता परेशान नजर आ रहे हैं, यह अलग बात है कि कांग्रेस एकजुट नहीं है वह केवल ट्वीटर और अखबारों में बयान देकर सुर्खियों में बने रहने की नीति अपनाये हुए है लेकिन जमीनी हकीकत ठीक नहीं है लेकिन उसके बावजूद भाजपा की स्थिति इन उपचुनावों में गड़बड़ाती दिख रही है तभी तो आदिवासी बाहुल्य जिले अलीराजपुर के जोबट में होने वाले उपचुनाव में पूर्व विधायक सुलोचना रावत व उनके पुत्र को भाजपा में लाकर अपनी छवि सुधारने में भाजपा ने प्राप्त कर ली। लगभग यही स्थिति पृथ्वीपुर उपचुनाव में थी यहां स्वर्गीय बृजेन्द्र सिंह राठौर के पुत्र नितेन्द्र सिंह राठौड़ को भाजपा में लाकर अपनी साख बचाने में भाजपाई जुट गये थे लेकिन उन्हें यहां सफलता नहीं मिल सकी। शिवराज मंत्री मण्डल के वन मंत्री शाह की जुबान पर सरस्वती बैठकर भाजपा की जिस स्थिति का बखान उनके श्रीमुख से हुआ है उसी खंडवा लोकसभा के एक विधानसभा क्षेत्र के वह प्रभारी हैं और उन्हें यह मालूम है कि उनके ही विभाग के वन विभाग द्वारा इसी खंडवा लोकसभा के आदिवासियों पर कितना अत्याचार किया जाता है और उन्हें हमेशा बेदखल करने की कार्यवाही की जाती है इससे आदिवासियों में रोष व्याप्त है और उनका यह असंतोष खंडवा लोकसभा उपचुनाव में क्या गुल खिलाने वाला है इसका अहसास शायद विजय शाह को हो गया है?
यह सभी जानते हैं कि शिवराज का सबका साथ सबका विकास का ढिंढोरा पीटते हुए इस प्रदेश में विकास के नाम पर जो भेरूबाबा खड़े किये गये उनकी स्थिति उन्हीं के शासनकाल में धराशायी हो गई है? लेकिन इन करोड़ों के निर्माण कार्यों से प्रदेश का विकास नहीं बल्कि भाजपा के उन नेताओं का विकास हुआ है जिनकी शिवराज सरकार के सत्ता के काबिज होने के पहले हैसियत टूटी साइकल तक खरीदने की नहीं थी वह आज आलीशान भवनों और लग्जरी वाहनों में फर्राटे भरते नजर आ रहे हैं, सही मायानों में शिवराज के शासन की कार्यशैली के चलते विकास उन भाजपाई नेताओं और शिवराज सरकार में बही ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार की गंगोत्री में डुबकी लगाकर उन अधिकारियों ने जो तिजोरी भरी अब उन भ्रष्ट अधिकारियों के भ्रष्टाचार की पोल भी वर्तमान शिवराज सरकार में इन दिनों पडऩे वाले लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू के पड़े छापों से उजागर हो रही है जिसमें बड़े-बड़े अधिकारियों से लेकर पंचायत के सचिव व सरपंच भी करोड़पति निकल रहे हैं? इसी तरह की शिवराज सरकार की कार्यशैली के चलते उस भाजपा की साख को बट्टा लगा है जो कभी भाजपा के ही पितृपुरुष कुशाभाऊ ठाकरे के समय में भाजपा की जो छवि हुआ करती थी उसी छवि को धूमिल करने का काम भी शिवराज सरकार में खूब चला, यही वजह है कि आज भाजपा उपचुनाव को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है लेकिन उसकी जमीनी हकीकत का तो सही आंकलन से भी वे भलीभांति अवगत हैं?

