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*नफरत का विरोध न करना हिंदू और मुसलमान के बीच में नफरत का मूल कारण*

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हिन्दू और मुसलमान के बीच मे नफरत का मूल कारण है इसका विरोध न करना। कुछ राजनीतिक दल अपने निजी फायदों के लिये कुछ मुसलमानों या हिन्दुओ के द्वारा किये गयं दुष्कर्मो को पूरी कॉम पर मढ़ कर अपना फायदा लेते है। इसमें कुछ बेवकूफो के साथ मिलने के साथ अन्य भी भेद चाल में ही चल कर इसे समर्थन देने लगते है।

परन्तु अक्सर ये देखा जाता है कि हिन्दुओ में इसका विरोध किया जाता है, परन्तु केवल कुछ ही मुस्लिम इस भेदभाव का विरोध करते है शायद वे अपनी ही कोम से निष्कासित होने के डर से नही करते जिस से उन पर हिन्दुओ को भरोसा कम होता जा रहा है।

जब तक वे खुल के गलत को गलत नही कहेंगे तब तक दूसरे दलों को उन पर उंगली उठाने का मौका मिलता रहेगा। इसलिए मैं ये आशा करता हूँ की कोई भी जाति का व्यक्ति केवल अपने निजी हित या अपनी कोम के बारे में न सोचते हुए अपने देश के लिये पहले सोचे और किसी भी गलत काम को चाहे वह उनके कोम के कुछ लोगो द्वारा किया जा रहा हो, उसका खुल के विरोध करना चाहिए जिससे सी को भी केवल कुछ लोगो के पाप का भागी पूरे समुदाय या कोम को बोलने का मौका ना मिले।

मैं तो नहीं करती नफरत किसी मुस्लिम से। और ना ही ज्यादातर हिन्दू लोग ऐसे है नहीं तो इतने ज्यादा इन सि डेंट नफरत होती तो उनकी जनसंख्या इतनी बढ़ती भारत? (यूएस को देखिए एक ट्रेड टावर गिरा और उन्हों ने क्या हालत की अफगानिस्तान की, भारत मे तो अनेकों ब्लास्ट हुई है और टेरर वाले जैसे मुंबई सीरिअल ट्रेन ब्लास्ट,दिल्ली ब्लास्ट अब मुंबई मे ही सबसे ज्यादा मुस्लिम नेता पॉवर है)

पाकिस्तान मे इतना प्यार है हिन्दू से फिर भी इतने कम जनसंख्या है?

हाँ लेकिन कई बार मुस्लिम लोगों ने ऐसा कुछ बोला किया है जिसे सोच कर लगता है इन्हीं को नफरत है हिन्दू लोगों से। जैसे हनुमान जी का और गणपति भगवानों का मजाक उड़ाना बिना किसी बात। मैंने तो कभी नहीं सोचा उनके अल्लाह के बारे मे या मजाक उड़ाया। पहली बात तो हिन्दू लोगों के घर मे ये सब डिस्कस भी नहीं होता हाँ लेकिन जो लोग कुरान को फालो करते है वो लोग हर रोज बचपन ये पढ़ते होंगे की मूर्ति पूजा पाप है और वो लोग बुरे है इसलिए उनके दिल मे ही नफरत होगी।

उसके अलावा कुछ मुस्लिम लोग अपने को बिना बात के महान समझते है बोलते है मुस्लिम ने राज किया जैसे उनके दादा, पिता जी ही डायरेक्ट ऑरेंjeb अकबर के घर से है। उनको हिन्दू राजपूत राजाओ को अच्छा मानने मे प्राब्लम है। उसके अलावा कुछ मुस्लिम लोग कपडे को लेकर औरतों को बोलते है और घूरने लग जाते है, (ये भी अजीब बात है और आजकल कुछ हिंदू लोग भी पागलपन हो गए है उनके साथ रहकर) अगर आप बीच मे इंसताग्राम ट्रेंड फालो कर रहे होंगे इतने छपरी टाइप रोड टाइप के लड़के क्या बुर्का को लेकर वीडियो बनाते थे कि की लड़की की इज़्ज़त बुर्का मे है।इस प्रकार की बातों पे ही मुझे नफरत होती है बस ऐसे लोगों से। (मतलब खुद की दिमाग निगाह सही ना रखो और सबको दोष दो, छोटे बच्चो को बुर्का पहना दो )

उसके अलावा ये हो सकता है कुछ लोग पार्टिशन को लेकर नफरत रखते हों की हिन्दू नेता ने पार्टिशन के बाद भी मंदिर नहीं छुड़वाया, इतने लोग मर गए। पाकिस्तान तो अपने को इस्लामिक ही मानता है ना, लेकिन भारत के हिन्दु नेता तुष्टीकरण करते नहीं थकते। सच बोलने मे गले में कांटा, करेंट लगता था पहले के लोगों आज के लोगों को भी। तो मुझे तो लगता है शायद अपने हिंदू लोगों से ही नफरत करते है।

कुछ मुस्लिम लोग ऑनलाइन ये बोलते है की हिन्दू लोग नेपाल चले जाओ अगर तुमको भारत को हिन्दू राष्ट्र बनना है तो.. मैंने तो उनको कहीं जाने को नहीं बोला बस ये बोला की धर्म के नाम पे ही विभाजन हुआ था तो जितना जल्दी मान ले भारत हिन्दू राष्ट्र ही है अच्छा है। जैसे दुबई इत्यादि मुस्लिम देश है वहा भी अनेकों धर्म के लोग रहते है, तो भारत मे यही बात बोलने मे इतना गुस्सा क्या होते? सब को ही पता है इस्लाम आक्रां ताओ द्वारा ही आया, है। पहले नहीं था भारत मे।

जिनको हिन्दू राष्ट्र मे नही रहना था वो तो पहले ही पाकिस्तान चले गए ना, उनको भी ऊललू बोलना है?? या हिंदू है उल्लु?जो भी है जितना भयानक नफरत मार काट एक मुस्लिम गुट दूसरे से करते है वैसा तो कुछ नहीं है भारत मे।

भारत में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच नफरत का कोई एक मूल कारण नहीं है, बल्कि यह ऐतिहासिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक कारकों का जटिल मिश्रण है। इसे समझने के लिए कुछ प्रमुख बिंदुओं पर गौर करना जरूरी है:

  1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: मध्यकाल में मुस्लिम शासकों के आगमन और उनके शासन के दौरान कुछ क्षेत्रों में मंदिरों का विध्वंस, जबरन धर्मांतरण की घटनाएँ, और सांस्कृतिक टकराव ने दोनों समुदायों के बीच अविश्वास की नींव डाली। हालाँकि, यह भी सच है कि कई मुस्लिम शासकों ने सह-अस्तित्व को बढ़ावा दिया, लेकिन नकारात्मक घटनाएँ ज्यादा याद रखी गईं।
  2. ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियाँ: अंग्रेजों ने “फूट डालो और राज करो” की नीति अपनाई, जिसके तहत हिंदुओं और मुसलमानों को जानबूझकर अलग-अलग समुदायों के रूप में उभारा गया। 1905 में बंगाल विभाजन और 1909 में अलग निर्वाचन क्षेत्रों की शुरुआत ने इस विभेद को और गहरा किया।
  3. 1947 का विभाजन: भारत-पाकिस्तान बँटवारे के दौरान हुई हिंसा, लाखों लोगों का विस्थापन और साम्प्रदायिक दंगे आज भी दोनों समुदायों की सामूहिक स्मृति में बसे हैं। इसने पीढ़ीगत आघात और नफरत को जन्म दिया।
  4. राजनीतिक उपयोग: आधुनिक समय में कुछ राजनीतिक दलों और नेताओं ने वोट बैंक के लिए धार्मिक ध्रुवीकरण को हवा दी है। विवादित मुद्दे जैसे अयोध्या, गोरक्षा, या लव जिहाद को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है, जिससे तनाव बढ़ता है।
  5. सामाजिक और आर्थिक असमानता: शिक्षा, रोजगार और संसाधनों की कमी के कारण दोनों समुदायों में एक-दूसरे के प्रति गलतफहमियाँ बढ़ी हैं। अफवाहें और प्रचार ने भी आग में घी डाला।

हालाँकि, यह भी सच है कि भारत में सैकड़ों सालों से हिंदू और मुस्लिम साथ-साथ रहते आए हैं। सूफी संतों, संयुक्त परिवारों, और साझा संस्कृति (जैसे गंगा-जमुनी तहजीब) ने सह-अस्तित्व को बढ़ावा दिया। नफरत का कारण अक्सर अज्ञानता, डर और बाहरी उकसावे से उपजता है, न कि धर्मों की मूल शिक्षाओं से।

आपके विचार में इस तनाव को कम करने का कोई रास्ता हो सकता है? शायद उस पर चर्चा से कुछ सकारात्मक दिशा मिले।

जनता को वर्तमान सरकार को 05 साल विपक्ष में बैठना चाहिए ताकि सारे अराजक तत्वों पर कार्यवाही हो सके अभी तो ये पता ही नहीं चल रहा सही कौन हे गलत कौन

सबसे पहली बात किसी भी धर्म में कोई लड़ाई नही है।

मै अभी मुम्बई में जहा रहता हूं वहां मेरे रूम मेट हिन्दू है। दो रूम 3 हिन्दू एक मैं।

मैं जब दुबई में था वहाँ 4 हिन्दू मैं एक मुस्लमान, ओमान में हम 3 मुस्लमान और एक हिन्दू। कभी कोई समस्या नही।

आप खुद किसी न किसी मुस्लिम को जानते ही होंगे या दोस्त कभी हुवा करते होंगे या शायद जॉब पर मुस्लिम होंगे। क्या कभी आपको लगा कि नफरत है?

नफरते हमेशा तब महसूस होता है जब शोर किया जाये। शोर कौन करता है, आप अच्छी तरह समझ सकते है। एक नेता दूसरा टीवी या मीडिया किसी भी तरह का।

दोनों हमेशा अपने मतलब की वजह से शोर करते है। मीडिया अपनी trp यानी अपने कारोबार को बढ़ाता है, अपनी पहुच करोडो में पहुचाना चाहता है ताकी बड़ी बड़ी कंपनियां उन्हें अपने सामान को दिखने के लिए ऐड करवाये और नेता अपने प्रोपगंडा को चलने के लिए पत्रकारिता को पैसा देते है और बस मीडिया का शोर यही है उसके अलावा कुछ नही। कभी आप मीडिया को नही देखेंगे कि कोई हॉस्पिटल, इस्कूल, सरकरी दफ्तर, रोड, खाने पीने की चीज़ में मिलावट, ट्रैन की समस्या ऐसे हज़ार समस्या है जो आम जनता से जुड़े है ना के उनके दिमाग से जुड़े है पर फिर भी ये लोग ac में बैठकर पाकिस्तान मुस्लमान हिन्दू करेंगे।

दूसरा, नेता जो ताक़त और बेशुमार दौलत के लिए यानी सत्ता पर आने के लिए किसी भी हद्द तक चले जाते है आप सोच तक नही सकते कि कितना ग़लत कर सकते है। आप खुद सोचे कि एक सच्चा इंसान कभी नेता बन सकता है क्या, और बन भी जाये तो क्या उसकी आवाज़ उसका शोर (जो की समाज के भले के लिए हो) हम तक पहुच पाती है?

तो सत्ता पर बैठा ही जाता है ताक़त और दौलत में डूबने के लिए।

इन नेताओं के पास सब डाटा रहता है कि कौन किसको वोट कर सकता है। ये बताने की ज़रूरत नही के वोट का खेल कैसे खेला जाता है। इसमें कोई शक्क नही के भाजपा सरकर आने के बाद नफरतो का बाजार खूब गर्म हुवा और इसमें तेज़ी होती ही जा रही है।

इसलिए हिन्दू मुस्लमान में नफरत नही है बल्कि नेताओ और मीडिया की आवाज़ों में है।

हमें चाहिए कि इन देश के लूटेरो से सावधान रहे और आपसी भाई चारा बना कर रखे क्योकि इससे सिर्फ नुकसान हमें हो रहा है। हमारे दिमाग पर असर हो रहा है। अपने करियर पर ध्यान ना देकर फेसबुक, यूट्यूब पर लोग लगे पड़े है गाली पढ़ने और देने के लिए। और यही इन शोर का मकसद है। यकीन मानिये आस पास सबकुछ नार्मल है बिलकुल नार्मल।

लेकिन हमारा कर्तब्य है कि जब हम अपने वोट का इस्तेमाल करते है तब कैंडिडेट को देखे ना की पार्टी को।

क्योकि आपके एरिया का देखभाल पार्टी नही बल्कि नेता करता है। अपने आस पास माहौल शांत और मुबब्बत भरा रखने के लिए हमेशा बुरी चीज़ों का बॉयकॉट करे ना की धर्म के नाम पर बुरी चीज़ों का सपोर्ट करे।

आपको शायद मेरी बात समझ आ गयी होगी कि नफरतो का शोर नेताओ और मीडिया की ज़ुबान में है ना की एक आम हिन्दू मुस्लिम में। नफरते ना इंसान में थी ना है और ना कभी होगी।

स्वार्थी लोगो से दूर रहे।

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