Site icon अग्नि आलोक

इंग्लैंड के नये प्रधानमंत्री का नाम नहीं उसकी नीतियों को देखो

Share

 मुनेश त्यागी

        आजकल भारत के मीडिया में और हिंदुत्ववादी सोच के लोगों में सुनक ऋषि का नाम चर्चा में है। सुनक ऋशि इंग्लैंड का प्रधानमंत्री बन गया है। भारत के कुछ लोग उसके प्रधानमंत्री बनने पर फूले नहीं समा रहे हैं। उनका उनको लग रहा है कि जैसे वह भारत का प्रधानमंत्री बन गया है और वह यहां की जनता की सब समस्याओं को दूर कर देगा, सारी परेशानियों को निपटा देगा।

      सुनक ऋशि के बारे में कुछ जानकारी हासिल करते हैं वह अतिधनाड्य परिवार से संबंधित है, अमीरी में पला बढ़ा है। उसने अपनी शिक्षा पर लाखों करोड़ों रुपए की फीसद अदा की है। वह घोर अमीरवादी है। उस पर और उसकी पत्नी पर टैक्स चोरी के आरोप भी लगे हैं। उस पर कई सारे धोखाधड़ी के आरोप भी लगे हैं। उसकी सोच रूढ़िवादी और दक्षिणपंथी है। भारत में सुनकि के समर्थक यह सब देखने सुनने और समझने वाले नहीं हैं। उनके लिए तो वह सिर्फ हिंदू है और उनके लिए और हिंदू होना ही अभिमान का कारण है।

      वह कैसा हिंदू है? हिंदुस्तान की कौन सी भाषा बोलता है?  इन सुनक समर्थकों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। पूरा मीडिया उसकी आर्थिक नीतियों और उसकी सोच को छिपाने की कोशिश कर रहा है। इससे पहले भी कई भारतीय मूल के लोग यूरोप में प्रधानमंत्री बन चुके हैं। ब्रिटेन में उदारीकरण की नीति जारी है और सुनक उन्हीं नीतियों का समर्थक है, उन्हीं नीतियों का पोषक है और वह चंद लोगों को और धनवान बनाने की नीतियों को ही जारी रखेगा।

      वहां की हालत बहुत खराब है, जनता टैक्स देने की स्थिति में नहीं है, उसकी हालत बहुत खराब है, वहां की जनता महंगाई से त्राहि-त्राहि कर रही है। जॉनसन, लिज स्ट्रस और सुनक की सोच में और आर्थिक नीतियों में कोई फर्क नहीं है। जनता को बदहाली से निकालने की कोई नीति उनके पास नहीं है। अब वह वहां पर पढ़ाई लिखाई पर होने वाले खर्च में कमी करेगा। वह धनी लोगों पर टैक्स लगाने को तैयार नहीं है। वह सिर्फ मुनाफा देखता है, जनता का कल्याण नहीं।

      इंग्लैंड में और श्रमिकों का दोहन जारी है। कम तनख्वाह दी जाती हैं, डिग्रियों का कोई महत्व नहीं रह गया है, लोगों से 12 घंटे काम कराया जा रहा है, कम से कम तनख्वाह दी जा रही हैं। वह जनविरोधी और शोषण को बढ़ाने वाली और मुनाफे को बढ़ाने वाली नीतियों का समर्थक है। उसकी पहचान उसके चेहरे से और नाम से नहीं, उसकी नीतियों से कीजिए।

       ऋषि सुनक जनता की तकलीफों को दूर करने के लिए वहां का प्रधानमंत्री नहीं बनाया गया है। उसे वहां इसीलिए नहीं लाया है। वह वहां के पूंजीपतियों को बढ़ाने के लिए काम करेगा, उनका मोहरा बनेगा। उसकी नीतियों में गरीब जनता की समस्याएं रोटी कपड़ा मकान इंधन खाना पानी महंगाई दूर करने की बात नहीं हैं। यह सब उसकी आर्थिक नीतियों में शामिल नहीं है।

      ऋषि सुनक कंजरवेटिव पूंजीपति वर्ग की पार्टी का एक नेता है। वह वहां पर उनकी संपत्तियों को और धनदौलत को बढ़ाने का ही काम करेगा। वह उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की नीतियों का समर्थक है। उन्ही का पालक पोषक है, उन्हीं नीतियों को आगे बढ़ाएगा। वह जनता को कोई राहत देने नहीं जा रहा है।

     यह बेहद अचंभित करने वाली बात है। उसका एजेंडा देखिए। आप सब लोग हैरानी में रह जाएंगे। उसका एजेंडा है कि वह यूक्रेन रूस युद्ध में यूक्रेन का समर्थन करेगा, नोटों की युद्धोन्मादी नीतियों का समर्थन करेगा, चीन की घेराबंदी करेगा और अमेरिका का पिछलग्गू बनकर अमेरिका की हां में हां मिला आएगा और अमेरिका की वैश्विक प्रभुत्व की और वैश्विक शोषण अन्याय और संसाधनों को कब्जाने की नीति का समर्थन करेगा।

      उपरोक्त विवरण से हम कह सकते हैं कि ऋशि सुनक के इंग्लैंड के प्रधानमंत्री बनने से भारत को कोई लाभ नहीं होने जा रहा है। भारत की 100 करोड़ से ज्यादा जनता को वह कोई लाभ नहीं पहुंच आएगा, बल्कि उल्टे वह उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की नीतियों का समर्थन करेगा जिससे भारत की जनता का कोई फायदा नहीं होने वाला है, कोई लाभ या कल्याण होने वाला नहीं है, इसलिए ऋशि सुनक का नाम या शक्ल नहीं, बल्कि उसकी नीतियों को देखो और उसकी नीतियां भारत की जनता के समर्थन में नहीं हैं, भारत के हित में नहीं हैं।

Exit mobile version