अग्नि आलोक

अब हमारा सिक्का नहीं चलता !!!

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गोपाल राठी,पीपरिया

आज़ादी के बाद प्रचलन में रहे एक पैसे के इन पांच सिक्कों में से नीचे के तीन सिक्कों का हमने अपने बचपन मे खूब उपयोग किया है . जबकि ऊपर के दो सिक्के बाज़ार में कभी कभी  नज़र आ आते थे . क्योकि वो बंद नहीं हुए थे । उन दिनों एक पैसे में संतरे की गोली , गोल मिठाई (टॉफी का पुराना नाम ) पानी वाली कुल्फी ,राजगिरा के लड्डू ,गुड़ पट्टी ,गुड्डी के बाल आदि बहुत सी चीजें मिल जाया करती थी . दुकडी (2 पैसे ) तिकड़ी ( 3 पैसे ) पंजी (5 पैसे ) दस्सी ( 10 पैसे ) चवन्नी ( 25 पैसे ) अठन्नी ( 50 पैसे ) उन दिनों चलन में थे । बीस पैसे का सुनहरा सिक्का बाद में जारी हुआ था । एक पैसे का सिक्का तांबे का बनता था जो गोल होता था बाद में यह गिलट आदि अन्य हल्की धातु का बनने लगा इसके आकर में भी बदलाव हुआ । यह पंजी ( 5 पैसे का सिक्का ) के छोटे भाई जैसा लगने लगा । उन्हीं दिनों चवन्नी उछाल पर दिल देने वाला गाना बहुत हिट हुआ था . तब चिल्लर की भी बड़ी कीमत थी , अगर टिकिट खरीदते समय 5 पैसे कम हुए तो टिकिट वाला टिकिट नहीं देता था । हम भी दुकानदार से पैसे पैसे का हिसाब करते थे । अब एक पैसे की क्या हैसियत है ? जिन जिन ने अपने लेनदेन में एक पैसे का इस्तेमाल किया है वे अपने अनुभव ज़रूर बताएं ।

समय आगे बढ़ता गया और चिल्लर पैसे गायब होते गए । पहले एक दो तीन पांच पैसे और दस  बीस  पैसे के सिक्के चलन से बाहर हुए और फिर चवन्नी अठन्नी बंद हो गई । 

यह सब रुपए की कीमत में गिरावट के कारण हुआ । गिरावट लगातार जारी है । रुपए की कीमत कम होती जा रही है । डॉलर से विनिमय की दर 1 डॉलर = 88 रुपए है । डर इस बात का है कि एक रुपए दो रुपए और पांच रुपए के सिक्के और नोट चलन से बाहर न हो जाए ।

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