मीना राजपूत
_हे सभी भक्त जनो ! हिंदुत्व के सिपाहियो!!
मैं पिछले साल की पोस्ट फिर डालकर तुम सभी को याद दिला रही हूँ कि अगर तुम सच्चे हिन्दू हो तो तुम्हें सबसे पहले अपने प्राणों की बाजी लगाकर कैलाश-मानसरोवर को पापी शत्रु-देश चीन के चंगुल से मुक्त कराना कराना चाहिए और 1992 में अगर लाखों की तादाद में अयोध्या पहुँचे थे, तो अब करोड़ों की तादाद में कैलाश की ओर चल देना चाहिए !
मोहन भागवत कहते ही हैं कि संघ सीमा पर शत्रु का मुकाबला करने के लिए सेना से अधिक तैयार है I
मेरा तर्क एकदम साफ़ है ! अगर दम हो तो इसका जवाब दो ! गाली और धमकी देने तो फ़ौरन आ धमकते हो, पर मेरे इस सवाल पर एक साल से चुप्पी साधे हुए हो ! मेरा कहना है कि अयोध्या और मथुरा तो विष्णु के मनुज-रूप अवतार की जन्मभूमि है तुम्हारे ही हिसाब से ! और काशी में शिव का मंदिर है ! लेकिन कैलाश-मानसरोवर पर तो शिव साक्षात् गणेश, कार्तिकेय और पार्वती के साथ रहते हैं !
हिमालय में उधर से ही होकर स्वर्ग का रास्ता भी जाता है ! तो किसी भी सच्चे हिन्दू के लिए तो सबसे पहले कैलाश-मानसरोवर की चीन से मुक्ति का कार्यभार सर्वोपरि है ! अयोध्या में अपनी सफलता के बाद अब तुमलोग मथुरा-काशी की बातें करने लगे हो, लेकिन कैलाश-मानसरोवर के बारे में मुँह से कूँ-चूँ की भी आवाज़ नहीं निकलती !
यही तुमलोगों की वीरता है कि किसी निहत्थे बूढ़े को गोली से उड़ा देते हो, किसी स्त्री बुद्धिजीवी को धोखे से मारकर भाग जाते हो, भीड़ में इकट्ठा होकर किसी एक बूढ़े या बच्चे तक की ह्त्या कर डालते हो, पर जहाँ धर्म के लिए वास्तव में बलिदान की बात हो वहाँ तिलचट्टे की तरह भागकर बिल में दुबक जाते हो !
अगर तुम लिल्ली घोड़े पर सवार टीन की तलवार वाले नौटंकी के योद्धा नहीं हो,अगर तुम मानववेश में गीदड़-लोमड़ नहीं हो, तो तुम्हें कैलाश-मानसरोवर की मुक्ति के लिए चल पड़ना चाहिए !
पर तुम लोग तो ऐसे नकली धर्म-योद्धा हो कि मोदी और मोहन भागवत से यह पूछने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाते कि वे कैलाश-मानसरोवर को मुक्त करने का क्या प्रोग्राम बना रहे हैं !
*पिछले साल की पोस्ट भक्तों की याददिहानी के लिए :*
अरे मूढमति भक्तो !
राम तो विष्णु के मनुज-रूप अवतार थे ! विष्णु तो क्षीरसागर में शेष-शैय्या पर लक्ष्मीजी से पैर दबवाते हुए विश्राम कर रहे हैं ! मनुज-रूप अवतार की जन्म-भूमि के लिए इतना कुफ्फार मचाये हुए हो और कैलाश पर्वत पर शिव साक्षात् पत्नी पार्वती और दो पुत्रों– गणेश और कार्तिकेय के साथ रहते हैं !
सोचो– शिव साक्षात्, उनका कोई मनुज-रूप अवतार नहीं ! और वह कैलाश-मानसरोवर चीन के कब्जे में है ! लानत है तुम्हारे हिन्दुत्व पर, जो साक्षात् शिव के निवास को हिन्दुओं के कब्जे में लेने के लिए कुछ भी नहीं कर रहे हो ! धर्म-रक्षा की बात करते हो और प्राणों की परवाह करते हो ! छिः! कितनी घृणास्पद बात है! सच्चे हिन्दू होते तो बिना हार-जीत की और मृत्यु की चिंता किये कैलाश पर्वत की मुक्ति के लिए उत्तर की ओर प्रस्थान कर देते! पर तुमलोग इतने कायर हो कि यह नहीं करोगे!
और सोचो कि शिव का निवास जिस चीन ने कब्जिया रखा है, उसी देश के राष्ट्रपति शी जिन-पिंग का मोदी पलक-पांवड़े बिछाकर दो-दो बार स्वागत कर चुके हैं! ऐसे धर्मद्रोही के तुम भक्त बने फिरते हो! लानत है! सीधे नरक में जाओगे और 1.तामिस्त्र, 2.अंधमिस्त्र, 3.रौरव, 4, महारौरव, 5.कुम्भीपाक, 6.कालसूत्र, 7.असिपवन, 8.शूकरमुख, 9.अंधकूप, 10.मिभोजन, 11.संदेश, 12.तप्तसूर्मि, 13.वज्रकंटकशल्मली, 14.वैतरणी, 15.पुयोद, 16.प्राणारोध, 17.विशसन, 18.लालभक्ष, 19.सारमेयादन, 20.अवीचि, 21.अय:पान, 22.क्षरकर्दम, 23.रक्षोगणभोजन, 24.शूलप्रोत, 25.दंदशूक, 26.अवनिरोधन, 27.पर्यावर्तन और 28.सूचीमुख — कुल 28 तरह के नरकों में लाखों वर्षों तक अकथनीय यंत्रणाएं भुगतोगे!

