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ओलंपिक: आस भई निराशा…!!

Mandatory Credit: Photo by Aflo/Shutterstock (10346040b) The Olympic Rings adorn an event square which opens at Tokyo's Nihonbashi to mark just one year to the start of the 2020 Tokyo Olympics and Paralympics. Tokyo Olympic Games One Year to Go, Japan - 24 Jul 2019

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राकेश श्रीवास्तव लखनऊ

मंगलवार 3 अगस्त का दिन कुछ ऐसा ही रहा। टोक्यो ओलिंपिक का 12वां दिन भारत के लिए कोई अच्छी खबर लेकर नही आया। राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त को आज उनकी जयंती पर याद करते हुए उनकी कविता “नर हो न निराश करो मन को” की कुछ पंक्तियां अपने खिलाड़ियों को इस विश्वास के साथ समर्पित कर रहा हूं कि देशवासियों की भावनाएं और प्रार्थनाएं उन तक पहुंचेंगी। 

“करके विधि वाद न खेद करो

निज लक्ष्य निरन्तर भेद करो

बनता बस उद्‌यम ही विधि है

मिलती जिससे सुख की निधि है

समझो धिक् निष्क्रिय जीवन को

नर हो, न निराश करो मन को

कुछ काम करो, कुछ काम करो

।” सबसे पहले जैवलिन थ्रो मे महिला एथलीट अनुरानी फाइनल में जगह बनाने मे सफल नहीं हो पाईं।अनु रानी 54.04 मीटर के प्रदर्शन के साथ 14वें स्थान पर रहीं।अनु का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन इस साल फेडरेशन कप में किया गया 63.24 मीटर का है।यह दोहराने पर वह 63 मीटर के स्वत: क्वालीफिकेशन से फाइनल मे पहुंच सकती थीं।पर परिणाम अगर मगर से नहीं तय होते हैं।आज वह अपने सर्वश्रेष्ठ से नौ मीटर पीछे रहीं। 
भारत की 19 वर्षीया महिला पहलवान सोनम मलिक 62 किग्रा महिला फ्रीस्टाइल वर्ग में मंगोलिया की बोलोरतुया से बहुत ही रोमांचक मुकाबले मे हार गईं।यह दिखाता है कि बड़े मैचों मे खिलाड़ी किस दबाव से गुजरते हैं।सोनम ने पहले पीरियड की समाप्ति तक 1-0 की लीड ले रखी थी।दूसरे पीरियड में भी सोनम ने एक अकं हासिल कर 2-0 की लीड बना ली।परंतु अंतिम साठ सेकेंड से भी कम समय मे मुकाबला पलट गया और बोलोरतुया ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करके जीत हासिल कर ली। यही दबाव आज हाकी सेमीफाइनल मे देखने को मिला। भारत 1972 मे म्यूनिख ओलिंपिक के बाद पहली बार सेमीफाइनल में पहुंचा था।1980 मे मास्को ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीता था लेकिन वहां मैच राउंड रोबिन आधार पर खेले गए थे।पूरे देश की आशाओं के बीच टीम ने बेहतरीन शुरुआत करते हुए हरमनप्रीत सिंह (सातवें मिनट) और मनदीप सिंह (आठवें मिनट) के गोल की मदद से 2-0 की बढ़त बना ली। दूसरे क्वार्टर मे अलेक्सांद्र हेंड्रिक्स ने अन्तर  2-1 कर दिया। भारत की बढत अंतिम 12 मिनट तक बनी रही है।पर बेल्जियम ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए ताबड़तोड़ पेनाल्टी कार्नर अर्जित किए और 5-2से विजय प्राप्त करते हुए सेमीफाइनल मे प्रवेश किया।यह भारतीय टीम का पिछले कुछ वर्षों मे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है। 
हम हारे हैं पर निराश नहीं टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह और स्टार गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने कहा कि टीम के पास इस दिल तोड़ने वाली हार के बारे में सोचने का समय नहीं है क्योंकि उन्हें गुरुवार को होने वाले कांस्य पदक के प्ले ऑफ मुकाबले पर ध्यान लगाना होगा।इसके लिए टीम ने कठिन परिश्रम किया है।भारत के कप्तान मनप्रीत सिंह ने कहा “इस स्तर पर पहुंचने के लिए हमने बेहद कड़ी मेहनत की है।हम बेहतर नतीजे के हकदार थे और दुर्भाग्य से आज हम इसे हासिल नहीं कर पाए।’हाकी टीम के इस स्तर पर पहुंचने मे उडीसा के यशस्वी मुख्यमंत्री नवीन पटनायक का महत्वपूर्ण योगदान है।हाकी टीम के पूर्व स्पांसर सहारा ग्रुप के परेशानियों मे पडने के बाद जब कोई यह जिम्मेदारी वहन करने के लिए तैयार नही था तब बहुमुखी प्रतिभा के धनी बीजू पटनायक के पुत्र नवीन बाबू आगे आये और ओडिशा भारतीय हाकी पुरुष और महिला दोनों की स्पांसर बन गया।कल भारतीय महिला टीम का सेमीफाइनल मे मुकाबला है।उम्मीद है कि दोनों टीमें भारत की झोली मे पदक डालने मे सफल होंगी। शाम को शाट पुट मे टी. एस. तूर 19.99 मीटर तक ही गोला फेंक सके और फाइनल मे स्थान नहीं बना सके। कल का दिन अच्छा होना चाहिए।लवलीना सेमीफाइनल में तुर्की की मौजूदा विश्व चैंपियन बुसेनाज सुरमेनेली से भिड़ेंगी।लवलीना इस मुकाबले को जीतकर फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय मुक्केबाज बन कर इतिहास रच सकती हैं।वह एक पदक सुरक्षित कर चुकी हैं। साथ ही महिला हाकी टीम से भी पदक की आशायें हैं। कल नीरज चोपड़ा से भाला फेंक, कुश्ती मे डी. पूनिया और महिला गोल्फ मे ए. अशोक भी अपनी दावेदारी पेश करेंगे।

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