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मौनी अमावस्या की शाम इन जगहों पर जरूर जलाएं दीपक, बनी रहेगी पितरों की कृपा!

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आज माघ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है. ये तिथि बड़ी ही पावन और विशेष मानी जाती है. माघ माह की ये अमावस्या मौनी अमावस्या के नाम से जाती है. इस दिन गंगा और संगम का जल अमृत के समान हो जाता और इसमें डुबकी लागने वालों को मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है. यही कारण है कि आज प्रयागराज के माघ मेले में सबसे बड़ा स्नान किया जा रहा है. वहां गंगा और संगम के तटों पर श्रद्धालुओं और साधु संतों की भारी भीड़ उमड़ी हुई है.

मौनी अमावस्या पर स्नान-दान, पूजा-पाठ और मौन व्रत रखने की पंंरपरा सदियों से चली आ रही है. इस दिन साधु संंत मौन साधना करते हैं. इस दिन किया गया स्नान-दान, पूजा-पाठ और व्रत अक्षय पुण्य देता है. अमावस्या पितरों को समर्पित तिथि है, इसलिए इस दिन पितरों का तर्पण और पिंडदान भी किया जाता है. साथ ही शाम के समय कुछ विशेष जगहों पर दीपक जलाए जाते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से पितरों की कृपा मिलती है.

मौनी अमावस्या की शाम इन जगहों पर जलाएं दीपक

पीपल के वृक्ष के नीचे

माना जाता है कि पीपल के वृक्ष पर देवताओं का वास होता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन पितरों का वास भी पीपल के वृक्ष पर होता है. ऐसे में मौनी अमावस्या की शाम पीपल के वृक्ष के नीचे एक दीपक अवश्य जलाएं. मान्यता है कि इससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और संकट कट जाते हैं.

दक्षिण दिशा में

अमावस्या के दिन दक्षिण दिशा से पितृ धरती लोक पर आते हैं. ये दिशा मृत्यु के देवता यमराज और पितरों की मानी जाती है, इसलिए मौनी अमावस्या के दिन शाम के समय दक्षिण दिशा की ओर एक दीपक जरूर जलाएं. इससे पिृत जब अपने लोक में वापस लौटते हैं, तो उनके मार्ग में रौशनी रहती है. इससे प्रसन्न होकर पितृ सदा अपनी कृपा अपने परिवार पर बनाए रखते हैं.

तुलसी के नीचे

हिंदू धर्म में तुलसी को माता मानकर उनकी पूजा की जाती है. मौनी अमावस्या की शाम को एक दीपक तुलसी के पास भी जलाएं. इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है. साथ ही बुरा समय टल जाता है.

किचन में

घर का किचन बहुत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है. कहते हैं कि किचन मां अन्नपूर्णा का स्थान है, लेकिन किचन में जहां पानी रखा जाता है वो स्थान पितरों का बताया गया है, इसलिए मौनी अमावस्या के दिन शाम को यहां भी एक दीपक अवश्य जलाएं

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