दिनेश मिश्र/वरुण शैलेश
महाभारत काल में पांडवों का द्रौपदी को दांव पर लगाकर उसे हारने की कहानी नई तो नहीं है, मगर आज के दौर में एक महिला को जुए की ऐसी लत लगी कि वह दांव में खुद को ही हार बैठी।
मामला हाल ही में उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ का है, जिसे जानकर सब हैरान रह गए। महिला अपने मकान मालिक से जुए में हार गई। जयपुर में काम कर रहे पति ने इस बारे में पुलिस को शिकायत दी तो गैंबलिंग की यह कहानी दुनिया के सामने आई। वहीं, बीते गुरुवार को ही कंबोडिया के एक कैसिनो में भीषण आग लग गई थी, जिसमें कम से कम 25 लोगों की जान चली गई और 70 से ज्यादा लोग आग में बुरी तरह झुलस गए। 24 घंटे से ज्यादा चले रेस्क्यू ऑपरेशन में 700 से ज्यादा लोगों को बचाया गया।
जेम्स बॉन्ड की फिल्म ‘कैसिनो रॉयल’ या ‘रेस-2’ जैसी ही कोई फिल्म आपने जरूर देखी हाेगी, जिसमें अक्सर जुआ खेलते हुए विलेन या हीरो के पीछे हीरोइन नजर आती है। मगर, हालात अब बदल चुके हैं।
दुनियाभर के ऑनलाइन कैसिनो और गैंबलिंग में अब महिलाओं का ही सिक्का चल रहा है और 2022 का अंतिम दिन है। एक ट्रेंड यह देखने को मिला है कि लोग किस्मत बदलने के लिए लोग गैंबलिंग में हाथ भी आजमाते हैं।
महिलाओं का दबदबा ऐसा बढ़ा है कि दुनिया के कई कैसिनो तो सिर्फ वुमन गैंबलर्स को टार्गेट करके जुआ खेलने के ऑफर दे रहे हैं। वे खुद को जेंडर न्यूट्रल बताते हैं।
ऑनलाइन गैंबलिंग की दुनिया में महिलाएं पुरुषों की ही तरह बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। हम यह बात इसलिए कर रहे हैं कि साल की आखिरी रात लॉस वेगास से लेकर गोवा तक के कैसिनो और ऑनलाइन दुनिया में सबसे बड़ी गैंबलिंग होती है। लेकिन, यह जुआ लोगों की जिंदगी नर्क भी बना रहा है। रिश्ते बिगाड़ रहा है। यहां तक कि कई स्टडी में इसे गैंबलिंग को सेक्स जैसा एडिक्शन भी बताया गया है।
ऑनलाइन गैंबलिंग में बाजी लगाने में पुरुषों से पीछे नहीं महिलाएं
गैंबलिंग कमीशन डेटा 2020 के मुताबिक, दुनिया भर में 45 फीसदी पुरुष और 40 फीसदी महिलाओं ने किसी न किसी रूप में ऑनलाइन जुआ खेला है, जो बड़ी संख्या है।
ब्रिटिश गैंबलिंग कमीशन के मुताबिक, हाल के बरसों में करीब 42 फीसदी महिलाओं ने माना कि वे गैंबलिंग और उसी तरह की गतिविधियों में हिस्सा लेती रही हैं।
आपको ये बता दें कि पूरी दुनिया में इस वक्त 2000 से ज्यादा ऑनलाइन कैसिनो चल रहे हैं। इस ग्रैफिक में देखें कि गैंबलिंग की दुनिया में किस तरह महिलाओं ने महारत हासिल की।
भारत में बढ़ रहा ऑनलाइन गैंबलिंग का चस्का, महिलाएं बनीं गैंबलर
ऑनलाइन गैंबलिंग के मामले में भारत दुनिया में सबसे बड़ा और तेजी से उभरने वाला मार्केट है। 2018 में जहां ऑनलाइन गैंबलिंग में भारतीयों ने 1077 करोड़ रुपए खर्च कर दिए थे, वहीं, यह 2021 में यह बढ़कर 8,290 करोड़ रुपए के पार हो गया।
इसमें हर साल 20 फीसदी की दर से इजाफा हो रहा है। इसमें और भी तेजी आने की उम्मीद लगाई जा रही है। क्योंकि भारत में कुल इंटरनेट यूजर्स 65.8 करोड़ हैं।
सबसे ज्यादा इंटरनेट इस्तेमाल करने के मामले में चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरे नंबर का देश है। भारत में ऑनलाइन गैंबलिंग करने वाली महिलाओं का वैसे तो कोई सटीक आंकड़ा नहीं है, मगर अनुमान है कि करीब 2.5 करोड़ भारतीय महिलाएं ऑनलाइन गैंबलिंग कर रही हैं।
यह पूरी ऑनलाइन और ऑफलाइन इंडियन गैंबलिंग इंडस्ट्री का 3 फीसदी से ज्यादा है, जो बताता है कि भारत में भी महिलाओं की दिलचस्पी ऑनलाइन गैंबलिंग में बढ़ रही है।
भारत में गैंबलिंग स्टेट का सब्जेक्ट, गोवा, दमन और सिक्किम में लीगल
सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट अनिल सिंह श्रीनेत बताते हैं कि भारत में जुआ और सट़टेबाजी के संबंध में सार्वजनिक कानून है। सार्वजनिक जुआ अधिनियम 1867, इसके तहत भारत में जुआ और सट़टेबाजी पर पाबंदी है। संविधान में गैंबलिंग को स्टेट लिस्ट में रखा गया है, यानी कोई भी स्टेट इसके लिए अपना कानून बना सकता है।
सार्वजनिक जुआ अधिनियम में भी यह प्रावधान है कि राज्य चाहें तो यह कानून मानें या फिर इसमें संशोधन करके अपने यहां इसे लीगलाइज कर सकते हैं। इसी के तहत गोवा, दमन और सिक्किम ने अपने यहां जुआ और सट़टेबाजी को लीगलाइज कर रखा है।
सुप्रीम कोर्ट ने बताया था कौशल और मौके में अंतर
सुप्रीम कोर्ट में यह मामला आया था, जिसमें हाॅर्स रेसिंग से जुड़ा आरके लक्ष्मण बनाम तमिलनाडु के मामले में एक अहम फैसला दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जहां कौशल दिखाने की बात है, उसे जुआ या सट्टेबाजी नहीं कह सकते।
इसी तरह ताश और घुड़सवारी कौशल की बात है। जहां मौके की बात होगी, वहां पर यह बैन माना जाएगा। अगर कोई घर में जुआ चलाता है तो उसके लिए 200 रुपए जुर्माना या तीन महीने की सजा और अगर कोई जुआघर में खेलने जाता है तो उस पर 100 रुपए फाइन या एक महीने की कैद हो सकती है।
जहां तक मौके की बात है, उस पर अभी तक भारत में कोई स्पेशफिक कानून नहीं है। सरकार इसका मसौदा तैयार कर रही है। साइबर कानून की धारा 67 में कहा गया है कि अगर किसी डिवाइस से ऑनलाइन अगर कुछ ऐसा किया जाता है, जिससे लोग गलत काम में लगते हैं या प्रेरित होते हैं तो उस पर बैन लगाया जा सकता है।
कुल मिलाकर यह है कि अभी तक जुए या सट्टेबाजी पर बाकायदा कोई कानून नहीं है। लॉटरी अधिनियम, 1998 के तहत कई स्टेट ने लॉटरी पर बैन लगाया है या उसे जारी रखा है।
महिलाएं ज्यादा जुआ क्यों खेल रही हैं?
ब्रिटेन की एक स्टडी के अनुसार, जुआ खेलने वाली 32 फीसदी महिलाओं में ज्यादातर की उम्र 35 से 54 साल के बीच की है। उम्रदराज और युवा महिलाएं भी जुआ खेल रही हैं, मगर उनकी जुआ खेलने की दर थोड़ी कम है।
UKGC के अध्ययन के अनुसार, ज्यादातर पुरुष शौकिया जुआ खेलते हैं, जबकि महिलाओं ने दावा किया है कि वे जीतने के लिए जुआ खेलती हैं। स्टडी के अनुसार, नुकसान की भरपाई, दुख, अवसाद से जूझने के चलते ज्यादातर महिलाएं जुआ खेलने लग जाती हैं।
एक और हकीकत यह भी है कि स्मार्टफोन्स और टैबलेट्स ने महिलाओं की ऑनलाइन गैंबलिंग में दिलचस्पी बढ़ा दी है। उन्हें किसी कैसिनो जाने की जरूरत नहीं है। घर बैठे खाली वक्त में वो अपनी किस्मत आजमा रही हैं।
महिलाओं को टार्गेट करके बन रहे ऑनलाइन बेटिंग गेम्स
कई ऑनलाइन कैसिनो और स्पोर्ट्सबुक प्लेटफॉर्म चल रहे हैं, जो महिलाओं को फोकस करके ही ऑनलाइन बेटिंग गेम्स बना रहे हैं।
एक दशक पहले तक महिलाएं ज्यादातर ऑनलाइन बिंगो और पोकर ही खेला करती थीं। मगर, आज महिलाएं स्लॉट्स, स्लॉट्स मशीन और टेबल गेम्स में बाजी मार रही हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद कई गैंबलिंग साइट्स की बाढ़ और विज्ञापन की बदलती रणनीति ने बाजी लगाने में महिलाओं की दिलचस्पी बढ़ा दी है।
एक वजह और भी है कि घर में बैठकर महिलाओं को बाजी लगाने में सहूलियत होती है, जिसका ऑनलाइन कैसिनो ने फायदा उठाया है। कोरोना काल के दौरान महिलाओं ने अपनी किस्मत ज्यादा आजमाई है। ये उनके लिए स्ट्रेस बस्टर भी साबित हुआ है।
पुरुषों से ज्यादा जुए में पैसे लगा रही हैं महिलाएं
ऑप्टीमूव डॉटकॉम पर 2017 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में ऑनलाइन गैंबलिंग के दौरान पुरुष औसतन 4800 रुपए की बाजी लगाते हैं तो वहीं महिलाएं औसतन 3500 रुपए का दांव लगा रही हैं।
हालांकि, सालाना बाजी लगाने में महिलाएं आगे हैं। साल भर में पुरुष जहां तकरीबन 19 बार बाजी लगाते हैं, वहीं, महिलाएं 32 बार दांव लगाती हैं। यानी वे सालभर में ज्यादा पैसे दांव पर लगाती हैं।
यही नहीं, गैंबलिंग की दुनिया में पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ज्यादा लॉयल कस्टमर मानी जाती हैं। वे ज्यादा देर तक किसी कैसिनो से जुड़ी रहती हैं।

