सुसंस्कृति परिहार
जय हो अमरिंदर साहिब की जिन्होंने खुद बा खुद राज्यपाल महोदय को इस्तीफा देकर एक नये मुख्यमंत्री का दरवाज़ा बिना ना नुकर के खोल दिया।राजसी गरिमा में आसन्न डूबे पटियाला के वैभव का अमरिंदर के जाने के बाद अंत हो गया ।गहरी कशमकश के बीच जो नया रास्ता बना उसकी चारों ओर सराहना की जा रही है।महाराजा ज्योतिरादित्य सिंधिया भी लगभग यही रौब और रुतबा कांग्रेस पर रखना चाहते थे अच्छा हुआ उनके महाराजा का अंत भाजपा में हो गया।पदों की चाहत के साथ ही चुने हुए ये लोग महाराजाओं जैसे अहंकार को तिलांजलि नहीं दे पाए।यही वजह रही कि जनता ने लोकसभा चुनाव में महाराजा साहिब को धूल चटा दी।उनकी पदलोलुपता की आड़ में भाजपा ने उन्हें राज्यसभा भेजकर काफी दिन तरसाकर केंद्र में मंत्री बनाया ।ये उपहार था दल-बदल करवाकर मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार गिराकर भाजपा सरकार कायम करवाने का था।जनता की नज़रों में यही हाल अमरिंदर साहब का हो चुका है। जबकि अमरिंदर की बात कांग्रेस ने मान ली है नवजोत को मुख्यमंत्री नहीं बनाया । चाहें तो कांग्रेस में रह सकते हैं।

बहरहाल पंजाब में पहली बार दलित समाज के चरणजीत सिंह जी चन्नी के मुख्यमंत्री बनने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के होश उड़े हुए हैं।बसपा की बहिन जी ने तो कटाक्ष ही कर दिया कि सिर्फ चुनाव के लिए ही वे मुख्यमंत्री हैं।आम आदमी पार्टी भी जो कह रही है उससे अधिक कांग्रेस ने कर दिखाया है। ज्ञात हो इससे पहले महाराष्ट्र में सुशील कुमार शिंदे को भी कांग्रेस मुख्यमंत्री बना चुकी है जिसका ज़िक्र उस वक्त कम हुआ।आज सबसे बड़ी बात यह है दलित समाज जागृत हुआ है । उसके साथ यूं तो सभी सरकारों और सवर्ण समाज का व्यवहार उस तरह का नहीं है जिस तरह का व्यवहार अपेक्षित है।यही वजह कि जब आदित्यनाथ अपने भाषण में दलितों को नींव का पत्थर बताते हैं तो उसकी कटु आलोचना होती है वे अब दबे नहीं है ऊपर आ चुके हैं अब नींव का पत्थर बनने की सवर्णों की बारी है।इस तरह के विचार अनुचित है सबको बराबरी से जीने का अधिकार है। दलितों की वोट से राज करने वाले अब सावधान हो जाएं । कांग्रेस ने सोने वालों को जगा दिया है । चरणजीत सिंह चन्नी जी की चमक से देश भर के दलितों में खुशी देखी गई है।
जब सिर पर चुनाव हों और पंजाब में दमदार दलित की ताजपोशी की गई । इसका एक दूसरा पहलू यह भी है कि कांग्रेस ने बहुत हिम्मत से यह निर्णय लिया है।देर से ही सही लेकिन इसका प्रतिफल उत्तर प्रदेश में देखने को मिलेगा। जहां दलितों पर अत्याचार चरम पर हैं और दलितों के साथ उच्चजातियां और वर्तमान सरकार जो व्यवहार कर रही है वह सारी दुनिया की निगाहों में है ।इसका फायदा कांग्रेस को भरपूर मिल सकने की उम्मीद है।इसका संदेश सुदूर भारत में परिवर्तन की लहर चला सकता है। दलितों से नफ़रत फैलाने वाली भाजपा इसकी भरपाई हरगिज़ नहीं कर पायेगी। उन्होंने दलित समाज का राष्ट्रपति बनाकर इस वर्ग को ख़ुश करने की कोशिश ज़रूर की थी किंतु राष्ट्रपति ने अपने आचरण और व्यवहार में कभी दलितों के प्रति सहानुभूति और स्नेह प्रदर्शित नहीं किया।दो शब्द सरकार की तरह सांत्वना के दलितों के लिए भी नहीं निकले।उनका ऐसा, समाज का प्रतिनिधित्व किस काम का?आज ज़रूरत इस बात की है कि पंजाब में चन्नी जी दलित समाज के हितार्थ ऐसे महत्वपूर्ण और ज़रूरी काम करने में सक्रियता से काम करें जिससे दलित चेतना में इज़ाफ़ा हो। क्योंकि बिना चेतना के अधिकारों की समझ पैदा नहीं होती और जब तक आप अपने अधिकार नहीं समझते तब तक अपने को मज़बूती से मुख्य धारा में नहीं जोड़ सकते । ख़ुशी की बात है चन्नी जी ने किसानों के हित में पहली बैठक में महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं।कम समय है लेकिन जैसे एक दिन के शासन में भिश्ती ने अपने सिक्के चला लिए थे ठीक वैसे ही अपने तज़ुर्बे से चन्नी जी पंजाब में अपना सिक्का जमा लेंगे।
यहां इस बात का उल्लेख भी ज़रुरी है कि कतिपय लोग उन्हें अल्प समय का मुख्यमंत्री और कांग्रेस की अवसरवादिता कहकर इस बात की गारंटी मांग रहे है कि अगले पांच वर्ष वहीं मुख्यमंत्री होंगे।यह बेतुकी बातें हैं चुनाव और चुनाव बाद की स्थिति के बाद ही मुख्यमंत्री चयन होता है।जनता का चन्नी जी को भरपूर समर्थन मिलेगा इस बात में कोई शक नहीं है। लेकिन इस तरह की बातें बेमानी है और दिल की कराहों जैसी हैं।अभी तो शुरुआत है आगे आगे देखिए जोश में आई कांग्रेस और कौन कौन से महत्वपूर्ण फैसले लेती है।क्योंकि भाजपा के बाद कांग्रेस पार्टी ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसकी बुनियाद आज भी देश के हर गांव में मौजूद है।
देश को दलित,अल्पसंख्यक विरोधी, संविधान विरोधी,देश की सम्पदा बेचने वाली,नकली राष्ट्र वादी पार्टी से निजात दिलाने कुछ तो तय करना ही होगा।किसी पर यकीन तो करना ही होगा।दलित मुख्यमंत्री की आभा के साथ सबका साथ सबका विकास करना हमारा लक्ष्य होना चाहिए।