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ऑक्सफैम की रिपोर्ट:4 साल में दुनिया भर में 5 अरब गरीब बढ़े

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ऑक्सफैम ने एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार सारी दुनिया के देशों में आर्थिक असमानता बढ़ती चली जा रही है। पिछले 4 वर्षों में कोरोना, महंगाई और युद्ध के कारण 2020 के बाद से गरीबों की संख्या बढ़ना तेजी के साथ शुरू हुई है। दुनिया भर के अ‎धिकांश देशों के पांच अरब लोग पहले की तुलना में और गरीब हो गए हैं। इसी रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के 5 सबसे बड़े धनी लोगों की दौलत 869 अरब डॉलर बढ़ गई है।
विकसित देशों में नव धन्याड़्यो की संख्या बड़ी तेजी के साथ ‎पिछले 4 वर्षों में बढ़ी है। विकसित देशों में गरीबों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिन लोगों की संपत्ति बड़ी तेजी के साथ बढ़ी है। वह सभी अंतरराष्ट्रीय बाजार में खरीदने और बेचने के कारोबार में सबसे आगे हैं। गरीबों एवं मध्यम वर्ग की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। महंगाई लगातार बढ़ती चली जा रही है। पिछले 20 वर्षों में लोगों की जो नई ज़रूरतें बनी हैं। वह भी अब पूरी नहीं हो पा रही हैं। बचत खत्म हो गई है, कर्ज लेकर लोगों को अपने परिवार का भरण पोषण करना पड़ रहा है। विकासशील देशों में पूंजीवाद का महत्व बढ़ गया है। लगातार टैक्स बढ़ाये जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाजार ब्रांड पर आधारित हो गया है। ब्रांड के आधार पर चीजों का खरीदना और बिकना एक स्टैंडर्ड बन गया है। जिसके कारण मुनाफाखोरी बड़ी तेजी के साथ सारी दुनिया के देशों में बढ़ी है। सोशल मीडिया के प्लेटफार्म ने सारी दुनिया के देशों में खाने-पीने, रहन-सहन, फैशन, बाजार सोच के बारे में जो प्रतिस्पर्धा पैदा की है, उससे लोग आर्थिक संकट में फंसते चले जा रहे हैं। युद्ध और महामारी का आम जन पर जो प्रभाव पड़ रहा है। गरीब और भी गरीब होता चला जा रहा है। इस समय सारी दुनिया के देश, तकनीकी और बाजारवाद से प्रभावित हैं। बाजार मं ब्रांडेड वस्तुओं की खरीदी करने और उपभोग करने की आदत को बढ़ा दिया है। कर्ज लेकर गरीब एवं मध्यम वर्ग ऐसी वस्तुएं खरीद रहे हैं, जिसकी उन्हें अपने जीवन में कोई विशेष जरूरत नहीं होती है।
बाजारबाद ने उपभोक्ताओं के बीच एक नई संस्कृति पैदा की है, जिसके कारण तकनीकी और बाजारवाद का शिकार उपभोक्ता, गरीबी और कर्ज का शिकार होता चला जा रहा है। मानवीय संवेदनाएं खत्म होती जा रही हैं। बाजारवाद के कारण भूख, स्वास्थ्य, शिक्षा, बेरोजगारी की समस्या लगातार बढ़ रही है। दुनिया के किसी भी देश में इस समस्या का ठोस समाधान नहीं निकला है। सरकारें भी निष्ठुर होती जा रही हैं। दु‎नियाभर की सरकारों के खर्च बड़ी तेजी के साथ बढे हैं। बाजारवाद के कारण सरकारों की आय भी बढ़ी है। सोशल मीडिया के प्लेटफार्म ने लोगों को एकाकी बना दिया है। मानव संवेदनशीलता और सामाजिक समीकरण कमजोर पड़ गए हैं। अब केवल पैसे कमाना और अपने ऊपर खर्च करना लोगों की आदत और मनोवृति में शामिल होता जा रहा है। सामाजिक और पारिवारिक रिश्ते भी इस पूंजीवादी व्यवस्था में खत्म होते जा रहे जा रहे हैं। समस्या यह नहीं है कि अमीर क्यों अमीर हो रहे हैं। अमीरों की संख्या बढ़ाना अच्छी बात है। गरीबों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो, यह भी बहुत जरूरी है। वैश्विक व्यापार संधि के बाद से सारी दुनिया के देशों में बाजारवाद और उपभोक्ता मान‎सिकता में जो बदलाव आए हैं। उसके कारण दुनिया के देशों में अशिक्षा, भुखमरी और स्वास्थ्य को लेकर स्थिति दिनों दिन खराब होती चली जा रही है। पिछले 20 वर्षों में कर्ज के कारण सारी दुनिया की अर्थव्यवस्था में जो बड़े परिवर्तन आए थे। कर्ज और ब्याज की ‎स्थिति शीर्ष अवस्था में पहुंच जाने के बाद अब उल्टी गिनती शुरू हो गई है। कर्ज के बोझ से लदे नागरिक, केंद्र एवं राज्य सरकारें और स्थानीय संस्थाएं अपने खर्चों को पूरा नहीं कर पा रही हैं। नागरिकों पर उच्चतम स्तर के टैक्स लगा दिए गए हैं। हर सेवा का शुल्क वसूल किया जा रहा है। गरीबों के कारण अब आम नागरिक टैक्स और शुल्क भी नहीं चुका पा रहे हैं। उन्हें जीवन जीने के ‎लिये पोषण आहार भी नहीं मिल पा रहा है। महंगी शिक्षा का खर्च भी मध्यम एवं गरीब वर्ग नहीं उठा पा रहे हैं। चिकित्सा सुविधा भी लगातार महंगी होती चली जा रही हैं। सार्वजनिक परिवहन भी लगातार महंगा होता जा रहा है। खाने-पीने की चीजें महंगी हो रही हैं। दुनिया की 5 अरब आबादी को पोषण आहार उपलब्ध नहीं है। यह स्थिति दुनिया के सभी देशों के लिए चिंताजनक है। जल्द ही इसका हल नहीं निकला गया, तो सारी दुनिया में भूख के कारण 500 अरब लोग सड़कों पर आ सकते हैं। इसके नजारे कई देशों में दिखना शुरू भी हो गए हैं। विश्व में गरीबों की संख्या सबसे ज्यादा है। जब इन गरीबों के पास खर्च करने के लिए पैसे नहीं होंगे। जब गरीब समुदाय अपना और प‎रिवार का पेट भर पाने की स्थिति में होगा। तभी तक अमीर आदमी दुनिया के देशों में सुरक्षित रहेंगे। अन्यथा 1917 की जार क्रांति जैसी क्रांति दुनिया के देशों में देखने को मिल सकती है। गरीब आदमी अपना जीवन बचाए रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। इस तथ्य को ध्यान में रखा जाना चा‎हिए।

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