निर्मल कुमार शर्मा
ऑक्सफैम का पूरा नाम आक्सफोर्ड कमिटी फॉर फेमाइन रिलीफ या Oxford Committee for Famine Reliefहै। यह मूल रूप से ब्रिटेन स्थित प्रसिद्ध ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शहर ऑक्सफोर्ड में अकाल राहत के लिए ऑक्सफोर्ड कमेटी के रूप में स्थापित,दुनिया भर में गरीबी और संबंधित अन्याय के समाधान खोजने के लिए काम करने वाले संगठनों का एक अंतरराष्ट्रीय संघ है। यह हर साल जनवरी के तीसरे सप्ताह में अपनी रिपोर्ट जारी करता है,यह वही वक्त है जब दुनिया भर के अमीर और विकासशील देशों के राष्ट्राध्यक्षों और उन्हीं देशों के पूँजीपतियों का जमावड़ा स्विट्जरलैंड के दावोस शहर में जनवरी के तीसरे सप्ताह में एक विशाल वैश्विक सभा का आयोजन करता है,इसमें ये सभी मिलजुलकर भविष्य के लिए आर्थिक रणनीतियाँ बनाते हैं।

लेकिन वास्तविकता यही है कि आनेवाले हर सालों में भारत सहित दुनियाभर के पूँजीवादी देशों में गरीब लोगों की गरीबी,भूखमरी, बेरोजगारी,अशिक्षा,कुपोषण,आवास आदि की समस्याएं और भी विकराल रूप धारण करतीं जातीं हैं ! दूसरी तरफ अमीरों की संख्या और बेशुमार दौलत में अकूत इजाफा होता जाता है, उदाहरणार्थ भारत में केवल पिछले एक साल में अरबपति पूँजीपतियों की संख्या मुनाफाखोरी और खरबों रूपये कर्ज लेकर सरकारों से मिलजुलकर उसे डकार जाने से भारत में अरबपतियों की संख्या में बेतहाशा बढोत्तरी हुई है ! 2021 से पहले जहाँ भारत में केवल 102 अरबपति थे वहीं 2021में उनकी आमदनी में 300 खरब रूपयों की बढ़ोतरी हो गई ! इसके अलावा 40 और नये अरबपति बनकर उनकी संख्या 142 हो गई है ! मतलब पिछले साल के कोरोना के वीभत्स काल में भी अरबपतियों की संख्या में दिन-दूनी-रात-चौगुनी की तेज रफ्तार से बढ़ोत्तरी हुई है,लेकिन दूसरी तरफ पिछले साल के कोरोना के भयावह दौर में भारत के 84 प्रतिशत परिवार भूखमरी के कगार पर खड़े होकर गरीबी के नरक में धंस गये ! भारत के केवल 9 अमीरों के पास भारत की 50 प्रतिशत आबादी के बराबर धन इकट्ठा है ! भारत सरकार के ही आँकड़ों के अनुसार 2017 में प्रति 10189 लोगों पर सिर्फ 1डॉक्टर है ! प्रति 90343 लोगों की विशाल जनसंख्या पर केवल एक सरकारी अस्पताल है ! 2010 में प्रति 10000 लोगों पर 9 बिस्तर सुलभ थे,लेकिन 2022 आते-आते मोदी के कथित अच्छे दिन में अब प्रति 10000 लोगों पर केवल 5 बिस्तर में ही सिमट गया ! जबकि अमेरिकी साम्राज्यवाद के कई दशकों से आर्थिक नाकेबंदी झेल रहे क्यूबा जैसे देश में दुनिया की सर्वोत्तम स्वास्थ्य व्यवस्था की नजीर पेश करते हुए,वह नन्हा सा गरीब देश अपने 10000 लोगों पर 70 डॉक्टरों की सुव्यवस्था कर रखा है ! कितनी दुःखद स्थिति है कि भारत ब्रिक्स देशों के समूह में सबसे पीछे खड़ा है,दक्षिण अफ्रीका से भी पिछली कतार में !
हकीकत यह है कि कोरोना के भीषणतम् त्रासद काल में जब इस देश के लोग ऑक्सीजन,दवाओं और अन्य आवश्यक चीजों की भयंकरतम् कमी में अपनी साँसों के लिए,जीने के लिए जद्दोजहद कर रहे थे,तिल-तिलकर,घुट-घुटकर मर रहे थे,अस्पतालों में ईलाज के लिए छोड़िए,मरने के बाद भी श्मशान घाटों पर अपनी सीनियारिटी के लिए अपने पहले जलने के लिए आपस में मुर्दे भी लड़ रहे थे !उनके परिजन अपने दिवंगत हुए परिजनों के शवों को अंतिम संस्कार शीघ्र कराने के लिए वहाँ उपस्थित दलालों को रि श्वत दे रहे थे ! वहीं यहाँ के लुटेरे शोषक पूँजीपति बकौल नरेन्द्र मोदी ‘आपदा में अवसर ढूँढ रहे थे ! ‘ दवाओं को हजारों-हजार गुने मुनाफे में बेचने के बीभत्सतम् कुकृत्य कर रहे थे ! अस्पतालों में कथित भगवान के दूसरे अवतार डॉक्टर्स वगैर किसी कोरोना की दवा,इंजेक्शन,सीरप और टीके के ही लाखों-लाखों के बिल बनाकर गरीबों और असहायों तथा वंचितों को सरेआम लूट रहे थे ! उन्हें गरीबी के नरक में जबरन धकेल रहे थे ! सबसे बड़ी दुः खद हतप्रभ और विस्मित करनेवाली बात यह हुई कि कोरोनकाल के बाद लाखों लोगों के मरने के उपरांत झूठों के सम्राट श्रीयुत् श्रीमान् मोदीजी के एक मंत्रीमंडलीय सहयोगी ने मृतकों के परिजनों के घावों पर नमक छिड़कते हुए यह बयान दे दिया कि ‘इस देश में कोरोनकाल में ऑक्सीजन की कमी से एक भी आदमी नहीं मरा ! ‘ इससे बड़े झूठ का उदाहरण शायद दुनिया में शायद ही कहीं और सुनने को मिले !
वास्तविकता यह भी है कि भारत जैसे देशों में सुरसा की तरह बढ़ती आर्थिक असमानता को कम करने के लिए किसी जादू की छड़ी,मंदिर, मस्जिद,चर्च,भगवान,खुदा और गॉड के वरदान व आशीर्वाद की कतई जरूरत ही नहीं है ! अपितु चंद पूँजीपतियों के दलाल बने सत्ता के कर्णधार अपनी आमजनविरोधी और पूँजीपतिसमर्थक दुर्नीतियों में सुधार करें,वे इस देश के मजदूरों को उनके जीविकोपार्जन लायक मजदूरी देने तथा 90 करोड़ किसानों को उनके द्वारा उत्पादित फसलों का उचित मतलब उनकी लागत पर कुछ लाभांश रखकर देना सुनिश्चित करें,भारत में सर्वत्र खुशहाली आ जाएगी,लेकिन वैसे भी मोदी जैसे असहिष्णु और बर्बर व्यक्ति के इस देश के सत्ता प्रतिष्ठान पर रहते एक दिवास्वप्न सरीखा ही है !आज भारत में खेती एक घाटे का सौदा बनकर रह गई है ! खेती के लिए जरूरी सभी चीजें यथा खाद,पानी,बिजली,बीज,कीटनाशक,यूरिया, पेट्रोल,डीजल,ट्रैक्टर,मजदूरी आदि सभी कुछ बहुत मंहगे हैं,लेकिन किसान द्वारा उत्पादित फसल को बाजार में बिचौलियों द्वारा मिट्टी के मोल लूट लिया जाता है ! किसानों की भी मजबूरी है कि वे खेती न करें तो करें क्या ?यही सरकारें एकतरफ किसानों को उनके द्वारा उत्पादित फसलों की न्यायोचित मूल्य तक नहीं दे रहीं हैं,जिससे किसान लाखों की संख्या में खुदखुशी कर चुके हैं और अभी भी प्रति आधे घंटे में एक की दर से अभी भी उनकी आत्महत्या करना जारी है ! दूसरी तरफ पिछले कुछ सालों से अब तक इन्हीं सरकारों के कर्णधार अमीरों के 110 खरब रुपयों को एनपीए के चोर दरवाजे से माफ कर चुके हैं ! वैसे भी मोदी जैसे असहिष्णु और बर्बर व्यक्ति के इस देश के सत्ता प्रतिष्ठान पर रहते इस देश में आमजन,किसानों, मजदूरों, बेरोजगारों के लिए कुछ अच्छा करना एक दिवास्वप्न सरीखा ही है ! किसानों को उनकी फसलों की जायज कीमत न देकर वर्तमानसमय की सरकारें इस देश के 90 करोड़ लोगों को जबर्दस्ती गरीबी के दलदल में डुबोकर रखीं हैं !
हकीकत यह है कि इस देश में अचानक लॉकडाउन लगाकर,जीएसटी लागूकर,अचानक नोटबंदी लगाकर,स्कूलों,अस्पतालों, रेलवे और अन्य बहुतेरे सार्वजनिक संस्थानों को बेचकर एक आम गरीब,आदिवासी,दलित और अन्यपिछड़े वर्ग के युवा को उसके जीवन निर्वाह के लिए मिलनेवाली नौकरी के अधिकार से जानबूझकर वंचित कर उसे आजीवन बेरोजगार कर गरीबी और अभावग्रस्त जीवन जीने को मजबूर किया है ! प्राइवेट स्कूलों की ऊँची फीस न दे पाने से उनके बच्चों को अशिक्षित करने तथा निजी अस्पतालों के मनमानी लूट-खसोट से उसे गरीबी के नरक में जबरन जाने की दुःस्थितियों को जानबूझकर पैदा किया है ! कितने दुःख और अफ़सोस की बात है कि मोदी की यह जनविरोधी सरकार जब कोरोना के भयावह काल में लोग अस्पतालों,बेडों, वेंटिलेटरों,दवाओं की कमी से त्राहिमाम कर रहे थे,मर रहे थे,उस समय यह सरकार मेडिकल सेवाओं में सुधार करने के ठीक विपरीत कोरोनकाल में मेडिकल व्यवस्था में सुधार करने के ठीक उल्टा यह सरकार स्वास्थ्य बजट में 10 प्रतिशत की और कटौती कर दी ! शिक्षा के बजट में भी 6 प्रतिशत की तथा सामाजिक सुरक्षा के बजट को भी 1.5 प्रतिशत से घटाकर 0.6 प्रतिशत कर दी !
इस देश में कुछ सौ अमीरी की गगनचुंबी मीनारों को कदापि नहीं खड़ी करनी है,जिसके बगल में गरीबी के दलदल के अनन्त विस्तारित समुद्र में गरीब लोग कुपोषण,अशिक्षा,भूखमरी, बेरोजगारी से तिल-तिलकर मर रहे हों ! इस देश में मोदी ऐंड सरकार का यह कथित विकास का मॉडल कतई स्वीकार्य नहीं है ! हमें ऐसी जनहितैषी सरकारें और मानवीय प्रधानमंत्री चाहिए जो इस देश के अन्नदाताओं के दुःख को संजीदगी से सुनकर उनका मानवीय समाधान करें,कृषि में फसलों की लागत मूल्य कम करने के लिए उन्हें खाद,पानी,बिजली,डीजल,पेट्रोल, बीज,कीटनाशक,ट्रैक्टर आदि की कीमत न्यूनतम् रखी जाय,किसानों द्वारा उत्पादित फसलों की दलालों द्वारा लूटने पर उन्हें कठोरतम् दंड मिले, फसलों की कीमत न्यायोचित हो,जिससे किसान भी खुशहाल रहे,मजदूरों को भी इतनी मजदूरी मिले कि वे भी ठीक से अपने जीवन का निर्वाह कर सकें,शिक्षा रोजगारोन्मुखी हो,ताकि सभी को रोजगार मिल सके,कोई बेरोजगार युवा और किसान अपने जीवन से निराश होकर खुदकुशी करने को मजबूर न हो ! जातिवाद व धार्मिक प्रोपेगैंडा फैलाने वाले दरिंदों और नरपिशाचों पर कानूनी कार्यवाही करके उन्हें कठोरतम् दंड मिलना सुनिश्चित हो,ताकि ये धर्म और जातिवाद की वैमनस्यता फैलाने वाले भेड़िए समाज में किसी भी सूरत में अमन और शांति को भंग न कर सकें ! हमें ऐसा विकास चाहिए कि धन का प्रवाह ज्यादे मानवीय हो,सभी के सर पर छत हो,सभी को दोनों वक्त की रोटी नसीब हो,सभी को मुफ्त शिक्षा मिल सके,किसी गरीब से गरीब बीमार व्यक्ति को भी सही समय पर बगैर किसी लूट-खसोट के समुचित और मुफ्त इलाज सुलभ हो,सभी लोग स्वस्थ्य व खुशहाल जीवन जी सकें,ऐसी व्यवस्था हो कि बगैर जातिगत व धार्मिक संकीर्णता के सभी जातियों,धर्मों और समुदायों के लोग भयमुक्त होकर शांतिपूर्वक इस देश में जी सकें ! यह देश सभी का है,जो यहाँ रहते हैं ! यह देश किसी भी शैतान की बपौती नहीं जो इसे अपनी मर्जी का नाम देकर उसी के अनुरूप इस राष्ट्र को बनाने का ख्वाब देखने लगे ! इस देश में अमन और शांति से रहनेवाले ही इस देश के वास्तविक देशभक्त हैं,इस देश के सुख-शांति और सौहार्दपूर्ण वातावरण में आग लगाने वाले दरिंदे किसी भी सूरत में देशभक्त नहीं हो सकते ! ऐसे गुँडों के समूहों को जो इस तरह की निंदनीय कुकृत्य करते हैं,उनको यथेष्ठ और कठोरतम् सजा मिलनी ही चाहिए ।
-निर्मल कुमार शर्मा, 'गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण तथा देश-विदेश के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में पाखंड,अंधविश्वास,राजनैतिक, सामाजिक,आर्थिक,वैज्ञानिक,पर्यावरण आदि सभी विषयों पर बेखौफ,निष्पृह और स्वतंत्र रूप से लेखन ', गाजियाबाद, उप्र