Site icon अग्नि आलोक

P.N. Banerjee :आय एस आय के बीच बैठकर चाय पीने वाला RAW एजेंट

Share

ढाका की सड़कों पर एक ऐसा साया छाया हुआ था, जो दिन में ढाका यूनिवर्सिटी का सम्मानित प्रोफेसर था और रात में भारत की आंख और कान बनकर दुश्मन के दिल में उतर जाता था। 1971 का वह दौर था, जब पाकिस्तानी फौजें बंगाल की सरजमीं पर खून की होली खेल रही थीं।

उसी अंधेरे समय में एक गुमनाम RAW एजेंट P.N. Banerjee, जिन्हें सब Nath Babu के नाम से जानते थे, ISI के जाल में घुसकर ऐसा तूफान लेकर आए कि मात्र 13 दिनों में ढाका धराशायी हो गया। उनकी दी गई खुफिया जानकारियों ने पाकिस्तानी रेडियो फोर्स को पूरी तरह चूर चूर कर दिया, मुक्ति बहिनी को सही रास्ता दिखाया और अंततः आजाद बांग्लादेश का जन्म हुआ, उस अनजान छाया की बदौलत।

Phanishwar Nath Banerjee, वेस्ट बंगाल कैडर के एक IPS अधिकारी थे और RAW में जॉइंट डायरेक्टर के रूप में कलकत्ता में तैनात थे, लेकिन उनका असली मिशन ढाका में चल रहा था। Nath Babu के नाम से उन्होंने ढाका यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर का कवर लिया, जो इतना परफेक्ट था कि वह ISI के एजेंट्स और पाकिस्तानी इंटेलिजेंस के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठकर चाय की चुस्कियां लेते हुए उनके सबसे बड़े सीक्रेट्स चुरा लेते थे। हर मुलाकात एक जुआ थी, क्योंकि एक भी गलत शब्द या एक भी शक भरी नजर उनके लिए मौत का कारण बन सकती थी।

उस समय पाकिस्तानी सेना की क्रूरता चरम पर थी, लाखों बंगालियों का कत्लेआम, बलात्कार और यातनाएं चल रही थीं। Nath Babu वहां बिल्कुल अकेले, बिना किसी बैकअप के, ISI के नेटवर्क में लगातार सेंध लगाते रहे, जहां हर साया दुश्मन हो सकता था।

Banerjee ने RAW के संस्थापक R.N. Kao के सबसे भरोसेमंद राइट हैंड मैन के रूप में काम किया। उन्होंने पाकिस्तानी सेना की मूवमेंट्स, उनके रेडियो कम्युनिकेशन्स और रणनीतिक योजनाओं की इतनी विस्तृत जानकारी दी कि भारतीय फोर्सेस ने पाकिस्तानी रेडियो नेटवर्क को हैक कर पूरी तरह डिसरप्ट कर दिया।

नतीजा यह हुआ कि पाकिस्तानी कमांडर्स अपने ही रेडियो सिस्टम पर कन्फ्यूज होकर चिल्लाते रह गए, जबकि मुक्ति बहिनी और भारतीय सेना ने पीछे से सटीक वार किया। Banerjee ने बांग्लादेश की प्रोविजनल गवर्नमेंट के साथ कोऑर्डिनेशन किया, मुक्ति बहिनी को ट्रेनिंग और हथियारों की सप्लाई सुनिश्चित की। कुल 83,000 फाइटर्स तैयार किए गए, जिनमें लगभग 10,000 मुजिब बहिनी के कैडर्स थे, जिन्हें RAW ने ट्रेन किया था।

यह पूरा ऑपरेशन इतना सीक्रेट था कि Bangabandhu Sheikh Mujibur Rahman खुद उन्हें Nath Babu कहकर पुकारते थे और 1971 के बाद भी उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिलती रहीं।

कहानी का सबसे डरावना मोड़ 1974 में आया, जब उनकी मौत हुई। आधिकारिक तौर पर इसे हार्ट अटैक बताया गया, लेकिन बहुत से लोग मानते हैं कि यह मौत रहस्यमयी थी और इसके पीछे पॉइजनिंग या असासिनेशन जैसी साजिश हो सकती है।
क्या ISI ने उनसे बदला लिया या फिर कोई और ताकत इस खेल में शामिल थी, यह रहस्य आज भी अनसुलझा है।

Nath Babu की बदौलत भारत ने न सिर्फ पाकिस्तान को दो हिस्सों में बांटा, बल्कि एक नए राष्ट्र बांग्लादेश के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाई। यह एक ऐसे गुमनाम हीरो की कहानी है, जिसका नाम शायद ही इतिहास की किताबों में मिलता हो, लेकिन जिसकी परछाईं ढाका की गलियों और 1971 के युद्ध की हर जीत में हमेशा मौजूद रहेगी।

Exit mobile version