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*पंडित जी ने कसूरवार को चरणामृत पिलाया !दक्षिणा भी ली*

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   -सुसंस्कृति परिहार 

देश एक बार फिर तेजी से मनुस्मृति की सीख को दोहराने में लगा है। मध्यप्रदेश के सीधी पेशाब कांड की तरह एक और तमाचा भारतीय संविधान पर मारने की घटना मध्यप्रदेश के दमोह  जिले के सतरिया गांव से आई है जहां के एक पंडित जी अन्नू पांडे ने अपने गांव के एक युवक पुरुषोत्तम कुशवाहा से मीम बनाने की ग़लती के एवज में मंदिर में पंचायत बुलाकर अपने चरण धुलवाए ,वो पानी पुरषोत्तम को पिलवाया और 5100 रुपये की दक्षिणा अर्थदंड के रुप में ली तब उसे माफ़ कर दिया गया।

लेकिन यह ख़बर तेजी से दमोह जिले में जैसे ही फैली जिले से बड़ी संख्या में कुशवाहा समाज के लोग इस घटना के विरोध में सड़कों पर उतर आए।उनके साथ भगवती कल्याण संगठन और तमाम ओबीसी संगठन खासकर दमोह की नंबर वन आबादी वाला लोधी समाज भी सड़क पर उतर गया। उन्होंने इस अपमान के सम्बंध में ज्ञापन भी शासन को सौंप दिया।बात दूर तलक पहुंची जिससे दंगा जैसी स्थिति ना बन पाए प्रशासन ने गांव में डेरा डाल लिया है।

उधर ख़बर ये आ रही है कि दोनों पक्षों में सुलह हो गई है।पीड़ित व्यक्ति ने इस बात से इंकार कर दिया है कि अन्नू पांडे का कोई दबाव था वह खुद क्षमा मांगने पांव धोने और चरणामृत पीने गया था।उधर पंडित जी कह रहे हैं यह गुरु शिष्य का मामला है।इसके बावजूद पुरुषोत्तम घर से बाहर संकोचवश नहीं निकल रहा है।कुछ लोग बता रहे हैं वहां मौजूद प्रशासन के लोगों ने उसे घर से बाहर निकलने से रोका हुआ है।

 विदित हो,इस मामले की शुरुआत तब हुई जब सतरिया पंचायत ने यहां शराब बंदी की घोषणा की थी इसकी अवहेलना करते हुए अन्नू पांडे शराब पिए मिले उनके पास शराब की बोतलें भी थी।लोग उनसे क्या बोलते इसीलिए पुरुषोत्तम ने एआई की सहायता से एक चित्र जेरनेट किया जिसमें पंडित जी को जूतों की माला पहिना कर दिखाया गया था।जैसे ही ये चित्र गांव वालों ने देखा तो बहुत विरोध हुआ। पुरुषोत्तम ने विरोध देखते हुए वह चित्र वापस भी ले लिया। किंतु पंडित जी का खून खौल दूसरे दिन गलीज़ पुरातन परम्परा के तहत पुरषोत्तम को अपमानित किया गया

चूंकि यह बात देश भर में मीडिया ने पहुंचा दी थी इसलिए दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते से भी बात नहीं बन रही। क्योंकि कहा जा रहा कि यह सब पंडित समाज के दबाव में हुआ है।लोग इस गलती की सज़ा पंडित जी को देने की मांग कर रहे हैं।यक़ीनन यह घटना क्षमा योग्य नहीं है।

इस घटना को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए दमोह कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को आदेशित किया है कि वह एनसए के तहत दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करे। यह मानवीय गरिमा के विरुद्ध आचरण है।

कोर्ट ने यह भी कहा है कि यह जातिगत भेदभाव और मानवीय गरिमा का उल्लंघन है। इस मामले कीअगली पेशी 15 अक्टूवर को होनी है। ज्ञात हुआ है कि अनुज पांडे उर्फ़ अन्नू सहित चार अन्य तथा पीड़ित पुरुषोत्तम कुशवाहा प्रशासन की मौजूदगी के बावजूद फरार हो गए हैं।इसे क्या कहेंगे।

हाईकोर्ट द्वारा स्वत: संज्ञान लेने और दोषियों पर कार्रवाई के आदेश से दमोह में आंदोलन रत लोगों ने राहत  की सांस ली है।काश!अदालतें इस तरह कार्य करती होतीं तो ऐसी बहुत सी समस्याओं का अंत हो सकता था।

याद आता है सीधी का पेशाब कांड जब यह कृत्य भाजपा के कार्यकर्ता ने एक आदिवासी के साथ किया था तब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने उसके पैर धोए थे। देश के प्रधानमंत्री ने भी गटर साफ़ करने वालों के चरण धोए थे लेकिन किसी ने उस चरणामृत का पान नहीं किया था।ये दोनों नेताओं ने यह काम चुनाव के मद्देनजर सम्बंधित  जाति के वोट प्राप्ति हेतु किया था। दोनों ने दक्षिणा भी उन्हें दी थी किंतु पंडित जी ने तो दक्षिणा 5100₹लेकर अपनी जो अहमियत दिखाई।वे जब खुद अदालत से दंडित होंगे।तभी यह ऊंची-नीची जाति के बीच सामंजस्य स्थापित होगा और ऐसे लोग सबक सीखेंगे। हालांकि चरण धोने की परम्परा आज के दौर में पूरी तरह गलत है। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को भी चरण धोवन के कार्य से बचना चाहिए।

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