अपूर्व भारद्वाज
राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा को 100 दिन हो गए है उनकी राजनीतिक यात्रा एक ऐसे युवक की कहानी है जीसने अपनी दादी का गोलियां से छिन्न भिन्न शरीर देखा..अपने पिता का तो शरीर भी नही देख पाया..जिसने अपनी माँ को राजनीति से दूर रहने को कहा और बोला देशसेवा करने के लिए राजनीति में जाने के लिए क्या जरूरत है मेरी दादी और पिता देश के लिए मर गए थे मैं देश के लिए जियूँगा..
वो पप्पू नोटबंदी,कोरोना और किसान कानून पर सही निकला है देखना वो चालक चीन पर भी सही निकलेगा जिस पप्पू का आप मजाक उड़ाते थे आज वो ही मजदूरों, गरीबों औऱ किसानों की आवाज बनकर पूरे भारत की यात्रा कर रहा है आज यही सिस्टम अपने बनाये पप्पू को पास 100 में से 100 अंक देकर पास कर रहा है मतलब सिस्टम बदलने को तैयार है ..जिस दिन आपने बदलना शुरू कर दिया तो तय मानिये आपके अंदर बैठा “पप्पू” पास हो गया…
फिर वो न चाहते राजनीति में आता है लगातार तीन चुनाव जीतता है फिर भी उसे शहजादा कहा जाता है यह शहजादा 2009 में अपनी पार्टी को शानदार जीत दिलाता है फिर भी यह शहजादा देश का शंहशाह बनने से इंकार कर देता है वो शहजादा अपनी पार्टी को बदलने की कोशिश करता है लेकिन पुराने दरबारी उसे छोटा बाबा बोल कर उसकी सियासत को बचकाना कहते है और उसे बेवकूफ का तमगा देते है
बस इसी बात को एक शातिर गुजराती व्यापारी और उसकी गैंग पकड़ लेती है और उसका नामकरण पप्पू कर देती है नैरेटिव सेट हो जाता है एक पढ़े लिखे समझदार युवा को एक नियमित दसवीं पास नेता की भक्ति गैंग सार्वजनिक रूप से पप्पू बोल कर ट्रोल करती है और मीडिया से लेकर मिडिल क्लास तक इस नैरेटिव को 5 साल तक खूब जीते है और इस नैरेटिव के कारण वो 2019 का चुनाव भी हार जाता है
वो ईमानदार नेता कांग्रेस का अध्यक्ष पद छोड़ देता है वो परिवर्तन की सारी उम्मीद छोड़ देता है जब हमें एक समाज के रुप मे इस हारे हुए और सिस्टम से निराश व्यक्ति के साथ खड़े रहने की आवश्यकता थी तब हम ट्विटर और फेसबुक पर “पप्पू” पर निम्नतम श्रेणी के जोक बनाये जा रहे थे यह हमारे समाज की दशा और दिशा बताने के लिए काफी है
फिर कोरोना काल और किसान आंदोलन आता है अपनी ही पार्टी और सिस्टम से हारा छात्र फिर से कोशिश करता है समाज द्वारा पप्पू घोषित किया गया छात्र नए सिरे से राजनीति पढना और करना शुरू करता है वो लोग तथ्यों के साथ काले कानूनों से होने वाले खतरे औऱ उससे लड़ने के उपाय बताना शुरू कर देता है लेकिन सिस्टम, सरकार और लोग उसे पप्पू समझकर तिरस्कृत कर देते है लेकिन अचानक से उसकी बताई हुई एक एक बात सच होने लगती है सारे उपाय सरकार देर से ही सही लेकिन धीरे धीरे स्वीकार करना शुरू कर देती है
वो पप्पू नोटबंदी,कोरोना और किसान कानून पर सही निकला है देखना वो चालक चीन पर भी सही निकलेगा जिस पप्पू का आप मजाक उड़ाते थे आज वो ही मजदूरों, गरीबों औऱ किसानों की आवाज बनकर पूरे भारत की यात्रा कर रहा है आज यही सिस्टम अपने बनाये पप्पू को पास 100 में से 100 अंक देकर पास कर रहा है मतलब सिस्टम बदलने को तैयार है ..जिस दिन आपने बदलना शुरू कर दिया तो तय मानिये आपके अंदर बैठा “पप्पू” पास हो गया…

