हिंदू पंचांग के अनुसार, पौष का महीना दान-पुण्य के लिए बेहद शुभ माना जाता है. इस माह की पूर्णिमा अत्यंत शुभ तिथि मानी गई है. इस दिन गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है. पौष मास की पूर्णिमा पर भाग्य और आर्थिक पक्ष को मजबूत करने का शुभ अवसर है. इस बार शुभ संयोग में पौष पूर्णिमा आ रही है. इस दौरान दान-पुण्य का महत्व और अधिक बढ़ जाएगा. उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज ने बताया, पौष पूर्णिमा पर 12 राशि वालों के लिए कौनसा दान शुभ रहेगा, जिससे उनकी साल भर आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहे.
कब मनाई जाएगी पौष पूर्णिमा?
आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, इस बार पंचांग के मुताबिक पौष पूर्णिमा तिथि 2 जनवरी 2026 को शाम 6 बजकर 53 मिनट से शुरू होगी. वहीं, इस तिथि का समापन 3 जनवरी 2026 को दोपहर तीन बजकर 32 मिनट पर होगा. ऐसे में उदाया तिथि के अनुसार स्नान-दान की पौष पूर्णिमा 3 जनवरी को मनाई जाएगी.

राशि अनुसार जरूर करे यह दान
मेष: इस राशि के स्वमी मंगल हैं. पौष पूर्णिमा के दिन मेष राशि वाले लाल वस्त्र, मसूर दाल, शहद या लाल फल का दान करें. इससे ऊर्जा, साहस, संपत्ति बढ़ती है. कर्ज से छुटकारा मिलता है.
वृषभ: इस राशि के स्वमी शुक्र हैं. पौष पूर्णिमा के दिन वृषभ राशि वाले कंबल, सफेद मिठाई, चावल, घी, दही और सफेद तिल का दान करें. इससे भौतिक सुख-सुविधाएं बढ़ती हैं.
मिथुन: इस राशि के स्वामी बुध हैं. पौष पूर्णिमा के दिन मिथुन राशि वाले हरी मूंग दाल, हरी सब्जियां, आंवला, हरे वस्त्र और स्टेशनरी का दान. इससे कारोबार और करियर में तरक्की मिलती है.
कर्क: इस राशि के स्वामी चंद्रमा हैं. पौष पूर्णिमा के दिन कर्क राशि वाले दूध, सफेद मिठाई, चावल, चांदी, चीनी, मिश्री या जल का दान करें. इससे मानसिक शांति मिलती है. साथ ही माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है.
सिंह: इस राशि के स्वामी सूर्य हैं. पौष पूर्णिमा के दिन सिंह राशि वाले गेहूं, तांबा, गुड़, नारंगी वस्त्र, लाल फूल या माणिक्य का दान करें. इससे मान-सम्मान बढ़ता है.
कन्या: इस राशि के स्वामी बुध हैं. पौष पूर्णिमा के दिन कन्या राशि वाले हरे वस्त्र, हरी मूंग दाल, हरी सब्जियां और घी का दान करें. इससे स्वास्थय लाभ मिलता है.
तुला: इस राशि के स्वामी शुक्र हैं. पौष पूर्णिमा के दिन तुला राशि राशि वाले सफेद वस्त्र, इत्र, सुगंधित वस्तुएं, चावल और घी का दान करें. इससे धन, वैभव और ऐश्वर्य बढ़ता है.
वृश्चिक: इस राशि के स्वामी मंगल हैं. पौष पूर्णिमा के दिन वृश्चिक राशि वाले गुड़, लाल वस्त्र, मसूर दाल, लाल फल या निर्धन को धन का दान करें. इससे रुके हुए कार्य पूरे होते हैं.
धनु: इस राशि के स्वामी बृहस्पति पौष पूर्णिमा के दिन धनु राशि वाले चना दाल, केला, पीला वस्त्र, केसर, हल्दी और मक्का का दान करें. इससे संतान की उन्नति होती है.
मकर: इस राशि के स्वमी शनि देव हैं. पौष पूर्णिमा के दिन मकर राशि वाले काले तिल, सरसों का तेल, उड़द दाल और कंबल का दान करें. इससे शनि दोष कम होता है. कार्यक्षेत्र में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं.
कुंभ: इस राशि के स्वामी भी शनि देव हैं. पौष पूर्णिमा के दिन कुंभ वाले काला कंबल, तिल, उड़द दाल, जूते-चप्पल या धन का दान करें. इससे आर्थिक परेशानियों से छुटकारा मिलता है.
मीन: इस राशि के स्वामी बृहस्पति हैं. पौष पूर्णिमा के मीन वाले चने की दाल, पीला वस्त्र, बेसन के लड्डू, हल्दी और खाने-पीने की वस्तुओं का दान करें. इससे धन हानि नहीं होती है.
वैदिक पंचांग के अनुसार, 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा है, जो गंगा स्नान और लक्ष्मी नारायण की पूजा के लिए विशेष है। इस दिन ब्रह्म, इंद्र और शिववास जैसे कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। इन शुभ योगों में लक्ष्मी नारायण की पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है। लेख में मां लक्ष्मी के विभिन्न मंत्र भी दिए गए हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार, 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा है, जो गंगा स्नान और लक्ष्मी नारायण की पूजा के लिए विशेष है। इस दिन ब्रह्म, इंद्र और शिववास जैसे कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। इन शुभ योगों में लक्ष्मी नारायण की पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है।
पौष पूर्णिमा शुभ योग
ज्योतिषियों की मानें तो पौष पूर्णिमा के शुभ अवसर पर कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। इनमें दुर्लभ ब्रह्म योग का संयोग सुबह 09 बजकर 05 मिनट तक है। इसके साथ ही इन्द्र योग का भी संयोग है। इन्द्र योग सुबह 09 बजकर 06 मिनट से है, जो अगले दिन यानी 04 जनवरी को समाप्त होगा। इसके साथ ही पौष पूर्णिमा पर शिववास योग का भी संयोग है। हालांकि, शिववास योग दोपहर 03 बजकर 32 मिनट से है। इन योग में लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करने से साधक के सुख और सौभाग्य में वृद्धि होगी।
मां लक्ष्मी के मंत्र
- या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी।
या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी॥
या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी।
सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती ॥ - ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ ।
- ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ ।।
- ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो, धन धान्यः सुतान्वितः।
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः ॐ ।।
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥ - ॐ ह्रीं क्ष्रौं श्रीं लक्ष्मी नृसिंहाय नमः ।
ॐ क्लीन क्ष्रौं श्रीं लक्ष्मी देव्यै नमः ।।