Site icon अग्नि आलोक

भारतीय राजनीति में भूचाल लाने वाला पेगासस, जानिए कैसे बना दुनिया का सबसे ताकतवर जासूसी सॉफ्टवेयर

Share

जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस फिर सुर्खियों में है। हालिया चर्चा एक रिपोर्ट में भारत सरकार के 2017 में इसे इजराइल से खरीदने को लेकर हो रही है।। पेगासस (Pegasus) नाम के स्पाइवेयर का इस्तेमाल फोन के जरिए किसी की जासूसी के लिए किया जाता है।

महज एक दशक के अंदर ही इजराइल का पेगासस दुनिया का सबसे ताकतवर जासूसी सॉफ्टवेयर बनकर उभरा है। न केवल भारत बल्कि पिछले एक दशक के दौरान दुनिया के 40 देशों को ये सॉफ्टवेयर बेचा गया है।

चलिए जानते हैं कि आखिर क्या है पेगासस? कैसे हुई थी इसकी शुरुआत? कैसे कई बड़े देश बने पेगासस जासूसी सॉफ्टवेयर के कस्टमर?

पेगासस स्पाइवेयर आखिर है क्या?
पेगासस एक स्पाइवेयर या जासूसी सॉफ्टवेयर है, जिसे इजराइली फर्म NSO ग्रुप ने डेवलप किया है। स्पाइवेयर एक ऐसा सॉफ्टवेयर होता है, जिसे आपके फोन या कंप्यूटर डिवाइस में एंट्री करने, आपका डेटा इकट्ठा करने और आपकी सहमति के बिना इसे किसी थर्ड पार्टी को फॉरवर्ड करने के लिए डिजाइन किया जाता है।

पेगासस, शायद अब तक का सबसे शक्तिशाली जासूसी सॉफ्टवेयर है। यह स्मार्टफोन (एंड्रॉयड, आईओएस) में घुसपैठ करने और उन्हें सर्विलांस या निगरानी डिवाइसेज में बदलने के लिए डिजाइन किया गया है।

पेगासस क्या काम करता है?
इजराइली कंपनी का दावा है कि पेगासस का उपयोग अपराधियों और आतंकवादियों को पकड़ने के लिए एक टारगेटेड जासूसी टूल के रूप में होता है न कि लोगों की निगरानी में। हालांकि, महज कुछ ही साल में दुनिया भर की सरकारों ने इसका इस्तेमाल मनचाहे टारगेटेड लोगों की जासूसी में जमकर किया है।

जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस के पीछे कौन?

चिकन फार्म में हुई थी पेगासस बनाने वाली कंपनी की शुरुआत
न्यूयॉर्क टाइम्स मैगजीन की रिपोर्ट के मुताबिक, NSO कंपनी की शुरुआत 2000 के मध्य में तेल अवीव के पास स्थित बनई सियोन शहर में एक चिकन फार्म चलाने वाली बिल्डिंग से हुई थी। बिल्डिंग के मालिक को लगा कि चिकन से ज्यादा कमाई कोडर्स को बिल्डिंग किराए पर देने से हो सकती है। उसने सस्ते में ऑफिस खोज रहे टेक स्टार्टअप्स को बिल्डिंग किराए पर दे दी। इन्हीं में से एक स्टार्टअप उस NSO कंपनी बनाने वालों का था, जिसने आगे चलकर दुनिया का सबसे खतरनाक जासूसी सॉफ्टवेयर बनाया।

NSO ने क्यों बनाया था पेगासस सॉफ्टवेयर

कैसे मिली पेगासस को अपनी पहली डील
NSO ने 2011 में अपने स्पाइवेयर पेगासस को डेवलप कर लिया था। उसके लिए इसे किसी देश को बेच पाना उतना आसान नहीं रहा। कोई भी देश इजरायली कंपनी से किसी सॉफ्टवेयर को खरीदने को लेकर भरोसा नहीं कर रहा था। वे उसे शक की नजर से देख रहे थे।

इसी समय NSO कंपनी के चेयरमैन के रूप में मेजर जनरल एविग्डोर बेन-गैल की एंट्री हुई। वे एक सम्मानित सैन्य अधिकारी थे। उनकी एंट्री ने NSO और इजराइली सरकार को करीब लाने में अहम भूमिका निभाई।

NSO ने पेगासस के लिए इजराइली सरकार से मिलाया हाथ

NSO कंपनी ने इसके बाद एक ऐसा फैसला लिया, जिसने उसे बाकी जासूसी सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनियों से मीलों आगे खड़ा कर दिया।

पेगासस के जरिए इजराइल ने कैसे दुनिया में अपना दबदबा बढ़ाया

भारत ने भी पेगासस के बदले की इजराइल की मदद?
NYT की रिपोर्ट के मुताबिक, PM नरेंद्र मोदी के जुलाई 2017 में इजराइल दौरे के दौरान भारत-इजराइल के बीच करीब 15 हजार करोड़ रुपए की डिफेंस डील हुई। इस डील में पेगासस जासूसी सॉफ्टवेयर भी शामिल था।

पेगासस के बदले में भारत ने जून 2019 में संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद में इजराइल के पक्ष में और फिलीस्तीन के खिलाफ वोट दिया था। ये पहली बार था, जब भारत ने इजराइल-फिलीस्तीन विवाद में किसी एक के पक्ष में वोट दिया था।

भारत में 2019 में ही पेगासस के जरिए कई चर्चित लोगों की जासूसी का मुद्दा उठा था। हालांकि भारत और इजराइल दोनों सरकारें इससे इनकार करती रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में इसके जरिए पत्रकारों, मंत्रियों, एक जज, कई बड़े नेताओं से लेकर बिजनेसमैन और सामाजिक कार्यकर्ताओं तक के फोन की जासूसी की गई।

पेगासस वसूलता है सरकारों से मोटा चार्ज
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइली कंपनी ने दुनिया भर की कई सरकारों को पेगासस सॉफ्टवेयर बेचा है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कई स्मार्टफोन में सेंध लगाने में सक्षम पेगासस के एक सिंगल लाइसेंस की कीमत 70 लाख रुपए तक हो सकती है।

NSO ग्रुप अपने कस्टमर्स से पेगासस के जरिए 10 डिवाइसेज में सेंध लगाने के लिए करीब 5-9 करोड़ रुपए चार्ज वसूलता है और साथ ही इसके इंस्टॉलेशन के लिए करीब 4-5 करोड़ रुपए चार्ज करता है।

फोन में कैसे लगाता है सेंध?

पेगासस एंड्रॉयड या आईओएस की कमियों या बग को निशाना बनाता है। यानी अगर आपका फोन लेटेस्ट सिक्योरिटी से लैस हो, तब भी पेगासस उसमें सेंध लगा सकता है।

फोन में घुसने के बाद क्या करता है पेगासस?
फोन में एक बार इंस्टॉल होने के बाद, पेगासस फोन में मौजूद लगभग सारी जानकारियां, जैसे-मैसेज, कॉन्टैक्ट नंबर, कॉल हिस्ट्री, कैलेंडर, ईमेल, ब्राउजिंग हिस्ट्री समेत हर जानकारी चुरा लेता है। ये आपके फोन के माइक्रोफोन के जरिए आपका कॉल रिकॉर्ड या दूसरे से बातचीत तक रिकॉर्ड कर सकता है। ये आपके कैमरे के जरिए चुपके से आपकी वीडियो बना सकता है। ये जीपीएस के जरिए आपकी लोकेशन ट्रैक कर सकता है। कुल मिलाकर ये 24 घंटे आपकी निगरानी करने लगता है।

Exit mobile version