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लोग टुट जाते है एक घर बनाने में ,तुम तरस नही खाते बुलडोजर चलाने में

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लडोजर से केवल मकान – दुकान ही नही हमारा लोकतंत्र और न्यायालय की गरिमा भी जमीदोज़ हो रही हैं। क्योंकि पहले आदेश (१०:४५ बजे ) के बाद भी जब बुलडोजर नहीं रुका तो एक ही दिन में २० अप्रैल २०२२ को सीजेआई रमन्ना साहब को दोबारा आदेश ( तकरीबन १२:५० बजे ) देना पड़ा।*

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना ने जहाँगीरपुरी के आरोपियों ( केवल आरोपी है दोषी नहीं ) के घरों पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई !

रजिस्टार जनरल ( सुप्रीम कोर्ट ) को निर्देशित किया कि, तत्काल एमसीडी ( Municipal Corporation of Dehli जिसके अन्तर्गत दिल्ली के ११ जिले आते है ) और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करें।

बशीरबद्र हमारे देश के मशहूर शायर हैं। जनाब बशीरबद्र साहब जब ( भाजपा में शामिल नही हुए थे, उनके शामिल होने से मुझे व्यक्ति तौर पर कत्तई एतराज़ नहीं है। ) तब वे निखालिस शायर हुआ करते तब हम जैसे कितनों थे जो उनकी शायरी और नज़्मों का लुत्फ़ उठाया करते थे।

आज जब बुलडोजर का दिगर कारणों से ज्यादा बोलबाला है तब उनके एक मार्मिक नज़्म की चन्द लाईनें पेश है :-
लोग टुट जाते है एक घर बनाने में
तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में
फाख्ता की मज़बूरी ये भी कह नहीं सकती हैं
कौन सांप रखता हैं उसके आशियाने में
हर धड़कते पत्थर को लोग दिल समझते हैं
उम्रे बीत जाती हैं दिल को दिल बनाने में
बशीरबद्र साहब से मुआफ़ी मांगते हुए और सुप्रीम कोर्ट से सहारा लेते हुए, उनके मूल – लाईन में संशोधन करने की गुश्ताख़ी कर रहा हूँ …. !

लोग टुट जाते है एक घर बनाने में
तुम तरस नही खाते बुलडोजर चलाने में

सलाम – ए – सुबह …

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