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मंत्र का दर्शन और विज्ञान

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डॉ. प्रिया

 _वाल्मीकि के मरा-मरा से राम-राम का रहस्य :_

     मंत्र हमारे यहां गुरु के द्वारा ही दिया जाए, इस पर जोर था। वह मंत्र आप जानते रहे हैं सदा। हो सकता है गुरु आपके कान में कहे- ‘राम राम का जाप करो’। और आप हैरान होंगे और कहेंगे कि यह क्या? क्या यह मंत्र गुरु के बिना नहीं मिलता?

     यह तो दुनिया जानती है कि राम राम कहो, और इस आदमी ने कान में कहा कि राम राम कहो। यह तो पागलपन की बात है।

      नहीं, गुरु के दिए मंत्र में राम के ध्वनिगत रूप पर जोर होगा,जिसे दुनिया नहीं जानती। वैसे राम के भी पचासों प्रयोग हैं।

वाल्मीकि की सारी कथा हमने सुनी है, लेकिन अब वह कथा बचकानी हो गयी। ऐसी कथा हो गयी कि हम समझने लगे कि वाल्मीकि नासमझ था, गैर पढ़ा लिखा था, गंवार था।

     वह भूल गया कि गुरु ने कहा था कि ‘राम राम’ का पाठ करना, तो वह ‘मरा मरा’ पाठ करते हुए ज्ञान को उपलब्ध हो गया। ये चाबियां जब खो जाती हैं तो ऐसी गड़बड़ खड़ी हो जाती है। सच बात यह है कि राम के मंत्र के एक रूप का यही हिस्सा है, कि ‘राम राम’ कहते कहते जब आपके भीतर से ‘मरा मरा’ निकलने लगे तभी वर्तुल बना।

     राम राम गति से कहते हुए, जब बिलकुल स्थिति उल्टी हो जाए और मरा मरा निकलने लगे, तब ठीक ध्वनिगत हो गया। और जब मरा मरा निकलेगा तब एक अदभुत घटना घटती है। और वह घटना यह है कि आप नहीं रहे, आप मर गए।

      जब आप मर गए होते हैं, वही क्षण आपके जप पूरे होने का है। वही क्षण अनुभव का है, जब आप नहीं हैं, मिट गए।

      यह बड़े मजे की बात है कि अगर यह प्रक्रिया ठीक से की जाए, तो राम का पाठ आप शुरू करेंगे बहुत शीघ्र वह घड़ी आ जाएगी जब राम की जगह ‘मरा मरा’ निकलने लगेगा और आप चाहेंगे भी कहना राम तो न कह पाएंगे। सारा व्यक्तित्व मरा मरा कहेगा।

      उस वक्त आपकी मृत्यु घटित होगी, जो कि ध्यान का पहला चरण है। और जब आपकी मृत्यु पूरी घटित हो जाएगी तो आप अचानक पाएगे कि मरा मरा, राम में रूपांतरित होने लगा। फिर आपके भीतर से राम की ध्वनि निकलनी शुरू होगी।

       जो राम की ध्वनि अब निकलेगी आपके भीतर से, तब आपको राम का साक्षात्कार होगा, इसके पहले नहीं होगा। बीच में मरा की ध्वनि में रूपांतरण अनिवार्य है।

इसके तीन हिस्से हुए। राम से आप शुरू करेंगे, मरा में आप मिटेंगे, और राम पर फिर पूरा होगा। और जब तक बीच में मरा- मरा की प्रक्रिया पकड़ न ले आपको, तब तक असली राम की प्रक्रिया, जो तीसरे चरण में पूरी होने वाली है, वह नहीं होगी।

     अगर आप राम राम कहते ही गए, और मरा मरा नही आया बीच में तो पता ही नहीं है- उसके फोनेटिक ‘एमफेसिस’ कांपता नहीं है। उसका ध्वनिगत जो जोर है उस जोर को अगर ठीक से आपने दिया- जैसे अगर आपने ‘रा’ जोर से कहा, ‘म’ धीमे कहा तो ही ‘मरा’ बनेगा नहीं तो नहीं बनेगा।

      ’रा’ पर सारी ताकत लग जाएगी और ‘म’ को ढीला छोड़ दिया तो ‘म’ गड्डे की तरह हो जाएगा, ‘रा’ शिखर की तरह हो जाएगा।’रा’ एक उतुंग चोटी हो जाएगा और ‘म’ एक खाई हो जाएगा। और इस स्थिति में राम में ‘म’ छोटा करते आप चले जाएं तो बहुत शीघ्र आप पाएंगे कि रूपांतरण हुआ।’म’ शिखर बन जाएगा और ‘रा’ खाई बन जाएगा। और ‘मरा’ शुरू हो जाएगा।

        जैसे लहरें हैं, हर शिखर के बाद खाई और हर खाई के बाद शिखर! और अभी जो शिखर था वह कुछ देर में खाई हो जाएगा, जो खाई थी फिर शिखर बन जाएगी- ठीक लहर की तरह। ध्वनि की भी लहरें हैं।

      ठीक ध्वनि के भी उतार- चढ़ाव हैं, आरोह- अवरोह हैं। तो ठीक ध्वनि की व्यवस्था अगर ज्ञात न हो तो आप राम राम कहते रहें, कोई परिणाम नहीं होगा। अब जिन्होंने वाल्मीकि के संबंध में यह कहानी प्रचलित की थी कि वह नासमझ था, वह पढ़ा लिखा न था, वह गंवार था, ये सब बातें सत्य हैं कि वह नासमझ था, बे पढ़ा—लिखा था, गंवार था, लेकिन यह बात सच नहीं है कि इसलिए यह ‘मरा मरा’ कहने लगा।

जहां तक इस सूत्र का संबंध है, इस मामले में तो वह पूरा होशियार था। उसे ठीक, पूरे गणित का पता था। इतने मामले का तो उसे पूरा पता था कि ‘राम’ कैसे कहना है कि ‘मरा’ बन जाए। जब मरा बन जाए तभी आप संक्रमण से गुजरेंगे और फिर राम पैदा होगा।

      वह राम आपके द्वारा कहा हुआ राम नहीं होगा। फिर आप तो मर गए। वह राम जन्मेगा आपके भीतर, वह अजपा होगा। आप उसका जाप नहीं कर रहे, वह हो रहा है जाप।

      ध्वनिगत जोर की वजह से श्रुति है। और उसे कोई जाननेवाला, जो ध्वनियों को जानता हो, वही व्यक्ति उसे किसी को दे, तो ही उपयोगी होगा। वही शब्द होंगे, जो किताब में लिखे होगें, सबको मालूम होंगे, फिर भी उनका गणित अलग हो जाएगा। और गणित में ही सारा खेल है।

     ध्वनि का जो गणित है,आरोह- अवरोह के जो अन्तर हैं, उनका ही सारा खेल है।

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