Site icon अग्नि आलोक

दुनिया भर के आदिवासियों को समर्पित कविता

Share

हमारा खून हमेशा बहता रहा है
हम लिखते रहे हैं
शूरू से ही आजादी का इतिहास
जहां हम रह सके
खुली हवाओं के साथ

हमने कभी घुटने नहीं टेका किसी
सल्तनत के सामने
नहीं किया किसी
राजा से फरियाद

हम अपने ही दम पर
लड़ते रहे नदियों के लिए कि
कोई इनकी धारा को रोकने न पाए
बचाते रहे जंगल की हरियाली को कि
कोई इसे उजाडने न पाए

हमारा जल, जंगल और जमीन से
न जाने कैसा रिश्ता है कि
नही बरदास कर पाते हैं
इनकी तरफ उठी उंगलियों की ललकार
चाहे वो मुगल रहे हो या अंग्रेज
हमने हमेशा दिया है इन सबको
मुंहतोड़ जवाब

हमारी ये लड़ाईयां
अगर इतिहास के पन्नों में नहीं है
तो इसका है सीधा जवाब
मेरे बन्धु,
हमने किसी राजा के लिए नहीं लड़ा है
जिनका रहा है इतिहास गुलाम

हमने लड़ा है
इन जंगलों के लिए
इन पहाड़ों के लिए
जिन पर मर मिटने वालों के लिए
इतिहास में लिखने की
कोई परम्परा नहीं है

आगे से ऐसा होगा तो
उसमें सिकंदर का नाम नहीं होगा
नहीं होंगे अशोक महान !

Exit mobile version