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बिहार में राजनीतिक बदलाव ने भाजपा की नींद उड़ा दी है

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 शिवानन्द तिवारी , पूर्व सांसद

सीबीआई ने दिल्ली की विशेष अदालत में तेजस्वी यादव के ज़मानत को ख़ारिज करने अर्ज़ी दी है. रेलवे के राँची और उड़ीसा स्थित दो होटलों को दबाव बनाकर नाजायज ढंग से निजी हाथों में दे देने के आरोप की जाँच सीबीआई कर रही है. इस मामले में लालू जी के अलावा राबड़ी जी और तेजस्वी यादव को भी अभियुक्त बनाया गया है. दिल्ली की विशेष अदालत ने 2018 में ही तेजस्वी और राबड़ी जी को ज़मानत दे दी थी. इतने दिनों तक इस मामले में सीबीआई सोई हुई थी. अब अचानक उसकी नींद खुल गई है. वह भी तब जब नीतीश कुमार भाजपा गठबंधन से अलग होकर राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन में शामिल हुए हैं.

दरअसल बिहार में राजनीतिक बदलाव ने भाजपा की नींद उड़ा दी है. 2018 में विशेष अदालत ने तेजस्वी यादव को ज़मानत दी थी. उस समय से अब तक तेजस्वी यादव ने सीबीआई की जाँच को प्रभावित नहीं किया. अब अचानक वे जाँच को प्रभावित करने लगे हैं. सवाल यह भी है कि सीबीआई ने अबतक इस मामले की जाँच को लटका कर क्यों रखा है ! चार वर्ष तो तेजस्वी यादव को ज़मानत लिए हुए हो गए. केश और पहले दर्ज हुआ था. देश की सबसे काबिल, सक्षम और कुशल जाँच एजेंसी सीबीआई को ऐसे मामलों की जाँच में कितना समय लगाना चाहिए !सीबीआई के इस  आचरण से तो यही प्रमाणित होता है कि दिल्ली की मोदी सरकार राजनीतिक ब्लैक मेलिंग के लिए जानबूझकर कर ऐसे मामलों को लटकवा कर रखती है. 

लेकिन ऐसा होगा, हमलोग मान कर चल रहे थे. प्रदेश और देश की जनता को इस संभावना से स्वंय तेजस्वी यादव ने आगाह भी कर दिया था. नीतीश कुमार ने भी बता दिया था कि ऐसा होगा तो जनता देखेगी. जनता सब देख और समझ रही है.

 शिवानन्द तिवारी , पूर्व सांसद

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