संजय रोकड़े
मतलब साफ है कि अंदर का भी एक टांग खिचों गणित चल रहा है।
अब देखना है हाल ए भाजपा क्या होना है।
सबसे पहले तो योगी राज्य में विधानसभा चुनाव ही नही लड़ना चाहते थे।
वे विधान परिषद याने पिछले दरवाजे से विधानसभा के रुप में पहुंचना चाहते थे।
अब अगर यूपी में भाजपा का सूपड़ा साफ होता है तो जिम्मेदार सब कोई हो इस रणनीति के तहत योगी को मैदान में उतरने को मजबूर कर दिया और योगी चाह कर भी ना नही कह पाये। उपर से अयोध्या की जगह गोरखपुर।
अधीर मानव धीर बनाये रखे कल तक पिक्चर और साफ हो जायेगी।
मसलन कौन क्या चाहता था और क्या हो गया।
योगी ने अपने जितने भी चहेतों की लिस्ट केंद्रीय चुनाव समिति के सामने रखी उनमें से ज्यादातर को ठेंगा दिखा दिया है।
अभी तो अपने बड़े नेताओं पे भी योगी का दिमाग ठण्का हुआ है
।
चुनाव हारे या जीते ठीकरा सबपे फुटेगा। यूपी भाजपा में चुनावी हार जीत के बाद की एक लड़ाई देखने काबिल होगी। धुरज रखे।
