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पोस्ट मार्टम : कोई एक गाल पर थप्पड़ मारे तो दूसरा आगे कर दो!

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 (यह बापू ने कब और किनसे कहा?)

           ~ पुष्पा गुप्ता

     _राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के खुद के देश में 70 साल से अफवाह की शक्ल में कुछ ऐसी बातें घुली हुई हैं जिनका कोई राष्ट्र सिर पैर नहीं।_

      भारत में जिस गांधी को प्रचारित किया जा रहा है वह वे गांधी नहीं जिन्होंने 40 वर्ष तक अंग्रेजी शासन से नैतिक कुश्ती लड़ी और जीती बल्कि एक असहाय , चरखा कातने वाले, भगतसिंह को न बचाने वाले, सुभाष बोस को देश से निकाला देने वाले , भारत को विभाजित करने वाले और यदि कोई एक गाल पर थप्पड़ मार तो दूसरे गाल को आगे करने वाले गांधी को प्रचारित किया जा रहा है।

       आम बोलचाल में ये भी कहा जाता है कि गांधीजी इस सिद्धांत के व्यक्ति थे कि अगर कोई एक गाल पर थप्पड़ मारे तो गांधीजी अपने दूसरे गाल को प्रस्तुत कर देते थे।

         ये एकदम गलत  प्रचारित किया जाता है । वास्तविकता ये है कि गांधीजी की अहिंसा एक बहादुर और वीर आदमी की अहिंसा थी।

     _गांधीजी ने ये भी कहा था कि हिंसा और कायरता में से किसी एक का चुनाव करना हो तो मैं हिंसा को चुनूंगा।_

       गांधी ने जो किया वो दुनिया के सामने है उनकी प्रासंगिकता इतिहास में दर्ज है। उन्होंने जो किया वह सार्वजनिक रूप से किया, मजबूती के साथ  किया। जिसके खिलाफ किया उसे चेलेंज देकर किया और अपने कृत्य की जिम्मेदारी ली, जिम्मेदारी से मुंह नहीं चुराया और सबसे बड़ी बात कभी माफी नहीं मांगी ।

       ऐसे स्टेट्समैन के खिलाफ यदि कोई सद्दी मुसद्दी कोई बेबुनियाद गढ़कर प्रतिदिन उसकी पुड़िया बनाकर फेंक दे तो इसका उत्तर देना भी अपने समय को बर्बाद करना है। लेकिन हमारी चुप्पी ऐसे लोगों को खाद पानी उपलब्ध कराती है।

भारत दुनिया का अजीबोगरीब देश है जो अपने राष्ट्रपिता पर कीचड़ फेंक रहा है और अपनी मूर्खता  की दुर्गंध को दुनियाभर में फैला रहा है। ऐसे में हमारा लिखना जरूरी है।

        ये सही है कि  गांधीजी  की जिंदगी में कई दौर आये। उनके 40 साल के स्वतंत्रता संघर्ष में  गांधी-भगतसिंह दौर, गांधी- अम्बेडकर दौर, गांधी- सुभाषचंद्र बोस दौर और भारत विभाजन दौर आये जिनके बारे में एक एक तथ्य तिथिवार  इतिहास में दर्ज हैं जिन पर हम विगत 8 सालों में   खुद बीसियों बार लिख चुके हैं, लेकिन अब एक ऐसी अफवाह गढ़ी जा रही है जो गांधी ने कभी अपने देशवासियों से नहीं कही।

         ये अफवाह दरअसल 70 सालों से  हमारे घर की चहारदीवारियों  से गुजरती हुई संकुचित दिमागों में बैठ गयी है। आप सभी  किसी न किसी से यह अफवाह जरुर सुनी होगी कि कोई आपके एक गाल पर थप्पड मारे तो दूसरा आगे कर दो। ऐसा बताया जा रहा है कि गांधी ने भारतीयों से ये शब्द कहे। 

       आज के इंटरनेट युग में गांधी जिंदा हैं। हम इस प्रश्न को इधर उधर पूछने के बजाय सीधे गांधी से ही पूछते हैं। गांधी जिंदा हैं , संकलित रचनाओं में  98 वॉल्यूम में जिंदा हैं,  जीडी तेंदुलकर की पुस्तक The Mahatma : Life of Mohandas Karamchand Gandhi के आठ खण्ड मौजूद हैं इसके अलावा देश विदेश की हजारों किताबों में कहीं नहीं लिखा कि गांधी ने खुद या अपने सत्याग्रहियों से ये कहा हो कि कोई एक गाल पर थप्पड मारे तो दूसरा गाल उसके सामने प्रस्तुत कर दो।

 अब हम इस अफवाह की तह में जाते हैं। दरअसल ये शब्द गांधी ने  ईसा मसीह के उद्धरण देकर अंग्रेजों से कहे। गांधीजी ने  अहिंसा का रास्ता सोच समझकर अपनाया। उन्होंने कहा कि अंग्रेज चाहते हैं कि भारतीय लोग बंदूख उठाएं क्योंकि अंग्रेजों के पास बन्दूखों का जखीरा है। हम अंग्रेजों से उस हथियार से लड़ेंगे जो अंग्रेजों के पास नहीं।

      वह हथियार है- अहिंसा। इस प्रकार गांधी जी अंग्रेजों को उन्हें उन्हीं की भाषा में जवाब देने की रणनीति अपनाई तथा अहिंसा का रास्ता चुना। वे अंग्रेजों के बनाये सारे कानून तोड़ते थे तथा अंग्रेजों के खिलाफ लगातार  बोलते रहते थे पर हिंसा नहीं करते थे।

         उन्होंने चंपारण आन्दोलन, नील के किसानों की लड़ाई, बारडोली सत्याग्रह, नमक कानून तोड़ना ,

सविनय अवज्ञा, असहयोग आन्दोलन,  भारत छोड़ो आंदोलन जैसे कई बड़े आंदोलन का सहारा लिया और अंग्रेजों को उन्हीं के हथियार से मारा।

   _जब अंग्रेजों ने अहिंसा आंदोलन को बेरहमी से कुचला  तब गांधीजी ने उन्हीं के धर्म की किताब  बाइबल से ईसा मसीह का यह वाक्य उन्ही के मुंह पर मार दिया जिसमे लिखा था “यदि कोई तुम्हे एक गाल पर थप्पड़ मारे तो दूसरा गाल आगे कर दो।_

         गांधीजी ने कहा ये अहिंसा तो ईसा मसीह करते थे और ईसा को मानने वाले अंग्रेज हमारे भारत में ईसा के विरुद्ध काम कर रहे हैं। इस बात से कई देशों के ईसाई और इंग्लैंड का एक बहुत बड़ा उदारवादी तबका अंग्रेजों के अत्याचारों से खफा हो गया।  और गांधी के साथ भारत की आजादी के समर्थन में खड़े हो गए।

          गांधी अगर आज होते तो यही कहते कि यदि  देश के कुछ लोगों को ऐसा लगता है कि यह आजादी भीख में मिली है या 99 साल की लीच पर मिली है तो  वे तत्काल यह भीख लौटा दें. जिस रास्ते को वे उचित समझते हैं उस रास्ते से देश को  फिर से आजादी  दिलाएं। यदि  वे ऐसा कर देश को आजाद कर सके तो मैं उन लोगों का सम्मान करने के लिए सबसे आगे की पंक्ति में रहूंगा।

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