इस दुनिया मे ज्ञान की शक्ति है महान,
अपरिहार्य ,अद्भुत है ज्ञान की शक्ति,
ज्ञान बिना इस दुनिया में,
मनुष्य है पशु के समान ,
बिन ज्ञान चक्षु के दुनिया मे,
मनुष्य का जीवन है तिमिर के समान,
ज्ञानी पुरुष के लिए विशेष पत्थर,
कोहिनूर व पारस के है समान,
अज्ञानी के लिए कोहिनूर व पारस भी,
है पत्थर के समान,
अज्ञानी व अल्प ज्ञानी को,
अपने थोथे ज्ञान पर है अभिमान,
ज्ञानी पुरुष दुनिया मे महात्मा के है समान,
अज्ञान मनुष्य के लिए है अरि के समान,
सभा मे जब भी अज्ञानी (मूर्ख)शोर मचाता है,
तब ज्ञानी पुरूष करता मौन को धारण,
अज्ञानी जब भी बड़बड़ाता,
ज्ञानी पुरूष ज्ञान को बढ़ाता,
भरत करता ज्ञान कौशल में एक महापुरुष का बखान,
कर दिया कौटिल्य ने अर्थशास्त्र का निर्माण,
अपने बुद्धि कौशल से अबोध बालक चंदगुप्त को कर दिया महान,
कहता है आपसे यह गहलोत
बनाओ अपनी संतति को ज्ञानी,
छट जाएगा अंधकार फैलेगा ज्ञान,
तब जाकर के सही अर्थ में बनेगा भारत,
विश्व गुरु महान,
भरत गहलोत
जालोर राजस्थान,

