बहुत ही
भयानक शब्द है
प्रार्थना
बहुत बड़ा छल है
प्रार्थना के पीछे
वे खींच लेना चाहते है
लोगों के पाँवों के
नीचे की जमीन
और खुद
बैठे दिखना चाहते हैं
सातवें आसमान पर खुदा होकर।
वे जो नहीं देखना चाहते कि
किसी के पास भी हो
मजबूत रीढ़ की हड्डी ,
नहीं देखना चाहते है
कोई ऐसा सर
जो झुका हुआ न हो
उनके सामने।
वे देखना चाहते हैं
लोगों में भिखारीपना
उनके सामने फैला हुआ हाथ
ताकि वे
अनुभव कर सकें
दाता होने का गर्व
और लोग करते रहै
उनसे प्रार्थना
सुबह , शाम
बने रहें भक्त
और भक्त से ज्यादा
कभी कुछ नहीं
ताकि
वे बने रह सकें भगवान
प्रार्थना के लिए।
वे नहीं चाहते कि
लोग कभी भी कर सकें
आत्मसात
‘अधिकार ‘ का अर्थ
और
न करनी पड़े
लोगों को प्रार्थना।
प्रार्थना-2
अगर तुम
इसी तरह प्रार्थना करते रहे
तब तुम्हें
कभी भी
नहीं मिल पाएगा
संवाद का हक।
प्रार्थना -3
कभी भी
मत करना
किसी से भी प्रार्थना
ईश्वर से तो बिल्कुल नहीं।
वह किसी को
कुछ नहीं दे सकता।
सुप्रसिद्ध कवि व लेखक- रामकिशोर मेहता ,अहमदाबाद, गुजरात, संपर्क - 919408230881, ईमेल - ramkishoremehta9@gmail.com
संकलन -निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद,

