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राष्ट्रपति चुनाव: BJP के पास 13 हजार वोट कम,  YSRCP और BJD की ओर देख रही BJP

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राष्ट्रपति चुनाव 2022 की घोषणा के साथ ही वोट जुटाने की कवायद शुरू हो चुकी है। अभी सत्‍ताधारी राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपने उम्‍मीदवार के नाम का ऐलान नहीं किया है। कई नाम चर्चा में हैं, मगर अंतिम मुहर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगाएंगे। ताजा स्थिति के हिसाब से, NDA बहुमत के आंकड़े से करीब 13,000 वोट दूर है। ऐसे में फोकस YSR कांग्रेस और बीजू जनता दल (BJD) पर आ गया है। अगर YSRCP या बीजद का समर्थन मिल जाता है तो एनडीए उम्‍मीदवार की जीत का रास्‍ता साफ हो जाएगा। पिछले दिनों YSRCP चीफ जगन मोहन रेड्डी और ओडिशा के मुख्‍यमंत्री नवीन पटनायक ने दिल्‍ली में मोदी से मुलाकात की थी। यह साफ नहीं हो सका कि इन मुलाकातों के दौरान क्‍या बात हुई। दोनों क्षेत्रीय दल लो-प्रोफाइल रहे हैं। दोनों ने ही 2017 के राष्‍ट्रपति चुनाव में बीजेपी का साथ देते हुए राम नाथ कोविंद के लिए वोट किया था। बीजेपी को एक बार फिर इन दोनों से अपने उम्‍मीदवार को समर्थन की उम्‍मीद है।

निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को राष्‍ट्रपति चुनाव का कार्यक्रम जारी किया। 18 जुलाई को भारत का अगला राष्‍ट्रपति चुनने के लिए मतदान होगा। 21 जुलाई को पता चलेगा कि कौन राष्‍ट्रपति भवन में शिफ्ट होने जा रहा है।

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अगर YSRCP और BJP ने दिया साथ तो…
अगर YSRCP (43,500 वोट्स) या बीजद (31,700 वोट्स) एनडीए के उम्‍मीदवार का समर्थन करते हैं तो वह आसानी से जीत जाएगा।

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संसद में ताकत बढ़ी, फिर कमजोर क्‍यों है BJP?
लोकसभा में बीजेपी की संख्‍या अच्‍छी-खासी है। हालांकि क्षेत्रीय दलों के साथ उसके संबंध काफी बदल गए हैं। इसके अलावा विधानसभाओं में बीजेपी के घटते संख्‍या-बल ने राष्‍ट्रपति चुनाव में उसे क्षेत्रीय दलों पर निर्भर कर दिया है। बीजेपी का शिवसेना और अकाली दल से रिश्‍ता टूट गया। वहीं AIADMK की तमिलनाडु विधानसभा में ताकत घट गई है। बीजेपी इसी साल उत्‍तर प्रदेश चुनाव जीती है लेकिन उसके विधायक घट गए हैं। 2017 के मुकाबले बीजेपी राजस्‍थान, छत्‍तीसगढ़ और मध्‍य प्रदेश में कमजोर हुई है।

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बीजेपी को उम्‍मीद, चल जाएगा काम!
बीजेपी के पास एक प्‍लस पॉइंट यह है कि विपक्ष एकजुट नहीं है। विपक्षी दलों के बीच रस्‍साकशी चल रही है। TMC, TRS और AAP चाहते हैं कि बीजेपी के खिलाफ गैर-कांग्रेस मोर्चा खड़ा किया जाए। NDA के रणनीतिकारों को भरोसा है कि चुनाव में इतनी मुश्किल नहीं आएगी क्‍योंकि मार्जिन ज्‍यादा नहीं है।

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