शिवानन्द तिवारी
पूर्व सांसद
हमारा देश सही मायने में 2014 में आज़ाद हुआ. 15 अगस्त 1947 को मिली आज़ादी, आज़ादी नहीं भीख थी. पद्म पुरस्कार से ताज़ा ताज़ा नवाज़ी गईं कंगना रनौत जी ने इस सच्चाई से देश को रूबरू कराया है. एक मायने में कंगना जी का कहना सत्य है. इस देश में आज के पहले महान संघर्ष से मिली अपने देश की आज़ादी को भीख कहने की कल्पना भी कोई नहीं कर सकता था !
आज़ादी के उस महान संघर्ष ने कैसे कैसे लोगों को इस देश में पैदा किया !जिनके जन्म से हमारी भूमि धन्य हुई थी. आज उन सभी लोगों ने अपना सर झुका लिया होगा.
कंगना जी की बात को हल्के से ख़ारिज नहीं किया जा सकता है. पिछले दो अक्तूबर को महात्मा गाँधी के जन्मदिन पर जो हुआ उसकी कल्पना पहले कोई कैसे कर सकता था! जिनके विषय में सदी के महान वैज्ञानिक आइन्स्टाइन ने कहा था कि आनेवाली पीढ़ियाँ यक़ीन नहीं करेंगी कि हाड़ मांस का बना ऐसा आदमी इस धरती पर चलता फिरता होगा. सुना है कि दो लाख से उपर लोगों ने उस दिन गाँधी के हत्यारे का नाम लेकर ज़िंदाबाद बोला. ऐसी आज़ादी की कल्पना पहले थी क्या !
अभी अभी कंगना जी की आज़ादी के आज़ाद लोग विराट कोहली पर बहुत नाराज़ हुए थे. विराट देश की क्रिकेट टीम के कप्तान हैं. अपनी टीम के किसी भी साथी पर नाजायज हमले के विरोध में खड़ा होना उनकी कप्तानी का धर्म है. हमला भी उसके ख़राब खेल को लेकर नहीं हुआ था. क्योंकि पूरी टीम ही उस दिन बैठ गई थी. लेकिन निशाने के लिए चुना गया टीम में शामिल एक मुसलमान खिलाड़ी को. विराट ने अपनी कप्तानी का कर्तव्य निभाया और उन लोगों को मुंहतोड़ जवाब दिया. बदले में विराट को उनकी दस महीने की बेटी के साथ बलात्कार की धमकी मिली. कंगना जी की आज़ादी में ही ऐसा बोल सकने का बेशर्म साहस कोई कर सकता है.
कंगना जी असली आज़दी की शुरुआत 2014 से मानती हैं. अर्थात् उनके अनुसार नरेंद्र भाई मोदी के
सत्तारूढ़ होने के बाद ही देश में असली आज़ादी आई. नरेंद्र भाई ट्विटर पर बहुत सक्रिय रहते हैं. ऐसा नहीं है कि कंगना जी द्वारा प्रतिपादित आज़ादी की नई तारीख़ की ख़बर उन तक नहीं पहुँची होगी. इसलिए उनका मौन कंगना जी के समर्थन का ही संदेश दे रहा है. हम माँग करते हैं कि प्रधानमंत्री जी कंगना जी का मौन नहीं बल्कि मुखर समर्थन करें.
शिवानन्द तिवारी
पूर्व सांसद

