प्रवीण मल्होत्रा
प्रधानमंत्री जी ने यह दावा किया है कि आरएसएस ने देश की आजादी के आंदोलन में भाग लिया था और स्वयंसेवक जेल गए थे.
सामान्य धारणा यह है कि सिर्फ डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने 1930 में निजी हैसियत से और आरएसएस के सरसंघचालक पद से इस्तीफा देकर जंगल सत्याग्रह में भाग लिया था. उस अवधि में डॉ. पराँजपे ने अस्थायी रूप से आरएसएस के सरसंघचालक का दायित्व संभाला था.
ऐतिहासिक रूप से यह प्रमाणित है कि डॉ. हेगडेवार के अलावा गोलवलकर, देवरस, डॉ. मुंजे, और डॉ. मुखर्जी से लेकर उस समय के संघ के किसी भी पदाधिकारी, प्रचारक और स्वयंसेवक ने आजादी के आंदोलन में कभी भी भाग नहीं लिया और कोई भी कभी जेल नहीं गया.
उपरोक्त में से जो लोग आजादी की लड़ाई में जेल गए थे तो आरएसएस को प्रधानमंत्री जी के दावे की पुष्टि के लिए जेल गए स्वयंसेवकों की सूची, उन्हें जिन धाराओं में सजा हुई थी और कारावास की अवधि तथा जेल का नाम जहां उन्हें बंदी बना कर रखा गया था, सार्वजनिक करना चाहिए. ताकि प्रधानमंत्री जी के दावे की पुष्टि हो सके.
महात्मा गांधी, सरदार पटेल, पं. नेहरू, मौलाना आजाद, सुभाषचंद्र बोस, डॉ. राजेंद्रप्रसाद, जयप्रकाश नारायण, डॉ. लोहिया और कांग्रेस के अन्य सेकड़ों नेताओं का बार-बार जेल जाना और लम्बी कारावास की अवधि भोगने का पूरा इतिहास पब्लिक डोमेन में है.
क्या आरएसएस के नेताओं का भी ऐसा कोई इतिहास उपलब्ध है? इसका उत्तर तो आरएसएस ही दे सकता है जो आज विजयादशमी के दिन अपनी जन्म शताब्दी मना रहा है. एक संगठन के रूप में आरएसएस ने विगत सौ वर्ष में जो उपलब्धियां हांसिल की हैं वे अतुलनीय हैं.
जो संगठन एक समय अस्पर्शी था वह आज देश का सर्वाधिक शक्तिशाली संगठन बन चुका है. केंद्र और कई राज्यों की सरकारों तथा सभी संवैधानिक संस्थानों पर उसका नियंत्रणकर्ता के रूप में प्रभाव है. लेकिन आजादी की लड़ाई में, एक संगठन के रूप में उसका कोई योगदान नहीं था. यह भी एक कड़वी सच्चाई है.

