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सार्वजनिक पैसे से, निजी गिफ्ट नही दिया जाना चाहिए

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एड. आराधना भार्गव
सार्वजनिक पैसे से निजी गिफ्ट दिये जाने के दुष्परिणाम देश के लिए घातक है। चुनाव के दौरान फ्री में बिजली-पानी या अन्य सुविधाऐं देने का वादा करने वाले राजनीतिक दलों के खिलाफ देश के सबसे बड़ी अदालत ने चिंता जाहिर की है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने कहा है कि निःसदेह यह गम्भीर मसला है। इससे मतदाता और चुनाव प्रभावित होते हैं, मुफ्त योजनाओं का बजट नियमित बजट से आगे निकल रहा है जो चुनावों की निष्पक्षता को जरूर प्रभावित करता है। राजनीतिक दल उपहार बांटने बिजली-पानी फ्री देने और कई अन्य गैर वाजिब वादे करते हैं। भाजपा ने उत्तर प्रदेश में बिजली की दर 50 प्रतिशत कम करने, 1 करोड युवाओं को मुफ्त टैबलेट, स्मार्ट फोन, 4.5 करोड श्रमिकों के खाते में 1-1 हजार रूपया, 1 करोड़ निराश्रित महिलाओं के खाते में 1-1 हजार, करोड़ों लोगों को मार्च माह तक फ्री राशन देने का वादा किया है। मुफ्त में महिलाओं को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं योगी आदित्यनाथ की फोटो वाली साड़ी बाॅटने वाली खबर तो अखबार में सभी ने पढ़ी है। क्या उत्तर प्रदेश के मतदाता भारतीय जनता पार्टी से यह प्रश्न करेंगे कि मुफ्त में देने वाले उपहार का पैसा वे कहाँ से लायेंगे ? अगर आपने प्रश्न नही किया तो स्पष्ट है कि शराब और नशीली वस्तुओं की बिक्री बढ़ेगी ये चीजें सस्ती होगी परिणाम स्परूप उत्तर प्रदेश में माफिया राज चलेगा महिला हिंसा बेरोजगारी चरम पर होगी।
दुनिया से भारत को सबक सीखना होगा, अमेरिका में सरकार द्वारा निजी उपहार देने पर पाबन्दी है, अमेरिका यह मानता है कि सार्वजनिक पैसे से निजी उपहार नही दिये जाने चाहिए। अगर देश भारत के संविधान से चले तो आर्थिक गैर बराबरी समाप्त हो सकती है, आर्थिक गैर बराबरी आर्थिक हिंसा है, यह देश के नागरिकों को समझाने की आवश्यकता है। चुनाव में निजी उपहार देने के कारण आर्थिक गैर बराबरी बढ़ रही है प्राकृतिक संसाधनों की लूट चरम सीमा पर है, गरीबों की लूट और पूँजीपति को छूट चुनाव में मुफ्त वादे के ही गम्भीर परिणाम हैं। अखबारों पर नजर डालें तो अखबार आर्थिक तंगी के कारण हत्या, लूट, डकैती, धोखाधड़ी के अपराध से भरे पड़े हैं। 24 जनवरी की ही बात है मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में चाचा ने 4 साल की बच्ची की हत्या कर लाश दफना दी क्योंकि उसे फिरोती में 3 लाख रूपया प्राप्त नही हुए, आरोपी के परिवार में पत्नि वा दो बच्चे हैं लेकिन बेरोजगार होने के कारण वह आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। शादी एक पवित्र रिश्ता है और ऐसा कहते हैं कि यह रिश्ता जन्मों-जन्मों तक का होता है किन्तु आर्थिक गैर बराबरी के कारण यह रिश्ता कैसे तार-तार हो रहा है। मध्यप्रदेश के सागर जिले में लुटेरी दुल्हन विवाह के 24 घण्टे के भीतर ही ससुराल से मिले जेवर और नगदी लेकर फरार हो गई। बकरीयों की डकैती के बारे में आपने कभी कल्पना भी नही किया होगा लेकिन मध्यप्रदेश के सतना में गरीबों का एटीएम कही जाने वाली बकरीयों पर भी डांका डालकर लुटेरे उसे ले गये। मंदिरों की दानपेटी तथा मंदिर की सम्पत्ति लूटने के लिए मंदिर में डकैती की घटनाऐं आए दिन पढ़ने को मिलती है। बेरोजगारी चरम सीमा पर है। सरकार द्वारा सरकारी नौकरीयों के लिए वैकेन्सी नही निकाली जा रही है, बेरोजगार सड़कों पर रोजगार व नौकरी पाने के लिए उतर रहे हैं। बेरोजगारी का आलम यह है कि नौकरीयों में भ्रष्टाचार से पीढ़ित नव-जवान राष्ट्रीय सम्पत्ति को नुकसान पहुँचा कर, रेल में आग लगाकर रेल्वे की नौकरी में भ्रष्टाचार को उजागर कर सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। अगर इसी तरह सरकार द्वारा सार्वजनिक पैसे से निजी उपहार की योजना चलती रही तो बहुत जल्दी हमारा देश वेनेजुएला बन जाऐगा। 1980 में तेल की कीमतें उच्च स्तर पर होने के कारण वेनेजुएला एक अमीर देश था इसके बाद यहाँ की सरकार ने खाने से लेकर पब्लिक ट्राॅस्पोर्ट तक सब मुफ्त कर दिया। 70 प्रतिशत खाने की सामग्री आयात करने लगा। धीरे धीरे आर्थिक स्थित बिगड़ने लगी। इसके बाद तेल की कीमतें गिरने से मंदी आ गई।
सरकार की गलत नीतियों के कारण देश का अन्नदाता आज कर्जे में है उदाहरण के तौर पर लगभग 23 कृषि उत्पाद का समर्थन मूल्य सरकार द्वारा किया गया है किन्तु फसलों की खरीदी समर्थन मूल्य पर ना खरीदे जाने के कारण किसान आज कर्ज में डूबा है, उदाहरण के तौर पर मक्के का समर्थन मूल्य 1870/- रूपये होने के पश्चात् किसानों को 800-1300 रूपये क्विंटल पर मक्का बेचने पर मजबूर होना पढ़ा क्योंकि उसके उपर सोसाईटी, बिजली, बैंक, और साहूकार का कर्ज है। जब मक्का किसान के पास से व्यापारी के पास पहुँच गया तो आज की तारीख में 2022 रूपये क्विंटल में मक्का बिक रहा है इस लूट के खिलाफ सरकार बोलने के लिए राजी नही है। सरकार किसानों को मुफ्त में कुछ भी ना दे लेकिन समर्थन मूल्य पर खरीदी का कानून अवश्य बनाए, उसी तरह उद्यौगपतियों द्वारा उत्पादित कृषि उपकरणों का भी न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करें। सरकार किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने को तैयार नही है किन्तु उद्यौगपतियों को अधिकतम मूल्य पर बेचने की पूरी छूट एवं सब्सिडी भी देने का काम करती है। संविधान के नीति निर्देशक तत्व में समाज के कमजोर तबके को उठाने के लिए जन कल्याण के माध्यम से कार्यक्रम चला कर कमजोर तबके को ऊँचा उठाने का काम करें तो यह देश हित में होगा। स्व. जयललिता द्वारा ग्रामीण क्षेत्र की बालिकाओं को स्कूल जाने हेतु साईकिल उपलब्ध कराना एक जनहित का कार्य था जिसके परिणाम भी देश ने देखे आज स्कूल तथा काॅलेज में पढ़ने वाली गरीब बालिकाओं को मुफ्त परिवहन के पास उपलब्ध कराना देश में बेटियों के ऊर्जा को राष्ट्रीय विकास में जोड़ने के लिए बड़ा योगदान होगा।
सार्वजनिक पैसे से निजी उपहार देने के परिणाम स्वरूप देश का आर्थिक बजट बिगड़ता है। उत्तरप्रदेश में बजट से ज्यदा मुफ्त सौगात की योजनाओं की घोषणा की गई है इसके परिणाम को मतदाताओं को समझना चाहिए, राजस्व को एकत्रित करने के लिए सरकार नशीली वस्तुओं की बिक्री बढ़ायेगी तथा इनकी कीमतें कम करेगी। मध्यप्रदेश इसका उदाहरण है यहाँ शराब सस्ती कर दी गई है सरकार का लक्ष्य है कि 18 साल से अधिक उम्र का हर नव-जवान शराब पीये किन्तु सरकार के लक्ष्य से ज्यदा अब गांव में 7-8 साल का बच्चा भी शराब पीने लगा है। स्कूल में ड्रापआऊट का प्रतिशत बढ़ रहा है। चुनाव में मुफ्त वादे की घोषणा पर देश की सर्वोच्च न्यायालय की अकेले की चिंता से काम नही बनेगा आईये हम सब मिलकर अपने देश को वेनेजुएला बनने से बचाऐं तथा चुनाव में मुफ्त उपहार देने वाली पार्टीयों का बहिष्कार का उनके रजिस्टेशन पर सवालिया निशान उठाऐं।
एड. आराधना भार्गव

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