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प्राइवेटीकरण और क्रोनी कैपिटैलिजम

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पुष्पा गुप्ता

       _जब सब कुछ प्रायवेट हाथों में चला जाता है तब यह होता है और आप कुछ नहीं कर सकते, क्योंकि आपके हाथ पैर ज़बान सब कट चुके होते हैं!_

       हिमाचल प्रदेश के सेब पर लगभग पूरी तरह से काबिज हो चुकने के बाद किसानों से  सेब खरीदने के दाम अडानी जी की कंपनी तय करती है। औसत सात फ़ीसदी इन्फ्लेशन सालाना मान लें तो किसानों के लिए दाम इतने तो बढ़ने ही चाहिए क्योंकि उत्पादन लागत और जीवित रहने की लागत लगातार बढ़ रही है!

        पर बीते दो वर्षों से अडानी जी किसानों से सेब खरीदने की कीमत लगातार कम कर रहे हैं।

विभिन्न श्रेणियों के सेबों के दाम पिछले बरस अडानी जी ने क्रमशः Rs 85, Rs 73, Rs 63 और Rs 53 प्रति किलो दिये थे पर इस बरस क्रमशः   Rs 76, Rs 68, Rs 62 और Rs 52 का भाव दिया है।

       _हिमाचल सरकार/केंद्र सरकार, भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ , भारतीय किसान संघ आदि इस पर फ़िलहाल गायब हैं। मीडिया मुसलमानों के घरों पर तिरंगे झंडे की अनुपस्थिति की तलाश में है। आप और हम अपने अपने घरों पर झंडे की फोटो सोशल मीडिया पर प्रस्तुत करने में व्यस्त हैं और देश में आजादी की पिचहत्तरवीं वर्षगांठ का जश्न है।_

       तिरंगा मेरे घर की छत पर भी लहरा रहा है लेकिन मेरी वाल पर किसानों की बेबसी दर्ज़ हो रही है, मुझे आपका मूड फीका करने के गुनाह में शरीक मानिये !

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